NEET पेपर लीक केस: फास्ट ट्रैक कोर्ट में पहली सुनवाई टली, CBI के वकील की गैरमौजूदगी पर कोर्ट सख्त

NEET पेपर लीक केस: फास्ट ट्रैक कोर्ट में पहली सुनवाई टली, CBI के वकील की गैरमौजूदगी पर कोर्ट सख्त

(रणभेरी): नीट पेपर लीक मामले की सुनवाई के लिए गठित विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट में सोमवार को होने वाली पहली कार्यवाही ही टल गई। दिल्ली के राउज एवेन्यू स्थित विशेष अदालत में सुनवाई के दौरान केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की ओर से पक्ष रखने के लिए कोई सरकारी वकील मौजूद नहीं था। इस पर अदालत ने डायरेक्टर ऑफ प्रोसिक्यूशन को निर्देश दिया कि वह CBI की ओर से पैरवी करने के लिए सरकारी अधिवक्ता की नियुक्ति करें।

अदालत ने मामले में आरोपी दिनेश बिवाल और विकास बिवाल की जमानत याचिकाओं पर सुनवाई के लिए अगली तारीख 3 अगस्त तय की है। सोमवार को आरोपियों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता एपी सिंह अदालत में पेश हुए।

यह मामला पब्लिक एग्जामिनेशन (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) एक्ट, 2024 के तहत गठित विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट में पहली बार पहुंचा था। सरकार की ओर से तय किए गए नए प्रावधानों के बाद अब नीट पेपर लीक से जुड़े मामलों की सुनवाई इसी विशेष अदालत में की जाएगी, ताकि मामलों का निपटारा जल्द हो सके।

पेपर लीक मामलों में तेजी से कार्रवाई के लिए बनाया गया विशेष कोर्ट

नीट परीक्षा में कथित पेपर लीक के विवाद के बाद केंद्र सरकार ने ऐसे मामलों की सुनवाई तेज करने के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने का फैसला लिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 23 जुलाई को सोशल मीडिया संदेश के जरिए कहा था कि परीक्षा में गड़बड़ी करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए तेज सुनवाई की व्यवस्था की गई है।

इसके बाद 23 जुलाई और 26 जुलाई को जारी वीडियो संदेशों में भी प्रधानमंत्री ने दोषियों पर प्रभावी कार्रवाई और न्याय प्रक्रिया को गति देने की बात कही थी।

CBI ने अब तक 13 लोगों को किया गिरफ्तार

नीट पेपर लीक मामले की जांच कर रही CBI अब तक 13 आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है। सभी आरोपी फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं। जांच एजेंसी के अनुसार, इस मामले में 12 मई को एक सरकारी अधिकारी की शिकायत के आधार पर FIR दर्ज की गई थी।

मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS), भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और परीक्षा में अनुचित साधनों के इस्तेमाल से संबंधित धाराओं के तहत जांच शुरू की गई थी।

CBI की जांच में सामने आया है कि कथित पेपर लीक का नेटवर्क कई लोगों तक फैला हुआ था। जांच एजेंसी ने शुभम खैरनार, यश यादव, मांगीलाल बिवाल, विकास बिवाल और दिनेश बिवाल समेत कई लोगों की भूमिका की जांच की है।

एजेंसी का दावा है कि मांगीलाल के मोबाइल फोन से कथित तौर पर लीक हुआ प्रश्नपत्र मिला था। जांच के मुताबिक, मांगीलाल ने अपने बेटे विकास के लिए नीट का प्रश्नपत्र हासिल करने के उद्देश्य से शुभम खैरनार से संपर्क किया था।

देश में पहली बार पेपर लीक मामलों के लिए विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट

अब तक देश में परीक्षा पेपर लीक जैसे मामलों की सुनवाई सामान्य अदालतों में होती रही है। लंबी न्यायिक प्रक्रिया के कारण ऐसे मामलों में फैसले आने में कई साल लग जाते थे। नीट पेपर लीक विवाद के बाद पहली बार इस तरह के मामलों के लिए विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट की व्यवस्था की गई है।

फास्ट ट्रैक अदालतों की शुरुआत भारत में वर्ष 2000 में हुई थी। 11वें वित्त आयोग की सिफारिशों के आधार पर इन अदालतों का गठन किया गया था। उस समय देशभर में 1734 फास्ट ट्रैक कोर्ट स्थापित करने के लिए विशेष आर्थिक सहायता की सिफारिश की गई थी।

फास्ट ट्रैक कोर्ट का प्रदर्शन

केंद्र सरकार के आंकड़ों के अनुसार, दुष्कर्म और पॉक्सो (POCSO) मामलों की सुनवाई के लिए बनाई गई फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट ने वर्ष 2019 से 2025 के बीच 3 लाख से अधिक मामलों का निपटारा किया है।

इन अदालतों में मामलों के निपटारे की दर करीब 96 प्रतिशत से अधिक रही है। हालांकि, नए मामलों के लगातार दर्ज होने के कारण लंबित मामलों की संख्या भी बढ़ी है। वर्ष 2025 के अंत तक इन अदालतों में 2.45 लाख से ज्यादा मामले लंबित थे, जबकि 2024 के अंत में यह संख्या करीब 2.04 लाख थी।

सरकार का उद्देश्य है कि विशेष फास्ट ट्रैक अदालतों के जरिए परीक्षा संबंधी अपराधों की सुनवाई तेज हो और दोषियों के खिलाफ समय पर कानूनी कार्रवाई पूरी की जा सके।

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