वाराणसी में सीएम योगी का बड़ा बयान: विदेशी श्रेष्ठता की धारणा पर साधा निशाना, गंगा के महत्व का भी किया उल्लेख

वाराणसी में सीएम योगी का बड़ा बयान: विदेशी श्रेष्ठता की धारणा पर साधा निशाना, गंगा के महत्व का भी किया उल्लेख

वाराणसी (रणभेरी): काशी हिंदू विश्वविद्यालय में शनिवार को विज्ञान भारती के 7वें राष्ट्रीय अधिवेशन का भव्य शुभारंभ हुआ। दो दिवसीय इस राष्ट्रीय आयोजन में देश-विदेश से आए वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं, शिक्षाविदों, नीति विशेषज्ञों और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। अधिवेशन का उद्घाटन उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। कार्यक्रम में करीब 1200 प्रतिनिधियों की उपस्थिति रही, जिन्होंने विज्ञान, तकनीक और भारतीय ज्ञान परंपरा से जुड़े विभिन्न विषयों पर चर्चा की।

उद्घाटन सत्र में विज्ञान भारती के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. शेखर माण्डे ने संगठन की भूमिका और अधिवेशन के उद्देश्यों पर विस्तार से प्रकाश डाला। वहीं अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने वैज्ञानिक दृष्टिकोण और राष्ट्र निर्माण में विज्ञान की भूमिका पर अपने विचार साझा किए।

वाराणसी में सीएम योगी का बड़ा बयान: विदेशी श्रेष्ठता की धारणा पर साधा निशाना, गंगा के महत्व का भी किया उल्लेख

परंपरा और आधुनिक विज्ञान का संगम बनेगा विकास का आधार

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में कहा कि भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा और आधुनिक विज्ञान का समन्वय देश को वैश्विक नेतृत्व प्रदान कर सकता है। उन्होंने कहा कि भारतीय सभ्यता सदियों से ज्ञान, शोध और नवाचार की धनी रही है, लेकिन लंबे समय तक ऐसी मानसिकता विकसित की गई कि विदेशी ज्ञान को ही श्रेष्ठ माना जाए।

उन्होंने कहा कि विभिन्न विदेशी शक्तियों, वामपंथी विचारधाराओं और भारत-विरोधी तत्वों ने भारतीय समाज में आत्मविश्वास को कमजोर करने का प्रयास किया। इसके बावजूद भारत ने अपनी सांस्कृतिक और बौद्धिक विरासत को जीवित रखा है और आज दुनिया पुनः भारतीय ज्ञान परंपरा की ओर आकर्षित हो रही है।

भारत की आर्थिक शक्ति का किया उल्लेख

मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐतिहासिक दृष्टि से भारत विश्व अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण केंद्र रहा है। उन्होंने बताया कि प्राचीन काल में वैश्विक अर्थव्यवस्था में भारत की हिस्सेदारी लगभग 40 प्रतिशत तक थी और कई शताब्दियों तक यह मजबूत स्थिति बनी रही। हालांकि स्वतंत्रता के बाद यह हिस्सा काफी घट गया था, लेकिन अब भारत तेजी से आर्थिक प्रगति की ओर बढ़ रहा है।

उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश सरकार ने पारंपरिक उद्योगों और स्थानीय उत्पादों को नई पहचान देने के लिए विशेष प्रयास किए हैं। उत्पादों की पैकेजिंग, डिज़ाइन, ब्रांडिंग और विपणन में सुधार के कारण स्थानीय कारीगरों और शिल्पकारों को नए अवसर प्राप्त हुए हैं।

वाराणसी में सीएम योगी का बड़ा बयान: विदेशी श्रेष्ठता की धारणा पर साधा निशाना, गंगा के महत्व का भी किया उल्लेख

निर्यात में कई गुना वृद्धि

योगी आदित्यनाथ ने कहा कि राज्य से होने वाला निर्यात लगातार बढ़ रहा है। उन्होंने बताया कि एक समय प्रदेश का निर्यात लगभग 80 हजार करोड़ रुपये के आसपास था, जो अब बढ़कर 2 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो चुका है। इस वृद्धि से लाखों लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिला है तथा भारतीय उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में नई पहचान मिली है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार की विभिन्न योजनाओं के माध्यम से पारंपरिक उद्योगों को प्रोत्साहन दिया गया है, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली है और युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा हुए हैं।

गंगा जल से जुड़ा बचपन का अनुभव किया साझा

अपने संबोधन के दौरान मुख्यमंत्री ने गंगा के महत्व पर भी चर्चा की। उन्होंने बचपन की एक घटना का उल्लेख करते हुए बताया कि उनकी माता उन्हें घर के आसपास छोटी-छोटी क्यारियों में पौधे लगाने और उनकी देखभाल करने के लिए प्रेरित करती थीं।

उन्होंने कहा कि जब किसी पौधे में बीमारी लग जाती थी या फूल नहीं खिलते थे, तब उनकी माता गंगाजल का छिड़काव करती थीं। कुछ दिनों बाद पौधों में सकारात्मक परिवर्तन दिखाई देता था और उनमें फिर से फूल खिलने लगते थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि इसी प्रकार के अनुभवों ने उन्हें गंगा के महत्व और भारतीय परंपराओं के प्रति आस्था का भाव सिखाया।

भारतीय ज्ञान परंपरा और विज्ञान के बीच बनेगा सेतु

काशी हिंदू विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर अजीत कुमार चतुर्वेदी ने कहा कि यह अधिवेशन भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक वैज्ञानिक शोध के बीच संवाद स्थापित करने का एक महत्वपूर्ण मंच है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि दो दिनों तक चलने वाले विचार-विमर्श से अनेक नए शोध विषयों और नवाचारों को दिशा मिलेगी।

कुलपति ने कहा कि भारत के पास वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ-साथ हजारों वर्षों की ज्ञान-संपदा मौजूद है। यदि दोनों का समन्वय किया जाए तो देश विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को प्राप्त कर सकता है।

देश-विदेश के विशेषज्ञ कर रहे सहभागिता

13 और 14 जून तक चलने वाले इस राष्ट्रीय अधिवेशन में भारत सहित विभिन्न देशों के विशेषज्ञ शामिल हुए हैं। कार्यक्रम में वैज्ञानिक, शोधकर्ता, शिक्षाविद, नीति निर्माता, उद्योग जगत से जुड़े प्रतिनिधि तथा विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञ विज्ञान और समाज से जुड़े मुद्दों पर विचार-विमर्श कर रहे हैं।

अधिवेशन के दौरान विज्ञान, नवाचार, शिक्षा, पर्यावरण, तकनीक और भारतीय ज्ञान परंपरा जैसे विषयों पर विशेष सत्र आयोजित किए जा रहे हैं। आयोजकों का मानना है कि इस मंच से निकलने वाले सुझाव भविष्य में वैज्ञानिक अनुसंधान और राष्ट्रीय विकास की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के शिक्षक, शोधार्थी, विद्यार्थी तथा विज्ञान और शिक्षा जगत से जुड़े अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

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