वाराणसी (रणभेरी): आध्यात्म और परंपरा की नगरी Varanasi एक बार फिर अनोखे विवाह की साक्षी बनी। इस बार गंगा की मध्य धारा में नाव पर एक विदेशी जोड़े ने वैदिक रीति-रिवाज से सात फेरे लेकर साथ निभाने का संकल्प लिया। मंत्रोच्चार और शास्त्रोक्त विधि के बीच लाइफ जैकेट पहने दूल्हा-दुल्हन ने एक-दूसरे के साथ जीवनभर रहने की कसमें खाईं।
जानकारी के अनुसार, मैक्सिको से आए रुईज कब्रोल और गोंजलो मिगुल पर्यटन के उद्देश्य से काशी पहुंचे थे। शहर की आध्यात्मिक ऊर्जा और घाटों की आभा ने उन्हें इतना प्रभावित किया कि उन्होंने यहीं विवाह करने का निर्णय ले लिया। पारंपरिक परिधान में सजे दूल्हे ने कुर्ता-पायजामा धारण किया, जबकि दुल्हन बनारसी साड़ी में सुसज्जित नजर आई।

वैदिक मंत्रों के बीच संपन्न हुआ विवाह
गंगा की लहरों पर सजी नाव में आचार्य द्वारा वैदिक मंत्रों के साथ विवाह संस्कार संपन्न कराया गया। विवाह के बाद दूल्हे ने कहा कि काशी का वातावरण उन्हें अद्भुत शांति देता है और यहीं से नई शुरुआत करना उनके लिए विशेष अनुभव रहा।

गाइड और आचार्य ने निभाई अहम भूमिका
जोड़े ने बताया कि वे पहले भी भारत आ चुके हैं, लेकिन काशी की यह उनकी पहली यात्रा थी। दो दिन तक शहर के आध्यात्मिक स्वरूप को समझने के बाद उन्होंने जीवन का नया अध्याय यहीं से शुरू करने का निश्चय किया।
स्थानीय गाइड आरिफ मोहम्मद ने बताया कि दुल्हन की इच्छा थी कि वह विवाह में बनारसी साड़ी पहने। गंगा की धारा, घाटों की पृष्ठभूमि और मंत्रों की गूंज ने इस विवाह को अविस्मरणीय बना दिया।
विवाह संस्कार संपन्न कराने वाले आचार्य दीपक पांडेय ने कहा कि धर्मनगरी काशी में विदेशी पर्यटकों द्वारा सनातन परंपरा के अनुसार विवाह करना भारतीय संस्कृति के प्रति उनके सम्मान को दर्शाता है। उन्होंने बताया कि सभी रस्में विधिवत पूरी कराई गईं।
गौरतलब है कि काशी में समय-समय पर देश-विदेश से आए सैलानी भारतीय परंपराओं से प्रेरित होकर वैदिक रीति से विवाह करते रहे हैं। गंगा के आंचल में संपन्न यह विवाह भी उसी श्रृंखला की एक नई कड़ी बन गया।
