पांच मंजिला नवोदय अस्पताल में लगी आग, मची अफरा-तफरी; गोद में नवजात और स्ट्रेचर पर मरीजों को लेकर बाहर भागे परिजन

पांच मंजिला नवोदय अस्पताल में लगी आग, मची अफरा-तफरी; गोद में नवजात और स्ट्रेचर पर मरीजों को लेकर बाहर भागे परिजन

(रणभेरी): बरेली में इज्जतनगर थाना क्षेत्र के मिनी बाईपास स्थित पांच मंजिला नवोदय अस्पताल में शनिवार सुबह अचानक आग लगने से हड़कंप मच गया। आग अस्पताल की सबसे ऊपरी मंजिल पर बने एक कमरे में लगी। देखते ही देखते कमरे में धुआं भर गया और कुछ ही देर में धुआं नीचे के फ्लोर तक पहुंच गया। फायर अलार्म बजते ही अस्पताल में मौजूद मरीजों, तीमारदारों और कर्मचारियों के बीच अफरा-तफरी मच गई।

घटना के समय अस्पताल में करीब 100 मरीज और उनके तीमारदार मौजूद थे। ओपीडी में भी काफी संख्या में लोग थे। आग की सूचना मिलते ही परिजन अपने मरीजों को लेकर अस्पताल से बाहर निकलने लगे। नवजात बच्चों को उनके माता-पिता गोद में लेकर सुरक्षित स्थान की ओर भागे। वहीं आईसीयू में भर्ती गंभीर मरीजों को अस्पताल कर्मचारियों ने स्ट्रेचर के जरिए बाहर निकाला।

पांच मंजिला नवोदय अस्पताल में लगी आग, मची अफरा-तफरी; गोद में नवजात और स्ट्रेचर पर मरीजों को लेकर बाहर भागे परिजन

टॉप फ्लोर के कमरे में भड़की आग, धुएं से भर गया अस्पताल

प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, शनिवार सुबह करीब 10 बजे अस्पताल की पांचवीं मंजिल पर बने रेस्ट रूम में आग लगी। कमरे में रखे सोफे और अन्य सामान की वजह से आग तेजी से फैलने लगी और वहां धुआं उठने लगा। धुआं अस्पताल की अन्य मंजिलों तक पहुंचने के बाद फायर अलार्म सक्रिय हो गया।

अलार्म बजते ही अस्पताल में मौजूद लोग घबरा गए। कर्मचारियों ने तत्काल मरीजों को बाहर निकालने का काम शुरू किया। गंभीर मरीजों को स्ट्रेचर से नीचे लाया गया, जबकि कई मरीजों को उनके परिजन सहारा देकर बाहर ले गए।

आईसीयू के मरीजों को भी निकाला, नवजातों को गोद में लेकर दौड़े माता-पिता

आग के दौरान सबसे ज्यादा चिंता आईसीयू और अन्य वार्डों में भर्ती मरीजों को लेकर रही। कर्मचारियों ने प्राथमिकता के आधार पर गंभीर मरीजों को सुरक्षित बाहर निकाला। कुछ मरीजों को स्ट्रेचर से अस्पताल के बाहर लाया गया। अस्पताल में नवजात बच्चों के भर्ती होने के कारण उनके परिजनों में भी दहशत फैल गई। कई माता-पिता अपने बच्चों को गोद में लेकर बाहर की तरफ भागते नजर आए। अस्पताल के बाहर मरीजों और तीमारदारों की भीड़ जमा हो गई।

पांच मंजिला नवोदय अस्पताल में लगी आग, मची अफरा-तफरी; गोद में नवजात और स्ट्रेचर पर मरीजों को लेकर बाहर भागे परिजन

फायर ब्रिगेड ने बगल की बिल्डिंग से डाला पानी

सूचना मिलते ही पुलिस और फायर ब्रिगेड की टीमें मौके पर पहुंचीं। अस्पताल की ऊपरी मंजिल तक सीधे पहुंचने में परेशानी को देखते हुए फायर कर्मियों ने बगल की इमारत से पानी की बौछार कर आग बुझाने का प्रयास किया। करीब दो घंटे की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया जा सका।

फायर कर्मियों ने अस्पताल की बिल्डिंग में यह भी देखा कि कहीं आग या धुआं किसी दूसरे हिस्से तक तो नहीं पहुंचा है। आग बुझने के बाद भी सुरक्षा के लिहाज से अस्पताल की जांच की गई।

ऊपरी मंजिल पर 4-5 लोग फंसे, सीढ़ियों से सुरक्षित नीचे उतारा

फायर ब्रिगेड कर्मचारी कपिल सिंह के मुताबिक, आग के दौरान अस्पताल की ऊपरी मंजिल पर करीब चार से पांच लोग फंस गए थे। वहां धुआं अधिक होने के कारण रेस्क्यू टीम को परेशानी का सामना करना पड़ा। टीम तत्काल ऊपर पहुंची और सभी लोगों को सीढ़ियों के रास्ते सुरक्षित नीचे लेकर आई। फायर टीम ने अस्पताल में मौजूद प्रवेश और निकास मार्गों के साथ ही आग से बचाव के लिए किए गए इंतजामों की भी पड़ताल शुरू की।

एहतियातन अस्पताल खाली कराया, दूसरे अस्पतालों में भेजे गए मरीज

अस्पताल प्रशासन ने आग और धुएं को देखते हुए पूरे अस्पताल को खाली कराने का फैसला लिया। मरीजों को सुरक्षित रखने के लिए आसपास के अस्पतालों से संपर्क किया गया। इसके बाद एंबुलेंस की मदद से मरीजों को नजदीक स्थित राज अस्पताल और प्रसाप अस्पताल में शिफ्ट कराया गया। अस्पताल के मालिक उमेश गंगवार ने बताया कि मरीजों को दूसरे अस्पतालों में भेजने के साथ ही कर्मचारियों को भी वहां भेजा गया है। वहां मरीजों की निगरानी की जा रही है।

अस्पताल मालिक बोले- टॉप फ्लोर पर कम आवाजाही, केवल सोफे जले

अस्पताल मालिक डॉ. उमेश गंगवार ने बताया कि सबसे ऊपरी मंजिल पर बने कमरे का इस्तेमाल रेस्ट रूम के तौर पर होता है। सामान्य दिनों में इस हिस्से में लोगों की आवाजाही काफी कम रहती है। कमरे में सोफे आदि रखे होने के कारण आग लगने के बाद धुआं ज्यादा उठा।

उनके मुताबिक, आग को समय रहते नियंत्रित कर लिया गया, इसलिए वह अन्य मंजिलों तक नहीं पहुंच सकी। शुरुआती जानकारी में कमरे में रखे एक-दो सोफे के जलने की बात सामने आई है। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि हादसे में किसी मरीज या अन्य व्यक्ति के घायल होने की सूचना नहीं है।
उन्होंने यह भी बताया कि अस्पताल की ऊपरी मंजिल पर बनी कैंटीन पिछले करीब डेढ़ साल से बंद है और वहां किसी तरह की गतिविधि नहीं होती।

शॉर्ट सर्किट से आग लगने की आशंका

प्रारंभिक जांच में आग लगने की वजह शॉर्ट सर्किट बताई जा रही है। हालांकि फायर विभाग और पुलिस की ओर से घटना के वास्तविक कारण की जांच की जा रही है। अधिकारियों की टीम अस्पताल में अग्निशमन उपकरणों, निकासी मार्गों और सुरक्षा व्यवस्था का भी निरीक्षण कर रही है। हादसे के बाद अस्पताल के बाहर मरीजों के परिजन अपने रिश्तेदारों की जानकारी लेने के लिए परेशान दिखाई दिए। कई लोगों को यह तक पता नहीं था कि उनके मरीज को किस अस्पताल में ले जाया गया है।

अस्पताल में भर्ती एक मरीज की पत्नी शहाना ने बताया कि उनके पति जनरल वार्ड में भर्ती थे और उनका इलाज चल रहा था। वह घटना की जानकारी मिलने के बाद अस्पताल पहुंचीं, लेकिन उन्हें तत्काल यह पता नहीं चल सका कि उनके पति को किस अस्पताल में शिफ्ट किया गया है।

वहीं हारून ने बताया कि उनके पिता करीब सात-आठ दिनों से अस्पताल में भर्ती हैं। उन्हें खांसी की शिकायत थी। हादसे के वक्त वह अस्पताल में मौजूद नहीं थे। अस्पताल पहुंचने के बाद वह अपने पिता के बारे में जानकारी जुटाने में लगे रहे।

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