(रणभेरी): संवेदनाओं और भक्ति से भरा एक दुर्लभ दृश्य उस समय देखने को मिला, जब कानपुर से आए मूक-बधिर बच्चों के समूह ने वृंदावन में संत प्रेमानंद महाराज से मुलाकात की। शब्दों के बिना, केवल हाव-भाव और भावनाओं के जरिए बच्चों ने अपनी बात रखी और भजन पर नृत्य कर भक्ति की अनुपम छवि प्रस्तुत की।
रविवार शाम राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित दिव्यांग डेवलपमेंट सोसायटी की अध्यक्ष मनप्रीत कौर इन बच्चों को लेकर वृंदावन पहुंची थीं। बच्चों ने संकेतों के माध्यम से सवाल किए और अपने द्वारा तैयार भजन पर नृत्य प्रस्तुत किया। इस दौरान प्रेमानंद महाराज भजन में पूरी तरह लीन नजर आए। वे हाथ जोड़कर एकटक बच्चों की ओर देखते रहे।
“ऐसे बच्चों की सेवा सौभाग्य है”
मनप्रीत कौर ने संत से भावुक अपील करते हुए कहा कि ये बच्चे न तो सुन सकते हैं और न ही बोल सकते हैं, लेकिन समाज में कई बार इन्हें लेकर नकारात्मक टिप्पणियां की जाती हैं। उन्होंने पूछा कि ऐसे हालात में मनोबल कैसे बनाए रखा जाए।
इस पर प्रेमानंद महाराज ने कहा कि ऐसे बच्चों का पालन-पोषण करना बड़े सौभाग्य की बात है। समाज की आलोचना से विचलित हुए बिना प्रेम और उत्साह के साथ आगे बढ़ना ही सच्ची सेवा है। उन्होंने संस्था के प्रयासों की सराहना करते हुए बच्चों और उनकी शिक्षिका को आशीर्वाद दिया।

भजन और नृत्य में झलकी वृंदावन की भक्ति
महाराज की अनुमति के बाद बच्चों ने ‘अरे मन ले चल वृंदावन…’ भजन पर भावपूर्ण नृत्य प्रस्तुत किया। राधा-कृष्ण के स्वरूप में सजे बच्चों ने हाथों की मुद्राओं और तालमेल से यमुना तट, बंसीवट और केशी घाट की झलक दिखाई। पूरी प्रस्तुति के दौरान प्रेमानंद महाराज शांत भाव से भजन सुनते रहे और अंत में इसे अत्यंत सुंदर बताया।
