राहुल गांधी का चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप, सीईसी से इस्तीफे की मांग; बोले- वोट चोरी से लोकतंत्र और संविधान पर हमला

राहुल गांधी का चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप, सीईसी से इस्तीफे की मांग; बोले- वोट चोरी से लोकतंत्र और संविधान पर हमला

(रणभेरी): कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने गुरुवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि लोकसभा और विधानसभा चुनावों में हेराफेरी हुई है और वोट चोरी के जरिए लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर किया जा रहा है। राहुल गांधी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के तत्काल इस्तीफे की मांग की।

करीब सवा घंटे की देरी से शुरू हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में राहुल गांधी ने कहा कि भारत में सरकारों के खिलाफ एंटी-इन्कंबेंसी एक मजबूत राजनीतिक ताकत रही है। उन्होंने कहा कि इंदिरा गांधी के बांग्लादेश युद्ध में जीत के बाद लोकप्रियता के चरम पर होने के बावजूद कुछ वर्षों में उनके खिलाफ भी एंटी-इन्कंबेंसी पैदा हो गई थी। राहुल ने सवाल उठाया कि आज भाजपा और नरेंद्र मोदी के खिलाफ कई राज्यों में यह प्रभाव दिखाई क्यों नहीं देता।

राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि लोकसभा और विधानसभा चुनावों में गड़बड़ी हुई है। उन्होंने चुनाव आयोग पर वोट चोरी में शामिल होने का आरोप लगाते हुए कहा कि आयोग सरकार की ‘बी टीम’ की तरह काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि यदि वोट की सुरक्षा नहीं हुई तो संविधान और लोकतांत्रिक संस्थाओं की नींव कमजोर हो जाएगी।

राहुल गांधी ने कहा कि जहां लोकतांत्रिक व्यवस्था नहीं होती, वहां एंटी-इन्कंबेंसी भी दिखाई नहीं देती। उन्होंने इराक और उत्तर कोरिया का उदाहरण देते हुए कहा कि वोट खत्म होने का मतलब लोगों के अपने प्रतिनिधि चुनने के अधिकार पर हमला है। उनके मुताबिक, वोटिंग सिस्टम प्रभावित होने पर संविधान, कानून और संस्थानों की वैधता पर भी सवाल खड़े होते हैं।

उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग की जिम्मेदारी लोगों के वोट को सुरक्षित रखना है। राहुल गांधी ने दावा किया कि उनके पास वोट चोरी के आरोपों को साबित करने के लिए पर्याप्त सबूत हैं और आने वाले समय में वे इनका खुलासा करेंगे।

राहुल गांधी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से पद से इस्तीफा देने की मांग करते हुए कहा कि चुनावी व्यवस्था में हुई कथित गड़बड़ियों की जिम्मेदारी उन्हें लेनी चाहिए। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की भूमिका की जांच किए जाने की भी मांग की और आरोप लगाया कि लोकतांत्रिक ढांचे पर हमला किया जा रहा है।

क्या है पूरा मामला?

इससे पहले राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए शाम चार बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस करने की जानकारी दी थी। यह प्रेस कॉन्फ्रेंस ऐसे समय हुई, जब चुनाव आयोग के भीतर विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर प्रक्रिया और आयोग के कामकाज को लेकर मतभेद की खबरें सामने आई हैं।

‘इंडियन एक्सप्रेस’ की रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयोग के दो चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में 14 बार कुछ फैसलों और आदेशों पर आपत्ति दर्ज कराई। रिपोर्ट के अनुसार, इन आपत्तियों में एसआईआर, नए मतदाताओं के पंजीकरण, फॉर्म-6 में बदलाव, मतदाता सूची से नाम हटाने और जोड़ने, नाम बहाल करने के आदेशों के खिलाफ अपील और वोटर डेटा की सुरक्षा जैसे मुद्दे शामिल थे।

फॉर्म-6 में बदलाव को लेकर भी उठे सवाल

रिपोर्ट के मुताबिक, नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए इस्तेमाल होने वाले फॉर्म-6 में एसआईआर से जुड़ा एक सवाल जोड़ा गया था। इसमें आवेदक से उसके या उसके माता-पिता अथवा दादा-दादी का नाम पिछली एसआईआर की मतदाता सूची में होने के बारे में जानकारी मांगी गई थी।

रिपोर्ट के अनुसार, चुनाव आयुक्त विवेक जोशी ने मई में इस बदलाव पर आपत्ति जताई थी। उनका कहना था कि फॉर्म-6 में बदलाव के लिए मतदाता पंजीकरण से जुड़े नियमों में संशोधन आवश्यक है। सुखबीर सिंह संधू ने भी इस आपत्ति से सहमति जताई और बाद में बदलाव को अनधिकृत तथा गैरकानूनी बताते हुए हटाने की मांग की।

चुनाव आयोग ने आरोपों को किया खारिज

वहीं, चुनाव आयोग ने इन आरोपों को खारिज करते हुए बुधवार को प्रेस नोट जारी कर अपना पक्ष रखा। आयोग ने कहा कि वह संविधान के तहत काम करने वाली बहु-सदस्यीय संवैधानिक संस्था है। आयोग के मुताबिक, लिखित टिप्पणियां, सुझाव, तकनीकी राय और आंतरिक जांच-पड़ताल उसकी सामान्य कार्यप्रणाली का हिस्सा हैं। आयोग ने स्पष्ट किया कि उसकी सभी कार्रवाइयां कानून और आयोग के निर्देशों के अनुरूप की गई हैं।

Share this news

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *