मोतीलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज में कथित रैगिंग का वीडियो वायरल, प्रशासन ने आरोपों से किया इनकार

मोतीलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज में कथित रैगिंग का वीडियो वायरल, प्रशासन ने आरोपों से किया इनकार

(रणभेरी): मोतीलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज से जुड़ा एक कथित रैगिंग वीडियो गुरुवार को सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ। लगभग 58 सेकंड के इस वीडियो में जूनियर महिला डॉक्टरों के साथ कथित दुर्व्यवहार और मानसिक उत्पीड़न के आरोप लगाए जा रहे हैं। हालांकि कॉलेज प्रशासन ने इन दावों को निराधार बताया है। वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।

वायरल क्लिप में कुछ छात्राएं दिखाई देती हैं, जिनमें दो सीनियर छात्राओं के साथ कई जूनियर छात्राएं खड़ी नजर आती हैं। वीडियो रिकॉर्ड करने वाली छात्रा कैमरे के पीछे रहती है, लेकिन उसकी आवाज सुनाई देती है। वह दावा करती है कि उसके साथ मारपीट हुई है और इसी कारण उसने यह वीडियो सबूत के तौर पर रिकॉर्ड किया।

वीडियो में कुछ छात्राएं मोबाइल फोन से रिकॉर्डिंग करती भी दिखाई देती हैं, जबकि अन्य छात्राएं सिर झुकाकर खड़ी नजर आती हैं। सोशल मीडिया पर वायरल दावों के अनुसार जूनियर महिला डॉक्टरों को कथित तौर पर लगातार प्रताड़ित किया जा रहा था। आरोप यह भी लगाए गए कि रात के समय उनके मोबाइल फोन ले लिए जाते थे ताकि वे किसी से संपर्क या शिकायत न कर सकें।

कुछ पोस्ट्स में यह भी कहा गया कि विरोध करने पर छात्राओं को धमकाया जाता था और एक जूनियर छात्रा के साथ मारपीट की घटना भी हुई। दावा है कि इसी के बाद कथित पीड़िता ने छिपकर वीडियो रिकॉर्ड किया। वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर कॉलेज प्रशासन और एंटी-रैगिंग व्यवस्था को लेकर सवाल उठने लगे।

कॉलेज के प्राचार्य डॉ. वीके पांडेय ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि उन्हें किसी प्रकार की रैगिंग की आधिकारिक शिकायत नहीं मिली है। उनके अनुसार प्रथम वर्ष की परीक्षाएं तीन मई को समाप्त हो चुकी हैं और वीडियो में सीनियर छात्राएं केवल जूनियर्स को फाइल तैयार करने संबंधी निर्देश देती दिखाई दे रही हैं। उन्होंने मामले की रिपोर्ट वार्डन से तलब करने की बात कही है।

गौरतलब है कि इससे पहले भी कॉलेज में रैगिंग के आरोप सामने आ चुके हैं। वर्ष 2024 में हॉस्टल में कथित अभद्रता और रैगिंग के मामले में चार छात्रों पर कार्रवाई की गई थी। वहीं 2018 में भी नए छात्रों के साथ दुर्व्यवहार, सिर मुंडवाने और मारपीट जैसे आरोपों के बाद जांच कराई गई थी।

भारत में रैगिंग को कानूनन अपराध माना जाता है। उच्च शिक्षण संस्थानों, विशेषकर मेडिकल कॉलेजों में एंटी-रैगिंग कमेटी, हेल्पलाइन और शिकायत प्रणाली अनिवार्य रूप से संचालित की जाती है।

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