काशी विश्वनाथ मंदिर में 9 और 10 नवंबर को आरती, सुगम दर्शन व रुद्राभिषेक की टिकट बुकिंग बंद

काशी विश्वनाथ मंदिर में 9 और 10 नवंबर को आरती, सुगम दर्शन व रुद्राभिषेक की टिकट बुकिंग बंद

अन्नकूट पर्व की तैयारियों के चलते लिया गया निर्णय, श्रद्धालुओं के लिए दर्शन रहेंगे जारी; 24 नवंबर को देव दीपावली पर भी सुचारु रहेगी व्यवस्था

वाराणसी (रणभेरी): श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में आगामी धनतेरस, दीपावली एवं अन्नकूट पर्व के मद्देनजर मंदिर न्यास ने आरती, सुगम दर्शन और रुद्राभिषेक की टिकट बुकिंग को लेकर महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। मंदिर न्यास की ओर से जारी सूचना के अनुसार, 9 नवंबर 2026 को मध्याह्न भोग आरती के बाद से 10 नवंबर की सायंकालीन सप्तऋषि आरती तक निर्धारित अवधि में होने वाली समस्त आरतियों, सुगम दर्शन और रुद्राभिषेक की टिकट बुकिंग उपलब्ध नहीं रहेगी।

मंदिर न्यास ने स्पष्ट किया है कि पर्व विशेष पर होने वाले पारंपरिक धार्मिक अनुष्ठानों और आवश्यक व्यवस्थाओं के चलते यह निर्णय लिया गया है। हालांकि, इस अवधि में श्रद्धालुओं के लिए बाबा विश्वनाथ का दर्शन बंद नहीं रहेगा। भक्त पूर्व निर्धारित व्यवस्था के तहत बाबा के दर्शन कर सकेंगे।

पश्चिमी द्वार के श्रद्धालुओं को दूसरे द्वारों से मिलेगा प्रवेश

अन्नकूट पर्व के आयोजन को लेकर मंदिर के गर्भगृह के पश्चिमी द्वार के समीप पारंपरिक सजावट और अन्य तैयारियां की जाएंगी। इसके चलते पश्चिमी द्वार से आने वाले श्रद्धालुओं को गर्भगृह के अन्य निर्धारित द्वारों से दर्शन कराया जाएगा। मंदिर प्रशासन का कहना है कि इस व्यवस्था का उद्देश्य श्रद्धालुओं को सुरक्षित और सुविधाजनक दर्शन उपलब्ध कराना है, ताकि पर्व के दौरान दर्शन व्यवस्था प्रभावित न हो।

देव दीपावली पर सामान्य रूप से होंगे दर्शन

मंदिर न्यास ने यह भी स्पष्ट किया है कि 24 नवंबर को देव दीपावली के अवसर पर बाबा विश्वनाथ के दर्शन सुचारु रूप से संचालित रहेंगे। श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो, इसके लिए आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जाएंगी।

मंदिर न्यास ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे पर्व के दौरान मंदिर प्रशासन की ओर से निर्धारित दिशा-निर्देशों और दर्शन व्यवस्था का पालन करें। साथ ही आरती, टिकट बुकिंग और दर्शन से संबंधित जानकारी के लिए केवल मंदिर के आधिकारिक सूचना माध्यमों पर ही भरोसा करें। न्यास ने कहा कि धार्मिक परंपराओं का विधिवत निर्वहन करने के साथ श्रद्धालुओं को सुरक्षित, सुगम और सुव्यवस्थित दर्शन कराना उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता है।

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