बीएचयू कार्यकारिणी परिषद की बैठक सात माह बाद शुरू, 42 बिंदुओं पर मंथन

बीएचयू कार्यकारिणी परिषद की बैठक सात माह बाद शुरू, 42 बिंदुओं पर मंथन

वाराणसी (रणभेरी): काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (बीएचयू) की कार्यकारिणी परिषद (ईसी) की दूसरी बैठक करीब सात महीने के अंतराल के बाद बुधवार को शुरू हो गई। होल्कर हाउस में सुबह 11 बजे से शुरू हुई इस बैठक में कुल 42 बिंदुओं पर विस्तार से चर्चा की जा रही है। विश्वविद्यालय प्रशासन से जुड़े कई अहम फैसलों और विवादित मामलों पर इस बैठक में गहन मंथन होने की संभावना जताई जा रही है।

सूत्रों के अनुसार, बैठक में शिक्षकों की प्रोन्नति में कथित अनियमितताओं, संविदा कर्मचारियों और शिक्षकों के विरोध-प्रदर्शन, तथा सर सुंदरलाल अस्पताल में नियुक्तियों से जुड़े मामलों को प्रमुखता से रखा गया है। पूर्व कुलपति प्रो. सुधीर जैन के कार्यकाल में हुई नियुक्तियों और पदोन्नतियों पर उठे सवालों को लेकर समय-समय पर विभिन्न शिक्षक समूहों द्वारा दर्ज की गई आपत्तियों और उन पर गठित जांच समितियों की रिपोर्ट भी एजेंडे में शामिल है, जिन पर जनप्रतिनिधियों की विशेष नजर रहने की उम्मीद है।

बीएचयू कार्यकारिणी परिषद की बैठक सात माह बाद शुरू, 42 बिंदुओं पर मंथन

इसके अलावा विश्वविद्यालय से जुड़े कुछ अन्य विवादित मामलों पर भी चर्चा हो सकती है। इनमें पीएमओ के हस्तक्षेप के बाद सुर्खियों में आया मालवीय मूल्य अनुशीलन केंद्र से जुड़ा मामला, वैदिक विज्ञान केंद्र में विज्ञापन और अनुमोदन के बावजूद शिक्षकों की नियुक्ति न हो पाने का मुद्दा, तथा छात्र कल्याण संकाय प्रमुख और मुख्य प्रॉक्टर से जुड़े विवाद प्रमुख रूप से शामिल बताए जा रहे हैं।

इसी बीच, छात्रों ने कार्यकारी परिषद के सदस्य और पूर्व केंद्रीय मंत्री महेंद्रनाथ पांडेय को एक ज्ञापन सौंपकर ट्रॉमा सेंटर के प्रभारी डॉ. सौरभ सिंह को पद से हटाने की मांग उठाई है। छात्रों का आरोप है कि ट्रॉमा सेंटर में लंबे समय से अनियमितताओं और कथित भ्रष्टाचार से जुड़े मामले सामने आ रहे हैं, जिससे न केवल संस्थान की कार्यप्रणाली प्रभावित हो रही है बल्कि विश्वविद्यालय की प्रतिष्ठा पर भी असर पड़ रहा है। उन्होंने मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कराते हुए संबंधित अधिकारी को तत्काल प्रभाव से हटाया जाए ताकि जांच प्रक्रिया निष्पक्ष ढंग से आगे बढ़ सके।

बैठक में कुछ अन्य प्रशासनिक और नीतिगत मुद्दों पर भी चर्चा प्रस्तावित है। जानकारी के अनुसार, एक पूर्व रजिस्ट्रार द्वारा अपने पदकाल के दौरान स्वयं को पुरानी पेंशन योजना में शामिल किए जाने का मामला भी शिक्षकों के एक समूह द्वारा उठाया गया है, जिसे हाल के दिनों में कार्यकारिणी सदस्यों के समक्ष रखा गया था। इस पर भी बैठक में विचार संभव है।

इसके अलावा, पिछले कई महीनों में हुई नियुक्तियों का अनुमोदन, छात्रावासों में सुविधाओं के विस्तार, कैडर आधारित पदोन्नति, तथा परिसर की सुरक्षा व्यवस्था जैसे विषय भी एजेंडे में शामिल हैं। कुलसचिव और परीक्षा नियंत्रक सहित विभिन्न प्रशासनिक पदों पर की गई नियुक्तियों को भी परिषद की मंजूरी के लिए प्रस्तुत किया जाएगा। साथ ही अकादमिक परिषद के निर्णयों का ब्योरा और राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप नए पाठ्यक्रमों के प्रस्तावों पर भी चर्चा हो सकती है।

संसाधन और शैक्षणिक ढांचे के विस्तार से जुड़े प्रस्ताव, शिक्षकों की आवश्यकताओं के अनुरूप सुविधाओं और आधारभूत संरचना को मजबूत करने जैसे मुद्दे भी बैठक का हिस्सा हैं।

बैठक की अध्यक्षता कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी कर रहे हैं। इसमें महापौर अशोक तिवारी, भाजपा काशी क्षेत्र अध्यक्ष दिलीप पटेल, पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. महेंद्रनाथ पांडेय सहित विभिन्न जनप्रतिनिधि और शैक्षणिक प्रतिनिधि शामिल हैं। इनमें दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. योगेश सिंह, बीएचयू समाजशास्त्र विभाग के प्रो. ओमप्रकाश भारतीय, प्रो. श्वेता प्रसाद, प्रो. बेचैन लाल तथा रेडियोथेरेपी विभाग के प्रो. उदय कुमार शाही प्रमुख रूप से उपस्थित हैं। पूरा मामला प्रशासनिक निर्णयों, नियुक्तियों और विश्वविद्यालय में चल रहे विवादों के बीच अहम बैठकों में से एक माना जा रहा है, जिस पर सभी पक्षों की नजरें टिकी हुई हैं।

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