वाराणसी (रणभेरी): प्रधानमंत्री के स्वच्छ भारत मिशन और नगर निगम के “स्वच्छ, सुंदर काशी” अभियान के दावों के बीच शहर के औरंगाबाद मोहल्ले की स्थिति इन दावों की हकीकत बयां कर रही है। मंगलवार सुबह मोहल्ले में जगह-जगह फैली गंदगी, कीचड़ और जलभराव ने स्थानीय लोगों की परेशानी बढ़ा दी। हालात ऐसे हैं कि लोगों को रोजमर्रा के कार्यों के लिए घरों से निकलना भी कठिन हो गया है।
मोहल्ले के नालियों का गंदा पानी सड़क पर बह रहा है। लगातार सफाई न होने के कारण नालियां जाम हो गई हैं, जिससे पानी की निकासी बाधित हो रही है। सड़क पर जमा गंदे पानी और कीचड़ के कारण राहगीरों, बुजुर्गों और स्कूली बच्चों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। कई स्थानों पर फिसलन बढ़ जाने से दुर्घटना की आशंका भी बनी हुई है।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि कई दिनों से सफाई व्यवस्था पूरी तरह चरमराई हुई है। नालियों की नियमित सफाई नहीं होने के कारण गंदगी जमा हो रही है और दुर्गंध फैल रही है। गर्मी और उमस के मौसम में यह स्थिति और गंभीर हो गई है। मोहल्ले के लोगों को मच्छरों के बढ़ते प्रकोप का भी सामना करना पड़ रहा है, जिससे डेंगू, मलेरिया और अन्य संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। निवासियों ने बताया कि कई बार संबंधित अधिकारियों और नगर निगम से शिकायत की गई, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सका। सफाईकर्मी कभी-कभार आते हैं, लेकिन व्यापक सफाई अभियान नहीं चलाया जाता। परिणामस्वरूप मोहल्ले की सड़कों और गलियों में गंदगी का अंबार लगा हुआ है।
मोहल्ले के व्यापारियों का भी कहना है कि गंदगी और जलभराव के कारण ग्राहकों का आना-जाना प्रभावित हो रहा है। दुकानों के सामने जमा कीचड़ से व्यापार पर भी प्रतिकूल असर पड़ रहा है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि स्वच्छता अभियान केवल कागजों तक सीमित दिखाई देता है, जबकि जमीनी स्तर पर हालात चिंताजनक बने हुए हैं।
क्षेत्रवासियों ने नगर निगम प्रशासन से तत्काल विशेष सफाई अभियान चलाने, जाम नालियों की सफाई कराने और जलनिकासी व्यवस्था को दुरुस्त करने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि जल्द प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो बरसात के दिनों में स्थिति और भी भयावह हो सकती है। लोगों ने चेतावनी दी कि समस्या के समाधान में लापरवाही बरती गई तो वे सामूहिक रूप से प्रशासन के समक्ष विरोध दर्ज कराने को बाध्य होंगे। फिलहाल औरंगाबाद मोहल्ले के लोग गंदगी और कीचड़ के बीच जीवनयापन करने को मजबूर हैं और स्वच्छ वातावरण की आस लगाए हुए हैं।
