(रणभेरी): पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (Trinamool Congress) के नेताओं के खिलाफ भ्रष्टाचार, अवैध वसूली और जमीन कब्जाने जैसे आरोपों को लेकर चल रही कार्रवाई एक बार फिर सुर्खियों में है। गुरुवार को दुर्गापुर में एक स्थानीय TMC नेता सुकुमार दत्ता की गिरफ्तारी के बाद हालात तनावपूर्ण हो गए। पुलिस जब उन्हें अदालत ले जा रही थी, उसी दौरान भीड़ ने विरोध प्रदर्शन करते हुए उन पर अंडे फेंके और जमकर नारेबाजी की।
स्थानीय लोगों और कुछ राजनीतिक कार्यकर्ताओं के प्रदर्शन के बीच माहौल काफी देर तक गरम रहा। आरोप है कि दत्ता पर जमीन कब्जाने, रंगदारी वसूलने और इलाके में लोगों को डराने-धमकाने जैसे गंभीर मामले दर्ज हैं। घटना के बाद भारतीय जनता पार्टी (Bharatiya Janata Party) के नेताओं ने इसे जनता का गुस्सा बताया और कहा कि वर्षों से कथित उत्पीड़न के कारण लोग आक्रोशित थे।
इसी क्रम में पश्चिम बंगाल के फलता क्षेत्र में एक अन्य TMC नेता जहांगीर खान की गिरफ्तारी और पुलिस कार्रवाई चर्चा में रही। स्पेशल टास्क फोर्स ने उन्हें नेपाल सीमा के पास से 8 जून को गिरफ्तार किया था। उन पर अवैध वसूली से जुड़े कई मामले दर्ज हैं, जिनमें कुल 7 FIR शामिल बताई जा रही हैं। पुलिस उन्हें पूछताछ के लिए कोलकाता लेकर गई।

सूत्रों के अनुसार, जहांगीर खान 2026 विधानसभा चुनाव के दौरान फालता सीट से उम्मीदवार रहे थे, लेकिन विवादों और पुनर्मतदान के बाद चुनाव परिणाम उनके खिलाफ गया। इसके बाद वे लंबे समय तक सार्वजनिक रूप से नजर नहीं आए। पुलिस जांच के दौरान उनके नेपाल भागने की कोशिश की आशंका भी जताई जा रही है, हालांकि आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
इसी तरह कोलकाता में एक अन्य TMC पार्षद बप्पादित्य दासगुप्ता को अदालत ले जाते समय उनकी गाड़ी पर भीड़ ने अंडे फेंके थे। सोशल मीडिया पर कुछ वीडियो भी तेजी से वायरल हो रहे हैं, जिनमें नेताओं को भीड़ से बचने की कोशिश करते हुए और विरोध का सामना करते हुए दिखाया गया है।
एक अन्य घटना में हावड़ा जिले का वीडियो सामने आया है, जिसमें एक स्थानीय नेता पर कथित रूप से “कट मनी” लेने के आरोप के बाद लोगों ने उसका सिर मुंडवाकर और जूते-चप्पलों की माला पहनाकर सार्वजनिक रूप से प्रदर्शन किया।

कूचबिहार से भी एक अलग मामला सामने आया है, जहां एक TMC नेता शाहिदुल मियां को ग्रामीणों के विरोध का सामना करना पड़ा। आरोप है कि सरकारी आवास योजना के नाम पर लोगों से अवैध वसूली की गई। विरोध बढ़ने पर वह अपने घर में बिस्तर के नीचे छिपे मिले, जिसके बाद पुलिस ने उन्हें बाहर निकालकर हिरासत में लिया।
इन घटनाओं ने राज्य की राजनीति को एक बार फिर गर्मा दिया है। विपक्ष का आरोप है कि सत्ताधारी दल के भीतर भ्रष्टाचार और दबंगई के मामलों पर जनता का आक्रोश लगातार बढ़ रहा है, जबकि TMC की ओर से कई मामलों में जांच को ही राजनीतिक साजिश बताया जा रहा है।
