“अगर हमें कुछ हुआ तो जिम्मेदार होंगे पुलिस और बाबा…!

"अगर हमें कुछ हुआ तो जिम्मेदार होंगे पुलिस और बाबा…!

(न्याय की गुहार या डर का साया?)

*वाराणसी में मुकदमा वापस लेने के लिए धमकी का आरोप, छात्रा बोली – “परिवार की जान खतरे में”
पूछ रही है कानून की दहलीज पर खड़ी एक बेटी “क्या मैं इस देश की नागरिक भी हूं?”छात्रा की दर्द भरी पुकार – धमकियों के बीच पुलिस से न्याय की उम्मीद

मामला एक नजर में
▪ पीड़िता : कल्पना सिंह, छात्रा (बदला हुआ नाम)
▪ मूल मामला: थाना शिवपुर में दर्ज FIR No. 383/2024
▪ धाराएं: IPC 458, 506, 323
▪ विवेचना: थाना बड़ागांव में प्रचलित

आरोप क्या हैं?
▪ मुकदमा वापस लेने के लिए लगातार धमकी
▪ फोन कॉल के जरिए दबाव और अभद्र भाषा
▪ परिवार की रेकी कराने का आरोप

महत्वपूर्ण तारीखें
▪ 11 फरवरी 2026 – कचहरी में पिता को धमकी
▪ 25 फरवरी 2026 – किराए के मकान तक पहुंचने का आरोप
▪ 26 फरवरी 2026 – बाबा संजय कुमार सिंह ने दीपक सिंह को न्यायालय में दिया धमकी
▪ 13 मार्च 2026 – मोबाइल नंबर से धमकी भरा कॉल

शिकायत किसे भेजी गई?
▪ प्रधानमंत्री
▪ केंद्रीय गृह मंत्री
▪ पुलिस आयुक्त वाराणसी
▪ मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश
▪ राज्य महिला आयोग
▪ DGP उत्तर प्रदेश
▪ DCP वरुणा जोन

पीड़िता की मांग
▪ नामजद आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी
▪ परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग

  • सवाल : क्या वाराणसी में एक छात्रा की आवाज सुनने वाला कोई है? जब एक बेटी पुलिस आयुक्त से लेकर मुख्यमंत्री तक गुहार लगाती है और लिखती है कि “यदि हमें कुछ हुआ तो जिम्मेदार कौन होगा?”  तब यह सिर्फ एक शिकायत नहीं रहती, बल्कि व्यवस्था के सामने खड़ा एक बड़ा सवाल बन जाती है। क्या कानून का डर सच में खत्म हो गया है कि मुकदमा दर्ज होने के बाद भी पीड़ित पक्ष को ही धमकियों का सामना करना पड़े? क्या प्रशासन तब जागेगा जब कोई अनहोनी हो जाएगी?क्या वाराणसी पुलिस इस छात्रा की सुरक्षा और न्याय की जिम्मेदारी लेगी, या फिर एक और फरियाद फाइलों में दबकर रह जाएगी?

वाराणसी में न्याय की पुकार: छात्रा ने लगाया गंभीर आरोप

“अगर हमें कुछ हुआ तो जिम्मेदार होंगे पुलिस और बाबा संजय कुमार सिंह” – पीड़ित छात्रा
वाराणसी (रणभेरी संवाददाता)। वाराणसी की एक छात्रा ने खुद और अपने परिवार की सुरक्षा को लेकर पुलिस प्रशासन के सामने गंभीर आरोपों के साथ न्याय की गुहार लगाई है। छात्रा कल्पना सिंह (बदला हुआ नाम) ने पुलिस आयुक्त वाराणसी को दिए अपने लिखित शिकायत पत्र में आरोप लगाया है कि FIR No. 383/2024 में नामजद अभियुक्तों द्वारा मुकदमा वापस लेने के लिए लगातार धमकियां दी जा रही हैं और उनके परिवार की रेकी कर दबाव बनाया जा रहा है। छात्रा का कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो उसके और उसके परिवार की जान को गंभीर खतरा है।

शिकायत के अनुसार मामला मूल रूप से थाना शिवपुर में दर्ज मुकदमा संख्या 383/2024 से जुड़ा है, जिसमें आईपीसी की धारा 458, 506 और 323 के तहत केस दर्ज हुआ था। इस प्रकरण की विवेचना फिलहाल थाना बड़ागांव में चल रही है। पीड़िता ने आरोप लगाया है कि मुख्य आरोपी बाबा संजय कुमार सिंह और उससे जुड़े लोग लगातार दबाव बनाकर मुकदमा वापस लेने के लिए धमका रहे हैं। बाबा संजय कुमार सिंह शिवपुर थाना क्षेत्र के मोहल्ला लक्ष्मणपुर का निवासी है जो मूल रूप से ग्राम कठवतिया, जौनपुर का निवासी बताया जाता है।

हॉस्टल से निकलते ही शुरू हुई धमकियां

कल्पना सिंह के अनुसार जब वह पढ़ाई खत्म कर हॉस्टल से अपने पिता के पास रहने आई, तब आरोपियों ने उसकी लोकेशन पता लगाने के लिए रेकी करानी शुरू कर दी। आरोप है कि 13 मार्च 2026 को मोबाइल नंबर 8279567597 से उसे फोन कर अश्लील भाषा का इस्तेमाल करते हुए मुकदमा वापस लेने का दबाव बनाया गया। फोन पर कथित तौर पर धमकी दी गई कि यदि मुकदमा वापस नहीं लिया गया तो उसे और उसके पिता को गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।
पीड़िता का दावा है कि पुलिस से पूछताछ में बताया गया कि यह नंबर पूजा सिंह नामक महिला का है, जो कथित तौर पर आरोपी बाबा संजय कुमार सिंह की रिश्तेदार बताई जा रही है।

पहले भी कई बार दी जा चुकी हैं धमकियां

शिकायत पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि 11 फरवरी 2026 को कचहरी परिसर में भी पीड़िता के पिता को धमकाया गया था। इसके अलावा 25 फरवरी 2026 को आरोपियों द्वारा उनके किराए के मकान तक पहुंचकर धमकी देने का आरोप लगाया गया है।
कल्पना का कहना है कि पुलिस को पहले भी कई बार लिखित शिकायतें दी गईं, लेकिन आरोपियों के खिलाफ ठोस कार्रवाई नहीं हुई। पीड़िता का आरोप है कि मुख्य आरोपी को पहले भी बीमारी का हवाला देकर थाने से छोड़ दिया गया, जबकि आज तक उसके अस्पताल में भर्ती होने का कोई प्रमाण सामने नहीं आया।

अपने शिकायत पत्र में कल्पना लिखती है कि “मै दिनांक 08 मार्च 2023 से स्वयं पर प्रताड़ना के सम्बन्ध में सक्षम अधिकारियों को अवगत करा रही हूं किंतु पहले मेरे पापा की अनुपस्थिति में मेरे घर पर आकर पुलिस ने जबरदस्ती कुछ लिखवाकर साइन ले लिए, फिर मेरा एफआईआर नहीं लिखा गया, जब माननीय न्यायालय द्वारा एफआईआर दर्ज कराया गया तब शिवपुर पुलिस ने सही धाराएं नहीं लगाई, फिर जब सारनाथ थाना ने आजमानती सही धारा लगाकर बाबा संजय कुमार सिंह को गिरफ्तार किया, तब पता नहीं किसके दबाव में बीमारी का बहाना दिखाकर थाने से ही उनको छोड़ दिया गया। तभी से बाबा संजय कुमार सिंह और इनके ग्रुप उग्र होकर आतंक फैलाए हुए है, मुझे, मेरे पापा सहित मेरे परिवार को एफआईआर वापस लेने के लिए धमकी दे रहे है इसको और न्यायालय के आदेश के बावजूद शिवपुर पुलिस एफआईआर दर्ज नहीं कर रही थी, ( यह प्रकरण रणभेरी समाचार पत्र में प्रकाशित भी हुआ था)।
इस मामले में 08 अगस्त 2024 को हुए आदेश के बाद 4 सितंबर 2024 को न्यायालय एवं मीडिया के हस्तक्षेप पर FIR दर्ज किया गया।

“मुझे अब संविधान पर विश्वास नहीं रहा-दिल को झकझोर देने वाली पुकार*

इस पूरे घटनाक्रम में सबसे मार्मिक बात वह है जो पीड़िता ने अपने शिकायत पत्र में लिखी। कल्पना लिखती है कि “आज मुझे ऐसा लगने लगा है कि क्या मैं इस देश की नागरिक भी हूं या नहीं। मुझे अब संविधान पर विश्वास नहीं रहा, ऐसा प्रतीत होता है कि सब लोग मूकदर्शक बनकर हमारे परिवार के विनाश का इंतजार कर रहे हैं। मेरे पिता कई बार आत्महत्या का प्रयास कर चुके हैं। यदि मुझे, मेरे पिता या मेरे परिवार को कुछ भी होता है तो उसके जिम्मेदार वाराणसी पुलिस और बाबा संजय कुमार सिंह होंगे।” कल्पना यह भी कहती है कि “बाबा संजय कुमार सिंह मेरी मम्मी को अपने चंगुल में फंसाकर चाहे जो मर्जी हो वो करा रहा है, जैसे चाहे वैसे इस्तेमाल कर रहा है लेकिन आप सभी मूक दर्शक बनकर तमाशा देख रहे हैं, तो देखिए।” कल्पना की यह पीड़ा केवल एक शिकायत नहीं, बल्कि व्यवस्था से न्याय की आखिरी उम्मीद जैसी प्रतीत होती है।  

पुलिस आयुक्त से की कठोर कार्रवाई की मांग

कल्पना सिंह ने पुलिस आयुक्त से हाथ जोड़कर मांग की है कि FIR No. 383/2024 में नामजद आरोपी बाबा संजय कुमार सिंह और अन्य आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी की जाए, धमकी देने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए तथा इन अपराध में साथ देने वालों के खिलाफ भी कठोर कार्रवाई की जाए।  ताकि उसे और उसके परिवार को सुरक्षा मिल सके। इस शिकायत की प्रतिलिपि प्रधानमंत्री, केंद्रीय गृह मंत्री,मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश, राज्य महिला आयोग, डीजीपी उत्तर प्रदेश और डीसीपी वरुणा जोन को भी भेजी गई है।

कचहरी में दबंगों का ‘दरबार’?

FIR के बावजूद पीड़ित परिवार को खुलेआम धमकी, पुलिस पर सवाल

वाराणसी की कचहरी में कानून के साए में ही दबंगई का एक गंभीर मामला भी सामने आया है। पीड़ित छात्रा कल्पना सिंह के पिता दीपक कुमार सिंह (भूतपूर्व सैनिक) ने पुलिस अधिकारियों को भेजे पत्र में आरोप लगाया है कि पहले से दर्ज मुकदमे के बावजूद आरोपी पक्ष खुलेआम धमकी दे रहा है और पुलिस कार्रवाई नहीं कर रही। दीपक कुमार सिंह के अनुसार उनकी नाबालिग बेटी के उत्पीड़न से जुड़े मामले में थाना शिवपुर में मुकदमा संख्या 383/2024 दर्ज है, जिसमें कई लोगों को नामजद किया गया है।

पीड़ित पिता का आरोप है कि 26 फरवरी 2026 को वह किसी जरूरी कार्य से वाराणसी कचहरी गए थे। इसी दौरान कचहरी के गेट नंबर-3,  अपर जिला जज) एफटीसी) प्रथम कोर्ट के सामने आरोपी पक्ष के लोगों ने उन्हें घेर लिया।
पत्र के मुताबिक आरोपियों ने न सिर्फ मुकदमा वापस लेने का दबाव बनाया बल्कि धमकी दी कि यदि केस वापस नहीं लिया गया तो बेटी और परिवार की हत्या कर दी जाएगी।

इतना ही नहीं, आरोप है कि आरोपियों ने कथित तौर पर रुपये की मांग भी की और कहा कि पैसा नहीं देने पर रेप और महिला उत्पीड़न के मामलों में फंसा दिया जाएगा। पीड़ित ने अपने पत्र में यह भी लिखा है कि इस गिरोह के खिलाफ पहले से कई मुकदमे चल रहे हैं और पिछले कई दिनों से वह लगातार अधिकारियों को लिखित सूचना दे रहे हैं। इसके बावजूद आरोप है कि अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। पत्र में यह भी दावा किया गया है कि पूरी घटना के वीडियो और कचहरी के सीसीटीवी फुटेज से सच्चाई सामने आ सकती है। पीड़ित ने पुलिस अधिकारियों से आरोपियों के खिलाफ कड़ी धाराओं में मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई करने और परिवार को सुरक्षा देने की मांग की है।

कानून व्यवस्था पर सीधा प्रश्नचिह्न

कानून की सबसे बड़ी ताकत यह मानी जाती है कि अदालत और कचहरी के परिसर में व्यक्ति खुद को सुरक्षित महसूस करता है। लेकिन यदि वहीं किसी पीड़ित को घेरकर धमकी दी जाए और उसके बाद भी कार्रवाई न हो, तो यह केवल एक व्यक्ति का मामला नहीं रह जाता, यह कानून व्यवस्था पर सीधा प्रश्नचिह्न बन जाता है। यदि पीड़ित के आरोप सही हैं और सीसीटीवी फुटेज उपलब्ध है, तो पुलिस के लिए सच्चाई सामने लाना मुश्किल नहीं होना चाहिए। सवाल यह है कि क्या व्यवस्था पीड़ित के साथ खड़ी होगी या दबंगों का मनोबल इसी तरह बढ़ता रहेगा ?

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