वाराणसी (रणभेरी): रामनगर थाने में तैनात एक पुलिसकर्मी के इस्तीफे ने सोमवार शाम पुलिस महकमे में हलचल पैदा कर दी। लगातार ड्यूटी और एक मरीज की सुरक्षा में कई दिनों से लगाए जाने से कथित तौर पर मानसिक दबाव में चल रहे कांस्टेबल ने थाने के आधिकारिक व्हाट्सऐप ग्रुप में अपना इस्तीफा भेज दिया। इस्तीफे में उसने साफ शब्दों में कहा कि वह 24 घंटे लगातार काम करने में सक्षम नहीं है और उसके पास किसी ‘विशिष्ट मानव’ जैसी अतिरिक्त शक्ति नहीं है।
जैसे ही यह पत्र थाने के आधिकारिक ग्रुप में पहुंचा, पुलिस अधिकारियों के बीच इसकी चर्चा शुरू हो गई। मामले की जानकारी वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंची तो तत्काल थाना प्रभारी और संबंधित कांस्टेबल को बुलाकर पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली गई। बाद में पुलिसकर्मी की काउंसिलिंग कराई गई और उसका इस्तीफा स्वीकार नहीं किया गया।
मरीज के साथ लगातार ड्यूटी से बढ़ा तनाव
मामले के केंद्र में रामनगर थाने पर तैनात कांस्टेबल देवगन कुमार चौहान हैं। बताया जा रहा है कि पिछले कई दिनों से उनकी ड्यूटी ट्रॉमा सेंटर में उपचार करा रहे एक मरीज के साथ लगाई जा रही थी। लगातार ड्यूटी के चलते वह मानसिक दबाव महसूस कर रहे थे। इसके अलावा घरेलू परिस्थितियों को लेकर भी उनके परेशान होने की बात सामने आई है।
बताया गया कि 5 सितंबर की रात ड्यूटी पूरी करने के बाद कांस्टेबल घर गया था। अगले दिन उसे दोबारा मरीज के साथ ड्यूटी पर जाने के लिए कहा गया। लगातार जिम्मेदारी मिलने और निजी परेशानियों के बीच उसने अधिकारियों से अपनी बात रखने के लिए इस्तीफे का रास्ता चुना।
थाने के आधिकारिक ग्रुप में भेजा पत्र
कांस्टेबल ने 7 सितंबर की शाम थाने के आधिकारिक ग्रुप में एक पत्र साझा किया। पत्र पुलिस कमिश्नर को संबोधित था और इसमें उसने स्वयं को सेवा से मुक्त किए जाने का अनुरोध किया था।
पत्र में कांस्टेबल ने लिखा कि वह प्रत्येक दिन 24 घंटे काम करने में सक्षम नहीं है। उसने व्यंग्यात्मक अंदाज में यह भी कहा कि उसके पास किसी विशिष्ट मानव की तरह असाधारण शक्तियां नहीं हैं, जिससे वह लगातार बिना आराम के काम करता रह सके। इसी वजह से उसने अधिकारियों से उसे कार्यमुक्त करने का अनुरोध किया।
पत्र सामने आते ही पुलिसकर्मियों के बीच इसकी चर्चा तेज हो गई। मामला वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंचा तो विभाग ने इसे गंभीरता से लेते हुए कांस्टेबल से संपर्क किया।

अधिकारियों ने तत्काल शुरू की कवायद
मामले की जानकारी मिलने के बाद आला अधिकारियों ने थाना प्रभारी और कांस्टेबल को तलब किया। अधिकारियों ने सिपाही से इस्तीफा देने की वजह पूछी और उसकी परिस्थितियों को समझने का प्रयास किया।
एसीपी विजय प्रताप सिंह के अनुसार, कांस्टेबल ने बाद में फोन पर बातचीत के दौरान यह स्पष्ट किया कि वह नौकरी छोड़ना नहीं चाहता और पुलिस विभाग में अपनी सेवा जारी रखना चाहता है। इसके बाद उसकी काउंसिलिंग कराई गई।
काउंसिलिंग के बाद विभाग ने उसका इस्तीफा स्वीकार नहीं किया। कांस्टेबल ने भी थाने के ग्रुप में भेजे गए पत्र को बाद में डिलीट कर दिया। हालांकि, तब तक पत्र सोशल मीडिया पर प्रसारित होने लगा था।
ड्यूटी लगाने की व्यवस्था पर भी उठे सवाल
इस पूरे प्रकरण के बाद थाने में ड्यूटी लगाने की व्यवस्था को लेकर भी सवाल खड़े हो गए हैं। बताया जा रहा है कि मरीज के साथ लगातार ड्यूटी लगाने का जिम्मा एक दीवान की ओर से तय किया जा रहा था। लगातार कई दिनों तक एक ही पुलिसकर्मी को जिम्मेदारी दिए जाने को लेकर अब विभागीय स्तर पर भी चर्चा हो रही है।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि कांस्टेबल की परेशानी को समझते हुए उसकी काउंसिलिंग कराई गई है। फिलहाल उसने नौकरी जारी रखने की इच्छा जताई है। विभाग की ओर से मामले को शांत करा दिया गया है और कांस्टेबल का इस्तीफा निरस्त कर दिया गया है।

सोशल मीडिया पर वायरल हुआ इस्तीफा
कांस्टेबल द्वारा ग्रुप में भेजा गया पत्र बाद में डिलीट कर दिया गया, लेकिन उससे पहले किसी ने उसका स्क्रीनशॉट ले लिया। इसके बाद पत्र सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफॉर्म पर वायरल हो गया। पत्र में इस्तेमाल किए गए ‘विशिष्ट मानव जैसी शक्तियां नहीं हैं’ वाले वाक्य ने लोगों का खासा ध्यान खींचा।
घटना ने एक बार फिर पुलिसकर्मियों पर पड़ने वाले लगातार कार्य दबाव और ड्यूटी के दौरान मिलने वाले आराम के समय को लेकर चर्चा छेड़ दी है। हालांकि, अधिकारियों की ओर से कांस्टेबल की स्थिति को देखते हुए तत्काल काउंसिलिंग कराकर मामले को संभाल लिया गया।
