वाराणसी (रणभेरी): शहर में रविवार को शिया मुस्लिम समुदाय द्वारा जन्नतुल बकी के विध्वंस के विरोध में एक विशाल जुलूस निकाला गया। यह जुलूस कालीमहाल स्थित शिया मस्जिद से प्रारंभ होकर दारानगर की शिया जामा मस्जिद तक पहुंचा। पूरे मार्ग में प्रदर्शनकारियों ने सऊदी सरकार के खिलाफ नाराजगी जताते हुए नारेबाजी की।
जुलूस का आयोजन अंजुमन हैदरी के तत्वावधान में किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों ने भागीदारी की। प्रतिभागियों के हाथों में विरोध दर्ज कराती तख्तियां थीं, जबकि सबसे आगे चल रहे धर्मगुरु भी प्रदर्शन का नेतृत्व करते नजर आए।

कार्यक्रम के संयोजन में अंजुमन हैदरी के पदाधिकारियों की अहम भूमिका रही। आयोजन से पहले कालीमहाल स्थित मस्जिद में मजलिस का आयोजन हुआ, जहां शायरों ने अपने कलाम पेश किए। इस दौरान वक्ताओं ने जन्नतुल बकी से जुड़े ऐतिहासिक घटनाक्रम पर प्रकाश डालते हुए इसे अन्यायपूर्ण बताया और विरोध जारी रखने की बात कही।
वक्ताओं ने कहा कि लगभग एक सदी पूर्व मदीना स्थित जन्नतुल बकी में कई महत्वपूर्ण धार्मिक हस्तियों के रौजों को ध्वस्त कर दिया गया था, जिससे विश्वभर में आस्था रखने वालों के बीच रोष व्याप्त हुआ। इसी घटना की याद में वाराणसी में लंबे समय से यह विरोध जुलूस निकाला जा रहा है।

जुलूस कालीमहाल से निकलकर शहर के विभिन्न इलाकों शेख सलीम फाटक, नई सड़क, दालमंडी, चौक, नीचीबाग, बुलानाला और मैदागिन से गुजरते हुए दारानगर पहुंचा। इस दौरान सऊदी सरकार के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय मुद्दों को लेकर भी नारे लगाए गए। आयोजकों ने बताया कि हर वर्ष इस अवसर पर संबंधित मांगों को लेकर ज्ञापन भी भेजा जाता है, जिसमें जन्नतुल बकी के पुनर्निर्माण की मांग दोहराई जाती है।
