वाराणसी (रणभेरी): साइबर अपराधों पर लगाम लगाने के लिए चलाए जा रहे विशेष अभियान ऑपरेशन म्यूल स्ट्राइक के तहत वाराणसी पुलिस ने एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। साइबर क्राइम सेल और संबंधित थानों की संयुक्त टीम ने शहर के चार अलग-अलग थाना क्षेत्रों में कार्रवाई करते हुए छह म्यूल खाता धारकों के खिलाफ चार अलग-अलग मुकदमे दर्ज किए हैं।
पुलिस जांच में यह बात सामने आई है कि इन बैंक खातों का इस्तेमाल संगठित साइबर अपराधियों द्वारा ठगी की गई रकम को अलग-अलग खातों में ट्रांसफर और छिपाने के लिए किया जा रहा था। शुरुआती जांच में करोड़ों रुपये के संदिग्ध लेन-देन का खुलासा हुआ है।

पुलिस आयुक्त मोहित अग्रवाल और संयुक्त पुलिस आयुक्त (अपराध) आलोक प्रियदर्शी के निर्देश पर यह अभियान चलाया गया। इसके तहत साइबर क्राइम सेल और साइबर सेल की टीमों ने भेलूपुर, सिगरा, चेतगंज और चोलापुर थाना क्षेत्रों में एक साथ कार्रवाई करते हुए संदिग्ध खातों की जांच की और कानूनी प्रक्रिया शुरू की।
जांच के दौरान सामने आया कि संबंधित खातों से जुड़ी कुल 51 शिकायतें राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर दर्ज हैं। इन शिकायतों में करीब 2 करोड़ 42 लाख 89 हजार 752 रुपये की साइबर ठगी से जुड़े लेन-देन का उल्लेख पाया गया है। पुलिस ने जांच के दौरान बड़ी मात्रा में धनराशि को होल्ड और फ्रीज भी कराया है, जिससे आगे की रिकवरी की संभावना बढ़ गई है।
सबसे बड़ी कार्रवाई भेलूपुर थाना क्षेत्र में दर्ज की गई, जहां एक ही खाते के खिलाफ 43 शिकायतें सामने आईं। इस खाते के माध्यम से लगभग 2.19 करोड़ रुपये की ठगी की बात सामने आई है। इसी तरह सिगरा, चेतगंज और चोलापुर क्षेत्रों में भी म्यूल अकाउंट धारकों के खिलाफ केस दर्ज कर आगे की जांच की जा रही है।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, म्यूल अकाउंट वे बैंक खाते होते हैं जिनका इस्तेमाल साइबर ठग अवैध धन को एक जगह से दूसरी जगह भेजने, उसे छिपाने और ट्रेल तोड़ने के लिए करते हैं। इनका उपयोग ऑनलाइन निवेश फ्रॉड, फर्जी ग्राहक सेवा कॉल, डिजिटल गिरफ्तारी जैसे मामलों तथा पार्ट-टाइम जॉब के नाम पर होने वाली धोखाधड़ी में तेजी से बढ़ा है।
कमिश्नरेट वाराणसी पुलिस ने आम लोगों से अपील की है कि वे किसी भी तरह के लालच, कमीशन या नौकरी के बहाने अपना बैंक खाता, एटीएम कार्ड, चेकबुक या मोबाइल नंबर किसी अनजान व्यक्ति को न सौंपें। पुलिस ने चेतावनी दी है कि ऐसी गतिविधियों में शामिल पाए जाने पर खाताधारकों पर भी साइबर अपराध के तहत कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
