वाराणसी (रणभेरी): शहर में साइबर अपराध का एक बड़ा मामला सामने आया है, जहां ठगों के एक संगठित गिरोह ने एक व्यापारी को करीब 50 लाख रुपये का चूना लगा दिया। रकम हड़पने के बाद आरोपी मोबाइल नंबर बंद कर फरार हो गए थे। पुलिस की साइबर क्राइम टीम ने कार्रवाई करते हुए तीन शातिर आरोपियों को धर दबोचा है।
फेसबुक पर फर्जी प्रोफाइल से जाल
पुलिस जांच में खुलासा हुआ कि यह गिरोह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Facebook पर नकली आईडी बनाकर क्रेडिट कार्ड बनवाने या उसकी लिमिट बढ़वाने का लालच देता था। विज्ञापन के जरिए लोगों को संपर्क करने के लिए उकसाया जाता था।
झांसे में आए लोगों से मोबाइल नंबर, पैन कार्ड और बैंकिंग जानकारी ली जाती थी। इसके बाद आरोपियों द्वारा एक फर्जी मोबाइल एप (APK फाइल) भेजी जाती थी, जो देखने में बैंक की आधिकारिक ऐप जैसी लगती थी।
वीडियो कॉल से हासिल करते थे गोपनीय जानकारी
आरोपी पीड़ितों को वीडियो कॉल कर उनके मौजूदा क्रेडिट कार्ड की जानकारी हासिल करते थे। ओटीपी प्राप्त कर ऑनलाइन ट्रांजेक्शन, वॉलेट ट्रांसफर और वर्चुअल कार्ड बनाकर रकम निकाल लेते थे।जांच में सामने आया कि ठग बार-बार मोबाइल फोन और सिम कार्ड बदलते थे। अवैध रकम को अलग-अलग डिजिटल वॉलेट और ‘रेंट पे’ सुविधा के जरिए बैंक खातों में ट्रांसफर कर लेते थे। साथ ही कार्ड से सीधे ऑनलाइन खरीदारी भी करते थे।
झारखंड और बलिया से जुड़े आरोपी
गिरफ्तार किए गए आरोपियों में दो युवक झारखंड के देवघर और एक उत्तर प्रदेश के बलिया जिले का निवासी है। तीनों को अदालत में पेश करने के बाद न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।
बरामद हुए डिजिटल साक्ष्य
पुलिस ने आरोपियों के पास से 10 मोबाइल फोन, 9 सिम कार्ड और लगभग 200 संदिग्ध APK फाइलें बरामद की हैं। साइबर विशेषज्ञ अब जब्त उपकरणों की फॉरेंसिक जांच कर रहे हैं, जिससे और पीड़ितों की पहचान होने की संभावना है।पुलिस अधिकारियों ने नागरिकों से अपील की है कि सोशल मीडिया पर क्रेडिट कार्ड या बैंकिंग सेवाओं से जुड़े किसी भी अनजान लिंक या ऐप को डाउनलोड न करें और अपनी गोपनीय जानकारी साझा करने से बचें।
