- कई शोरुम में सुबह से शाम तक नहीं हो रही है बोहनी, बनारस में थोक 500 व फुटकर डेढ़ हजार हैं सराफा कारोबारी
- 15 हजार हैं सोने के गहने बनाने वाले कारीगर, एक हफ्ते बाद बाजार में दिखने लगेगा व्यापक असर
राधेश्याम कमल
वाराणसी (रणभेरी)। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की एक साल तक सोना न खरीदने की अपील का असर इतना पड़ा है कि अब बनारस के शोरुम में सन्नाटा छा गया है। हालात यह है कि कई शोरुम में सुबह से लेकर शाम तक बोहनी तक नहीं हो पा रही है। सराफा कारोबारी अपनी-अपनी दुकानें तो खोल रहे हैं लेकिन शाम होने के बाद वह खाली हाथ ही घर लौट रहे हैं। ज्वेलरी की दुकानों पर प्राय: हर जगह सन्नाटा छा गया है। सराफा की दुकानें तो खुल रही हैं लेकिन ग्राहक नदारत हैं। अब इसका सीधा असर सुनार कारीगरों पर पड़ने वाला है। एक हफ्ते बाद बाजार में इसका व्यापक असर दिखने लगेगा।
शादी-विवाह और पर्वोें पर यदि ग्राहक सोना खरीदने से बचते हैं तो ज्वेलरी मेकिंग का काम घटेगा और हजारों सुनार कारीगरों के समक्ष रोजी-रोटी का संकट उत्पन्न हो जायेगा। अगर यही हालात रहे तो सराफा व्यवसायियों को अपना कारोबार बंद करके कोई और धंधा पकड़ना पड़ेगा। एक तरफ महंगाई की मार से आम आदमी की जेब ढीली हो रही है। वहीं हर जरुरत की चीजों के दाम में वृद्धि होती जा रही है। अमूल दूध का रेट प्रति लीटर दो रुपये बढ़ा दिया गया।
इसी तरह मदर डेयरी का दाम भी प्रति लीटर दो रुपये बढ़ा दिया गया। 24 कैरेट सोना का नया रेट 1,68,000/ प्रति 10 ग्राम हो गया है। जबकि पुराना सोना का रेट 1,53,000/ रहा। इसी तरह 20 कैरेट सोना का नया रेट 1,39.000/ प्रति 10 ग्राम हो गया है। चांदी का 1 किलो का रेट 3,10,000/ प्रति 1 किलो है। सोने पर आयात शुल्क 6 प्रतिशत से बढ़ कर 15 प्रतिशत पहुंच गया है। 13 मई से पहले 6 प्रतिशत था अब शुल्क 15 प्रतिशत सरकार लेगी।
सुनार कारीगरों के समक्ष रोजी रोटी का संकट
एक सर्वेक्षण के मुताबिक बनारस के रेशम कटरा, गोविंदपुरा, ठठेरी बाजार, नारियल बाजार, छत्ता तले, सुड़िया, चौक में थोक के लगभग 500 सराफा कारोबारी होंगे। जबकि लगभग डेढ़ हजार रिटेल दुकानदार होंगे। सराफा के कारोबार में स्वर्णकार के अलावा, पंजाबी व अन्य वर्ग के लोग भी लगे हुए हैं। बनारस में सुनार कारीगर लगभग 10 हजार बाहरी होेंगे। जबकि पांच हजार स्थानीय कारीगर होंगे।
सोने के जेवरात बनाने वालों में लगभग 10 हजार बंगाली कारीगर भी हैं। इनमें गहने गलाने वाले तार खींचने वाले भी शामिल है। किशोर कुमार सेठ बताते हैं कि सोने के गहनों की खरीदारी न करने की अपील के बाद सबसे बड़ी समस्या कारीगरों के समक्ष आने वाली है। चार से पांच माह में इसका असर दिखने लगेगा। यहां पर लग्न के समय वैवाहिक मौके पर ही जेवरात बनाने का काम होता है।
इसमें मुख्य रूप से गर्मी या जाड़े में गहने तैयार किये जाते हैं। अभी तो फिलहाल कारीगर जो पिछला आर्डर ले रखा है वही का काम चल रहा है लेकिन चार- पांच माह बाद इसका व्यापक असर दिखने लगेगा। महिलाओं पर भी इसका व्यापक असर दिखाई देगा। जानकारों की मानें तो सराफा कारोबार पर इसका 25 से 40 प्रतिशत तक असर पड़ेगा। लगन का सीजन होने पर ग्राहक सोने के जेवरात से दूरी बना रहे हैं। सराफा कारोबारियों का मानना है कि सरकार को आर्थिक गतिविधियों को प्रोत्साहित करना चाहिए न कि व्यापार को प्रभावित करने वाले संदेश को देना चाहिए। कारीगरों और छोटे व्यवासियों के हितों को ध्यान में रखते हुए वैकल्पिक व्यवस्था की जानी चाहिए।
