मुख्य प्रवेश द्वार से गिर रहे पत्थर, श्रद्धालुओं में दहशत
सूचना के बाद भी प्रशासन बेखबर, स्थानीय लोगों ने की बैरिकेडिंग
वाराणसी (रणभेरी): काशी की आध्यात्मिक विरासत से जुड़ा बैजनाथ मंदिर इन दिनों गंभीर खतरे के साए में है। मंदिर का मुख्य प्रवेश द्वार इतना जर्जर हो चुका है कि किसी भी समय बड़ा हादसा हो सकता है। द्वार के ऊपरी हिस्से में लगी भारी पत्थर की पट्टियां ढीली पड़ चुकी हैं और कई टुकड़े टूटकर नीचे गिर चुके हैं, जिससे दर्शनार्थियों में भय का माहौल है। मंदिर की संरचना लगातार कमजोर होती जा रही है। ऊपरी हिस्से से पत्थरों के खिसकने का सिलसिला जारी है, जो किसी भी वक्त जानलेवा साबित हो सकता है। हालात की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय नागरिकों ने खुद पहल करते हुए मंदिर के मुख्य द्वार के पास बैरिकेडिंग कर दी है, ताकि श्रद्धालु उस हिस्से के नीचे से न गुजरें और किसी अनहोनी से बचा जा सके।

स्थानीय लोगों और पुजारियों का कहना है कि इस खतरे की सूचना करीब एक सप्ताह पहले ही नगर निगम और संबंधित विभागों को लिखित रूप में दी जा चुकी है। इसके बावजूद अब तक प्रशासन की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। मरम्मत कार्य शुरू न होने से लोगों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। क्षेत्रीय नागरिकों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि समय रहते मंदिर के इस ऐतिहासिक प्रवेश द्वार का जीर्णोद्धार नहीं कराया गया और कोई हादसा होता है, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।
फिलहाल श्रद्धालुओं की सुरक्षा स्थानीय लोगों द्वारा किए गए अस्थायी इंतजामों पर ही निर्भर है। आस्था के इस प्रमुख केंद्र की उपेक्षा न केवल श्रद्धालुओं की सुरक्षा पर सवाल खड़ा करती है, बल्कि काशी की सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण को लेकर भी प्रशासन की गंभीरता पर प्रश्नचिह्न लगाती है। अब देखना होगा कि चेतावनी के बाद प्रशासन कब सक्रिय होता है और इस संभावित खतरे को टालने के लिए क्या कदम उठाता है।
