वाराणसी (रणभेरी): चुनाव आयोग के समर्थन में युवा परिषद के कार्यकर्ताओं ने वाराणसी में न्याय मार्च निकालकर विपक्षी नेताओं के बयानों पर नाराजगी जताई। संगठन के सदस्यों ने सुभाष मंदिर से मुंशी प्रेमचंद स्मृति द्वार तक मार्च निकालते हुए चुनाव प्रक्रिया और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के समर्थन में अपनी बात रखी। प्रदर्शन के दौरान राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और अन्य विपक्षी नेताओं के खिलाफ नारेबाजी भी की गई।
युवा परिषद के नेताओं ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग पर सवाल उठाने के बजाय विपक्ष को अपने राजनीतिक रवैये और चुनावी दावों पर जवाब देना चाहिए। प्रदर्शनकारियों ने विदेशी फंडिंग, कथित अवैध घुसपैठ और मतदाता सूची में नामों के सत्यापन जैसे मुद्दों को उठाते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की। हालांकि, विदेशी फंडिंग और फर्जी मतदान से जुड़े आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं की गई है।
युवा नेताओं ने विपक्ष को दी चुनौती
युवा परिषद की ओर से आयोजित मार्च का नेतृत्व खुशी रमन भारतवंशी और प्रज्ञा परमिता महारी ने किया। दोनों ने कॉकरोच जनता पार्टी के नेता अभिजीत दीपके पर सवाल उठाते हुए उनके खर्चों और कथित आर्थिक मदद के स्रोतों की जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की।

नेताओं ने आरोप लगाया कि प्रदर्शन और राजनीतिक गतिविधियों के लिए धन कहां से आ रहा है, इसकी जांच होनी चाहिए। उन्होंने आतंकवाद, नक्सलवाद और देशविरोधी गतिविधियों के मुद्दों पर भी विपक्षी नेताओं को घेरने की कोशिश की। इन बयानों के दौरान प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार के समर्थन में नारे लगाए और विपक्ष से जवाब मांगा।
तख्तियों और नारों के जरिए जताया विरोध
मार्च में शामिल कार्यकर्ताओं ने हाथों में पोस्टर और तख्तियां लेकर चुनाव आयोग के समर्थन में अपनी आवाज बुलंद की। प्रदर्शन के दौरान राहुल गांधी और अन्य विपक्षी नेताओं से इस्तीफे की मांग करने वाले नारे लगाए गए। कुछ प्रदर्शनकारियों ने कथित विदेशी संबंधों और राजनीतिक फंडिंग की जांच कराने की मांग भी उठाई।
युवा परिषद के सदस्यों ने कहा कि चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्था की निष्पक्षता पर सवाल उठाने के लिए ठोस तथ्यों और प्रमाणों के साथ बात होनी चाहिए। संगठन ने स्पष्ट किया कि वह इस मुद्दे पर अपना विरोध आगे भी जारी रखेगा।
जीनत रहमान ने उठाए चुनावी जवाबदेही के सवाल
युवा परिषद, बीएचयू की चेयरपर्सन जीनत रहमान ने कहा कि राहुल गांधी यदि चुनाव में अनियमितताओं का आरोप लगा रहे हैं, तो उन्हें अपने आरोपों के समर्थन में प्रमाण प्रस्तुत करने चाहिए। उन्होंने कांग्रेस नेतृत्व और विपक्षी दलों की चुनावी जवाबदेही पर सवाल उठाते हुए कहा कि चुनाव आयोग से इस्तीफे की मांग करना उचित नहीं है।
जीनत रहमान ने मतदाता सूची के पुनरीक्षण का उल्लेख करते हुए दावा किया कि सूची से संदिग्ध और अपात्र नाम हटाए जाने से विपक्ष असहज है। उन्होंने बांग्लादेशी घुसपैठियों, रोहिंग्या समुदाय और मृत व्यक्तियों के नामों से संबंधित कथित अनियमितताओं की जांच की मांग भी की। इन दावों के संबंध में कोई स्वतंत्र प्रमाण प्रदर्शन के दौरान प्रस्तुत नहीं किया गया।
कांग्रेस की चुनावी रणनीति पर डॉ. एपी सिंह ने साधा निशाना
युवा परिषद के नेता डॉ. एपी सिंह ने कांग्रेस पर राजनीतिक लाभ के लिए चुनावी प्रक्रिया और इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों पर सवाल उठाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि विपक्ष को चुनाव आयोग की आलोचना करने के साथ-साथ अपने आरोपों को प्रमाणित भी करना चाहिए।
डॉ. सिंह ने केंद्र सरकार की नीतियों का समर्थन करते हुए दावा किया कि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भ्रष्टाचार और संदिग्ध वित्तीय गतिविधियों पर अंकुश लगा है। उन्होंने विदेशी फंडिंग से जुड़े आरोपों की जांच कराने की मांग भी उठाई। इन आरोपों पर संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया इस रिपोर्ट के लिए उपलब्ध नहीं हो सकी।
आंदोलन तेज करने की चेतावनी
युवा परिषद के जिला प्रमुख सत्यम राय ने कहा कि संगठन चुनाव आयोग के समर्थन और अपनी राजनीतिक मांगों को लेकर आंदोलन जारी रखेगा। उन्होंने युवाओं से लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने और सार्वजनिक मुद्दों पर सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।
युवा परिषद के नेता मयंक श्रीवास्तव ने कहा कि देश के युवाओं को राजनीतिक बयानबाजी और देश की छवि से जुड़े मुद्दों पर सजग रहना चाहिए। वहीं, संगठन मंत्री दक्षिता भारतवंशी ने कहा कि परिषद अपने विचारों और मांगों को आगे भी मजबूती से उठाएगी। महासचिव सृष्टि त्यागी ने भी संगठन की ओर से राष्ट्रीय हितों और सांस्कृतिक विषयों पर अपनी आवाज बुलंद करने की बात कही।
चुनावी पारदर्शिता पर जारी है राजनीतिक बहस
वाराणसी में हुए इस प्रदर्शन के जरिए युवा परिषद ने चुनाव आयोग के प्रति अपना समर्थन जाहिर किया और विपक्ष की चुनाव संबंधी शिकायतों पर सवाल उठाए। मतदाता सूची की शुद्धता, चुनावी पारदर्शिता और राजनीतिक फंडिंग जैसे मुद्दे इस विरोध प्रदर्शन के केंद्र में रहे। हालांकि, चुनाव में कथित गड़बड़ी, विदेशी वित्तीय सहायता और मतदाता सूची में फर्जी नामों से संबंधित आरोपों की पुष्टि के लिए आधिकारिक दस्तावेजों तथा संबंधित संस्थाओं के पक्ष को सामने रखना आवश्यक होगा। फिलहाल, यह प्रदर्शन युवा परिषद की ओर से विपक्ष के खिलाफ राजनीतिक विरोध और चुनाव आयोग के समर्थन के रूप में सामने आया है।
