तेज आंधी और बारिश के बीच हुआ हादसा, कई घंटे चला राहत एवं बचाव कार्य
(रणभेरी): उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जनपद में बेतवा नदी पर बन रहे निर्माणाधीन पुल पर शुक्रवार देर रात बड़ा हादसा हो गया। तेज आंधी और बारिश के दौरान पुल का एक स्लैब अचानक भरभराकर गिर पड़ा, जिससे उसके नीचे मौजूद मजदूर मलबे में दब गए। इस दुर्घटना में 6 मजदूरों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य घायल हो गए। हादसे के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई।

घटना की सूचना मिलते ही प्रशासन और राहत दल मौके पर पहुंच गए। स्टेट डिजास्टर रिस्पॉन्स फोर्स (SDRF) ने रातभर रेस्क्यू ऑपरेशन चलाकर मलबे में फंसे मजदूरों को बाहर निकाला। करीब साढ़े सात घंटे तक चले अभियान के बाद राहत कार्य पूरा किया गया।
आंधी-बारिश के बीच टूटा पुल का स्लैब
जानकारी के अनुसार, हादसा ललपुरा क्षेत्र में हुआ, जो जिला मुख्यालय से लगभग 25 किलोमीटर दूर स्थित है। मौसम विभाग ने बताया कि शुक्रवार देर रात इलाके में 70 से 80 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज आंधी चली थी। इसके साथ भारी बारिश भी हुई। माना जा रहा है कि इसी खराब मौसम के कारण निर्माणाधीन पुल का स्लैब कमजोर होकर गिर गया।
उत्तर प्रदेश ब्रिज कॉरपोरेशन के प्रबंध निदेशक धर्मवीर सिंह ने बताया कि हादसे के समय कुछ मजदूर पुल के नीचे आराम कर रहे थे। अचानक स्लैब गिरने से वे उसकी चपेट में आ गए। घटना के बाद विभाग ने तत्काल कार्रवाई करते हुए सहायक अभियंता गजेंद्र कुमार चौधरी को निलंबित कर दिया है। साथ ही डीपीएम दिलीप कुमार के खिलाफ विभागीय जांच शुरू कर दी गई है।
दो शिफ्टों में चल रहा था काम
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक पुल निर्माण का काम दिन-रात दो शिफ्टों में किया जा रहा था। हादसे के समय पहली शिफ्ट के मजदूर पुल के नीचे मौजूद थे, जबकि दूसरी शिफ्ट के कुछ कर्मचारी पुल पर कार्य कर रहे थे। तेज आंधी शुरू होते ही मजदूरों ने खुद को बचाने के लिए पुल पर ही लेटना उचित समझा, लेकिन कुछ ही पलों बाद स्लैब टूटकर नीचे गिर गया।

मौके पर मौजूद मजदूर सुरेश कुमार ने बताया कि आंधी बहुत तेज थी और सभी लोग जान बचाने की कोशिश कर रहे थे। तभी जोरदार आवाज हुई और पुल का हिस्सा नीचे आ गिरा। देखते ही देखते चारों ओर धूल और मलबा फैल गया।
मृतकों में बांदा और हमीरपुर के मजदूर शामिल
प्रशासन द्वारा जारी जानकारी के अनुसार, हादसे में जान गंवाने वाले मजदूरों में चार बांदा जिले और दो हमीरपुर के निवासी थे। सभी मृतकों के शव पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिए गए हैं। प्रशासन ने मृतकों के परिजनों को हरसंभव सहायता देने का भरोसा दिलाया है।
90 करोड़ की लागत से बन रहा था पुल
बताया जा रहा है कि बेतवा नदी पर बनाया जा रहा यह पुल मोराकांड और कुरारा गांव को जोड़ने के लिए तैयार किया जा रहा था। लगभग 700 मीटर लंबे इस दो लेन पुल का निर्माण उत्तर प्रदेश राज्य सेतु निगम की देखरेख में हो रहा था। परियोजना की अनुमानित लागत करीब 90 करोड़ रुपए बताई जा रही है।

पुल निर्माण का कार्य मार्च 2024 में शुरू हुआ था और इसे दिसंबर 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था। हादसे के बाद निर्माण कार्य की गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों को लेकर सवाल खड़े होने लगे हैं।
प्रशासन ने जांच के दिए आदेश
हादसे के बाद जिला प्रशासन और निर्माण एजेंसी की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि दुर्घटना के कारणों की विस्तृत जांच कराई जाएगी। साथ ही यह भी देखा जाएगा कि निर्माण कार्य के दौरान सुरक्षा मानकों का पालन किया गया था या नहीं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि मजदूरों की सुरक्षा के लिए उचित इंतजाम किए गए होते तो इतनी बड़ी जनहानि टाली जा सकती थी।
