वकील को जेल भेजने की धमकी देने और पुलिस अधिकारी से माफी मंगवाने का आरोप; कार्रवाई नहीं होने पर न्यायमूर्ति की अदालत के बहिष्कार की चेतावनी
(रणभेरी): इलाहाबाद हाईकोर्ट परिसर में वकील के साथ कथित दुर्व्यवहार का मामला सामने आया है। हाईकोर्ट बार एसोसिएशन ने इस मामले में मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखकर हस्तक्षेप और उचित कार्रवाई की मांग की है। एसोसिएशन ने आरोप लगाया है कि अदालत में एक वकील को जेल भेजने की बात कही गई और उनसे पुलिस अधिकारी से माफी भी मंगवाई गई। बार एसोसिएशन ने चेतावनी दी है कि यदि मामले में उचित कार्रवाई नहीं हुई तो संबंधित न्यायमूर्ति की अदालत का बहिष्कार किया जा सकता है।
बार एसोसिएशन की ओर से 27 अक्टूबर को लिखे गए पत्र के मुताबिक, संबंधित न्यायमूर्ति की अदालत में पुलिस अधिकारियों और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के बैठने के लिए अलग कुर्सी रखी जाती है। आरोप है कि सुनवाई के दौरान पुलिस अधीक्षक (एसपी) स्तर के एक अधिकारी अतिरिक्त सरकारी अधिवक्ता (एजीए) के पीछे वाली पंक्ति में बैठे थे। इस पर एक वकील ने अधिकारी से कहा कि वह सीट उनके बैठने के लिए निर्धारित नहीं है और उन्हें पीछे बैठना चाहिए।
पत्र के अनुसार, इस बात को लेकर अतिरिक्त सरकारी अधिवक्ता ने वकील को फटकार लगाई और न्यायमूर्ति से शिकायत करने की बात कही। इसके बाद जब न्यायमूर्ति अदालत में पहुंचे तो सरकारी अधिवक्ता ने वकील के खिलाफ शिकायत की।
वकील को जेल भेजने की बात कहने का आरोप
बार एसोसिएशन का आरोप है कि शिकायत के बाद न्यायमूर्ति ने वकील की ओर उंगली दिखाते हुए उन्हें जेल भेजने की बात कही। एसोसिएशन के मुताबिक, वकील ने माफी मांगी, लेकिन इसके बाद उन्हें पुलिस अधिकारी से भी माफी मांगने के लिए कहा गया। पत्र में अदालत में मौजूद एक वरिष्ठ अधिवक्ता पर टिप्पणी किए जाने का आरोप भी लगाया गया है।
बार एसोसिएशन ने इस पूरे घटनाक्रम को अधिवक्ताओं की गरिमा और सम्मान से जुड़ा मामला बताया है। एसोसिएशन का कहना है कि मामले में हस्तक्षेप कर उचित कार्रवाई की जानी चाहिए, ताकि अधिवक्ताओं के सम्मान और न्यायिक प्रक्रिया की गरिमा बनी रहे।
कार्रवाई नहीं हुई तो अदालत के बहिष्कार की चेतावनी
बार एसोसिएशन ने मुख्य न्यायाधीश से मामले का संज्ञान लेने और उचित कदम उठाने की मांग की है। साथ ही चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांग पर कार्रवाई नहीं की गई तो संबंधित न्यायमूर्ति की अदालत का बहिष्कार किया जा सकता है। फिलहाल, उपलब्ध विवरण बार एसोसिएशन की ओर से लगाए गए आरोपों पर आधारित हैं। मामले में संबंधित न्यायमूर्ति या अन्य पक्षों की प्रतिक्रिया सामने आने पर घटनाक्रम की स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।
