राष्ट्रगीत ‘वन्दे मातरम्’ के 150वें वर्ष पर वाराणसी में भव्य आयोजन, राष्ट्रभक्ति के नारों से गूंजा वातावरण

राष्ट्रगीत ‘वन्दे मातरम्’ के 150वें वर्ष पर वाराणसी में भव्य आयोजन, राष्ट्रभक्ति के नारों से गूंजा वातावरण

वाराणसी (रणभेरी): राष्ट्रगीत ‘वन्दे मातरम्’ की रचना के 150 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में शुक्रवार को वाराणसी के नई सड़क स्थित कोदई चौकी क्षेत्र में प्रणाम वन्दे मातरम् समिति द्वारा एक भव्य राष्ट्रभक्ति एवं सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में सामाजिक कार्यकर्ताओं, बुद्धिजीवियों, युवाओं एवं स्थानीय नागरिकों ने भाग लेकर राष्ट्रगीत के ऐतिहासिक महत्व को याद किया और देशभक्ति का संदेश दिया।

समारोह का शुभारंभ भारत माता एवं महान साहित्यकार बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय के चित्र पर माल्यार्पण एवं पुष्पांजलि अर्पित कर किया गया। इसके पश्चात उपस्थित सभी लोगों ने एक स्वर में राष्ट्रगीत ‘वन्दे मातरम्’ का सामूहिक गान किया, जिससे पूरा वातावरण देशभक्ति के रंग में रंग गया। कार्यक्रम के दौरान स्कूल के बच्चों को मिठाई वितरित की गई तथा राष्ट्रप्रेम से ओत-प्रोत विभिन्न नारों का उद्घोष भी किया गया।

समिति के अध्यक्ष अनुप जायसवाल ने अपने संबोधन में कहा कि वर्ष 2026 राष्ट्रगीत ‘वन्दे मातरम्’ के इतिहास का अत्यंत महत्वपूर्ण वर्ष है, क्योंकि इसी वर्ष इसकी रचना के 150 वर्ष पूरे हो रहे हैं। उन्होंने बताया कि वर्ष 1875 में महान साहित्यकार बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित यह गीत स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान करोड़ों भारतीयों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना। स्वतंत्रता सेनानियों ने अंग्रेजी शासन के विरुद्ध संघर्ष करते समय इसी गीत के उद्घोष के साथ अपने प्राणों की आहुति दी और यह गीत राष्ट्रीय चेतना का प्रतीक बन गया।

राष्ट्रगीत ‘वन्दे मातरम्’ के 150वें वर्ष पर वाराणसी में भव्य आयोजन, राष्ट्रभक्ति के नारों से गूंजा वातावरण

उन्होंने कहा कि वर्ष 1905 में वाराणसी में आयोजित भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अधिवेशन में भी ‘वन्दे मातरम्’ के राष्ट्रीय महत्व पर गंभीर चर्चा हुई थी। उस समय कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने इसके गायन और राष्ट्रव्यापी प्रसार का समर्थन किया। इसी अधिवेशन में प्रसिद्ध कवयित्री एवं स्वतंत्रता सेनानी सरला देवी चौधरानी द्वारा राष्ट्रगीत का गायन किया गया, जिसके बाद यह गीत स्वतंत्रता आंदोलन का प्रमुख स्वर बन गया और कांग्रेस के विभिन्न अधिवेशनों तथा जनसभाओं में नियमित रूप से गूंजने लगा।

अनुप जायसवाल ने कहा कि स्वतंत्र भारत के गठन के बाद 24 जनवरी 1950 को संविधान सभा के अध्यक्ष एवं देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेन्द्र प्रसाद ने घोषणा की थी कि ‘जन गण मन’ भारत का राष्ट्रगान होगा, जबकि स्वतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले ‘वन्दे मातरम्’ को राष्ट्रगीत के रूप में समान सम्मान और प्रतिष्ठा प्राप्त होगी। उन्होंने कहा कि यह निर्णय भारतीय संस्कृति, राष्ट्रीय अस्मिता और स्वतंत्रता आंदोलन के प्रति सम्मान का प्रतीक है।

उन्होंने अपने संबोधन में यह भी कहा कि हाल के दिनों में संसद के निचले सदन लोकसभा में कई जनप्रतिनिधियों ने भी ‘वन्दे मातरम्’ के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और राष्ट्रीय महत्व का उल्लेख करते हुए इसे भारत की आत्मा, राष्ट्रभक्ति, एकता और अखंडता का प्रतीक बताया है। उनके अनुसार इससे देशभर में राष्ट्रगीत के प्रति सम्मान और जनजागरण की भावना और अधिक मजबूत हुई है।

राष्ट्रगीत ‘वन्दे मातरम्’ के 150वें वर्ष पर वाराणसी में भव्य आयोजन, राष्ट्रभक्ति के नारों से गूंजा वातावरण

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एवं पूर्व पार्षद गिरीश श्रीवास्तव ने कहा कि ‘वन्दे मातरम्’ किसी एक दल, संगठन या विचारधारा का नहीं, बल्कि पूरे राष्ट्र की साझा धरोहर है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक नागरिक का दायित्व है कि वह राष्ट्रगीत का सम्मान करे तथा नई पीढ़ी को इसके गौरवशाली इतिहास और स्वतंत्रता संग्राम में निभाई गई इसकी भूमिका से परिचित कराए।

समारोह का संचालन धीरेंद्र शर्मा एवं सोमनाथ यादव ने संयुक्त रूप से किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन ओमप्रकाश यादव बाबू एवं चन्द्र विजय सिंह ने प्रस्तुत किया। कार्यक्रम का नेतृत्व समिति के अध्यक्ष अनुप जायसवाल ने किया।

इस अवसर पर शंकर जायसवाल, आदित्य गोयनका, मंगलेश जायसवाल, एडवोकेट सुनील कन्नौजिया, मनीष चौरसिया, धर्मचंद, प्रकाश, प्रदीप जायसवाल, अखिल वर्मा, राहुल जायसवाल, चंदन केशरी, कुंवर यादव, शिवम् यादव, प्री कुमार माणिक सहित अनेक गणमान्य नागरिक, सामाजिक कार्यकर्ता एवं राष्ट्रप्रेमी उपस्थित रहे।

समारोह के अंत में सभी उपस्थित लोगों ने एक स्वर में ‘वन्दे मातरम्’, ‘भारत माता की जय’ और ‘जय हिन्द’ के गगनभेदी उद्घोष किए। राष्ट्रभक्ति के उत्साह और राष्ट्रीय एकता के संदेश के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।

Share this news

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *