पत्नी की हत्या कर आंगन में दफनाने वाले पति को उम्रकैद, संपत्ति विवाद बना हत्या की वजह

पत्नी की हत्या कर आंगन में दफनाने वाले पति को उम्रकैद, संपत्ति विवाद बना हत्या की वजह

वाराणसी (रणभेरी): वाराणसी लोहता थाना क्षेत्र के भिटारी गांव में पत्नी की हत्या कर उसके शव को घर के आंगन में दफनाने के चर्चित मामले में अदालत ने आरोपी पति को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। न्यायालय ने अपराध की गंभीरता को देखते हुए इसे जघन्य श्रेणी का अपराध माना और मुख्य सजा के अतिरिक्त साक्ष्य छिपाने के आरोप में तीन वर्ष की अतिरिक्त कैद तथा कुल 70 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया।

करीब पांच वर्ष पांच माह पुराने इस मामले में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने 9 जून 2026 को फैसला सुनाते हुए आरोपी राजेंद्र प्रसाद को दोषसिद्ध पाया। अदालत में प्रस्तुत साक्ष्यों और गवाहों के बयानों के आधार पर यह साबित हुआ कि आरोपी ने संपत्ति को लेकर हुए विवाद के चलते अपनी पत्नी आशा देवी की निर्मम हत्या कर दी थी।

ऐसे सामने आया था हत्या का राज

अभियोजन पक्ष के अनुसार 28 दिसंबर 2020 की सुबह घटना के समय परिवार के दोनों बेटे घर से बाहर काम पर गए हुए थे। दोपहर में छोटा बेटा अमर जब वापस लौटा तो उसने अपनी मां के बारे में पिता से पूछा। इस पर राजेंद्र ने बताया कि आशा देवी किसी सोनार की दुकान पर गई हैं और जल्द लौट आएंगी।

शाम के समय बड़ा बेटा रामविलास भी घर पहुंचा और मां के बारे में जानकारी ली, लेकिन उसे भी वही जवाब मिला। इसी दौरान दोनों भाइयों को पिता का व्यवहार संदिग्ध लगा। उन्होंने देखा कि वह घर के आंगन में एक स्थान की मिट्टी समतल कर रहा था। पूछने पर उसने बताया कि धूप सेंकने के लिए जगह तैयार कर रहा है।

कमरे में मिले खून के निशानों से बढ़ा शक

रामविलास ने अदालत को बताया कि कुछ देर बाद जब वह घर के कमरे में गया तो वहां फर्श और दीवारों पर खून के छींटे दिखाई दिए। यह देखकर दोनों भाइयों का संदेह और गहरा गया। इसके बाद उन्होंने आंगन में उस स्थान की खुदाई शुरू की जहां मिट्टी हाल ही में डाली गई प्रतीत हो रही थी।

करीब चार फीट गहराई तक खुदाई करने पर उन्हें अपनी मां का शव मिला। शव खून से सना हुआ था और उसे मिट्टी के नीचे दबाने के बाद ऊपर से नमक भी डाला गया था। यह दृश्य देखकर परिवार के लोगों में हड़कंप मच गया।

शव मिलने के बाद फरार हुआ आरोपी

मामले का खुलासा होते ही आरोपी राजेंद्र प्रसाद मौके से भाग निकला। सूचना मिलने पर पुलिस पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। मृतका के बड़े बेटे रामविलास की तहरीर पर पुलिस ने आरोपी के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज किया।

घटना के बाद पुलिस ने आरोपी की तलाश शुरू की और तीन दिन बाद उसे गिरफ्तार कर लिया। जांच के दौरान पुलिस ने हत्या से जुड़े कई महत्वपूर्ण साक्ष्य जुटाए, जिन्हें बाद में अदालत में प्रस्तुत किया गया।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सामने आई क्रूरता

पोस्टमार्टम रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि आशा देवी के सिर और चेहरे पर गंभीर चोटों के कई निशान थे। चिकित्सकीय जांच में कुल 12 गहरी चोटें दर्ज की गईं, जो किसी लकड़ी के टुकड़े और धारदार हथियार से पहुंचाई गई थीं। रिपोर्ट से स्पष्ट हुआ कि मृतका पर बेहद बेरहमी से हमला किया गया था।

संपत्ति अपने नाम कराने का बना दबाव

पुलिस जांच और गवाहों के बयानों के अनुसार आरोपी अपनी पत्नी पर लगातार संपत्ति अपने नाम कराने का दबाव बना रहा था। आशा देवी इसके लिए तैयार नहीं थीं। इसी बात को लेकर दोनों के बीच विवाद बढ़ता गया और अंततः आरोपी ने हत्या जैसी वारदात को अंजाम दे दिया।

बताया गया कि घटना के बाद आरोपी ने अपने बेटों के सामने भी संपत्ति विवाद को लेकर पत्नी से हुए झगड़े का जिक्र किया था। जांच के दौरान यही तथ्य अभियोजन पक्ष के लिए महत्वपूर्ण साक्ष्य साबित हुआ।

अदालत ने सुनाया कठोर फैसला

मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और गवाहों के बयानों का परीक्षण किया। सभी तथ्यों को देखते हुए न्यायालय ने आरोपी को हत्या का दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। इसके साथ ही शव को छिपाने और अपराध के साक्ष्य मिटाने के प्रयास के लिए तीन वर्ष की अतिरिक्त कैद तथा 50 हजार और 20 हजार रुपये के अलग-अलग जुर्माने का आदेश भी दिया।

अदालत के इस फैसले को पीड़ित पक्ष के लिए न्याय की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। लगभग साढ़े पांच वर्ष तक चले इस चर्चित मामले का अंत आरोपी की दोषसिद्धि और कठोर सजा के साथ हुआ।

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