(रणभेरी): आजमगढ़ अहरौला थाना क्षेत्र के शंभूपुर गांव में मंगलवार को हुए सनसनीखेज हत्याकांड के पीछे करीब सात साल पुरानी पारिवारिक रंजिश की कहानी सामने आई है। पत्नी और दो पुजारियों की हत्या के बाद तीन बच्चों को घर में बंधक बनाने वाले अरविंद सिंह ने पुलिस टीम पर भी फायरिंग की। करीब सात घंटे तक चले मान-मनौव्वल के बाद पुलिस ने घर में प्रवेश किया। जवाबी कार्रवाई में अरविंद घायल हुआ और अस्पताल में डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। इस दौरान उसकी गोली से घायल नौ वर्षीय बेटे शौर्य की भी उपचार के दौरान मौत हो गई।
2019 में शुरू हुआ था विवाद
पुलिस और परिजनों के अनुसार, इस पूरे विवाद की जड़ वर्ष 2019 की एक हत्या से जुड़ी है। अरविंद के चचेरे भाई मनीष सिंह पर उसके भाई सुनील सिंह की हत्या का आरोप लगा था। इससे पहले सुनील ने मनीष के खिलाफ चोरी, छिनैती और छेड़खानी समेत कई मामलों में शिकायतें दर्ज कराई थीं।
एक मामले में अदालत ने मनीष सिंह और उसके भाई अवनीश को 20 वर्ष की सजा सुनाई थी। बाद में दोनों जमानत पर बाहर आए और वर्ष 2019 में सुनील सिंह की हत्या कर दी गई। इस मामले में दोनों को जेल भेज दिया गया था। करीब डेढ़ महीने पहले ही दोनों जेल से बाहर आए थे।
पूजा को लेकर हुआ विवाद
मृतक सुनील सिंह के साले सूरज सिंह के मुताबिक, सुनील की पत्नी बबीता को लेकर परिवार में पहले से विवाद था। उनका दावा है कि बबीता और मनीष के बीच संबंधों की जानकारी सुनील को हो गई थी। इसके बाद परिवार में तनाव बढ़ गया था।
इसी बीच अरविंद की पत्नी और उसकी मां ने कुछ पुजारियों से संपर्क किया। परिजनों के मुताबिक, पुजारियों ने उन्हें बताया कि सुनील की आत्मा से जुड़ी परेशानी के कारण घर में पूजा कराई जानी चाहिए। सोमवार से घर में पूजा-पाठ चल रहा था।
मंगलवार को अरविंद ने पूजा का विरोध किया। उसने पुजारियों को दोबारा घर न आने की चेतावनी दी थी। इसके बावजूद पूजा जारी रहने पर वह नाराज हो गया। इसी दौरान विवाद बढ़ा और उसने कथित तौर पर पत्नी तथा पूजा कराने आए दो पुजारियों पर गोली चला दी।
तीन बच्चों को लेकर कमरे में बंद हो गया
घटना के बाद अरविंद अपनी तीन संतानों को लेकर घर के एक कमरे में चला गया और अंदर से दरवाजा बंद कर लिया। उसकी मां और भतीजी किसी तरह घर से बाहर निकल आए, जबकि बच्चे कमरे के अंदर ही रह गए।
सूचना मिलने के बाद पुलिस ने पूरे इलाके को घेर लिया। ग्रामीणों की भीड़ को मौके से हटाया गया। पुलिस अधिकारियों ने परिवार के लोगों के जरिए अरविंद को समझाने और बच्चों को सुरक्षित बाहर निकालने का प्रयास किया, लेकिन वह बाहर आने के लिए तैयार नहीं हुआ।

सात घंटे तक चलता रहा पुलिस का प्रयास
एसपी डॉ. अनिल कुमार के अनुसार, पुलिस लगातार अरविंद से बातचीत कर उसे आत्मसमर्पण के लिए समझाती रही। इसी दौरान कमरे के अंदर से गोली चलने की आवाज आई। पुलिस को बच्चों की सुरक्षा को लेकर तत्काल कार्रवाई करनी पड़ी।
पुलिस टीम ने दरवाजा तोड़कर कमरे में प्रवेश किया। पुलिस के अनुसार, अंदर पहुंचते ही अरविंद ने टीम पर फायरिंग कर दी। जवाब में पुलिस ने भी गोली चलाई। इस कार्रवाई में अरविंद घायल हो गया। उसे तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। वहीं, गोली लगने से घायल उसके नौ वर्षीय बेटे शौर्य ने भी इलाज के दौरान दम तोड़ दिया।
पहले भी सामने आ चुकी हैं ऐसी घटनाएं
आजमगढ़ में इससे पहले भी पारिवारिक विवाद के बाद हत्या की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। दो जुलाई 2025 को जहानागंज क्षेत्र में एक युवक ने कथित तौर पर अपनी मां और भाई-बहन पर गोली चला दी थी। इस घटना में उसकी मां की मौत हो गई थी, जबकि भाई-बहन घायल हुए थे। आरोपी की भी मौत हो गई थी।
इसी तरह 16 अप्रैल 2023 को कप्तानगंज क्षेत्र के धंधारी गांव में पारिवारिक विवाद के बाद एक युवक पर अपने पिता, मां और बहन की हत्या करने का आरोप लगा था। पुलिस ने आरोपी को घटना के बाद गिरफ्तार किया था। शंभूपुर की घटना ने एक बार फिर पुराने पारिवारिक विवादों के हिंसक रूप लेने और बच्चों के बीच फंस जाने को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
