वाराणसी (रणभेरी): राजधानी लखनऊ में हाल ही में कोचिंग संस्थान में हुई दर्दनाक घटना के बाद वाराणसी में प्रशासन ने कोचिंग सेंटरों की सुरक्षा व्यवस्था और भवन मानकों की व्यापक जांच शुरू कर दी है। मंगलवार से शुरू हुए विशेष अभियान के तहत वाराणसी विकास प्राधिकरण (वीडीए) और अग्निशमन विभाग की संयुक्त टीम विभिन्न क्षेत्रों में संचालित कोचिंग संस्थानों का निरीक्षण कर रही है। जांच के पहले ही दिन कई गंभीर अनियमितताएं सामने आने पर शहर के अलग-अलग इलाकों में संचालित आठ कोचिंग संस्थानों को सील कर दिया गया।
प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार निरीक्षण के दौरान कुछ प्रतिष्ठित और बड़े नाम वाले कोचिंग संस्थान भी नियमों के अनुरूप नहीं पाए गए। इनमें भवन निर्माण स्वीकृति, सुरक्षा प्रबंध और अग्निशमन मानकों से जुड़ी कमियां प्रमुख रूप से सामने आईं।
बिना स्वीकृत नक्शे के संचालित मिल रहा था संस्थान
वाराणसी विकास प्राधिकरण के अधिकारियों ने शिवपुर और सिकरौल क्षेत्र में कई कोचिंग संस्थानों का निरीक्षण किया। जांच के दौरान एक प्रमुख कोचिंग सेंटर भवन स्वीकृति संबंधी आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सका। अधिकारियों ने पाया कि संस्थान निर्धारित निर्माण मानकों का पालन किए बिना संचालित हो रहा था। इसके बाद तत्काल प्रभाव से उसे सील कर दिया गया।
संबंधित संचालकों को निर्देश दिया गया है कि वे निर्धारित समय के भीतर अपने सभी वैध दस्तावेज और भवन स्वीकृति संबंधी अभिलेख प्राधिकरण के समक्ष प्रस्तुत करें। दस्तावेजों की जांच के बाद आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
अधिकांश संस्थानों के पास नहीं है फायर एनओसी
अग्निशमन विभाग की प्रारंभिक जांच में यह तथ्य सामने आया कि शहर में संचालित बड़ी संख्या में कोचिंग संस्थानों ने अब तक फायर एनओसी प्राप्त नहीं की है। विभागीय अधिकारियों के अनुसार केवल सीमित संख्या में संस्थानों को ही अग्निशमन विभाग से अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी किया गया है।
दुर्गाकुंड, सामनेघाट, सुंदरपुर, सिगरा, पांडेयपुर, सारनाथ, भोजूबीर, शिवपुर, अर्दली बाजार, लोहता और कैंट सहित कई क्षेत्रों में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं वाले कोचिंग सेंटर संचालित हो रहे हैं। इनमें से कई संस्थानों में अग्नि सुरक्षा से जुड़े बुनियादी प्रबंध भी पर्याप्त नहीं पाए गए।
अन्य संस्थानों की भी होगी जांच
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यह अभियान केवल शुरुआती चरण में है। आने वाले दिनों में शहर के सभी प्रमुख कोचिंग संस्थानों का निरीक्षण किया जाएगा। जहां भी भवन सुरक्षा, अग्निशमन व्यवस्था या प्रशासनिक मानकों का उल्लंघन मिलेगा, वहां नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
अधिकारियों का कहना है कि छात्रों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी प्रकार की लापरवाही को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
बार एसोसिएशन ने भी उठाई कड़ी कार्रवाई की मांग
इस बीच सेंट्रल बार एसोसिएशन के प्रतिनिधियों ने जिला प्रशासन से मुलाकात कर सुरक्षा मानकों को लेकर ज्ञापन सौंपा। प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि हालिया घटनाओं ने यह साबित कर दिया है कि कई संस्थानों में सुरक्षा नियमों की अनदेखी की जा रही है।
ज्ञापन में मांग की गई कि शहर के सभी कोचिंग सेंटरों, निजी छात्रावासों और होटलों की समयबद्ध जांच कराई जाए। साथ ही जिन संस्थानों में सुरक्षा मानकों का पालन नहीं हो रहा है, उनके विरुद्ध तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
फायर सेफ्टी नियमों को लेकर प्रशासन सख्त
पिछले कुछ वर्षों में देश के विभिन्न हिस्सों में शैक्षणिक संस्थानों में आग लगने की घटनाओं के बाद सरकार ने फायर सेफ्टी नियमों को और अधिक कठोर बनाया है। अब निर्धारित श्रेणी के कोचिंग संस्थानों के लिए अग्निशमन विभाग से एनओसी लेना अनिवार्य माना जा रहा है।
नियमों के तहत ऊंची इमारतों, बहुमंजिला भवनों और अधिक छात्र क्षमता वाले संस्थानों को विशेष सुरक्षा मानकों का पालन करना होता है। इनमें दो सुरक्षित निकास मार्ग, अग्निशामक यंत्र, स्मोक डिटेक्टर, फायर अलार्म सिस्टम, पर्याप्त वेंटिलेशन तथा आपातकालीन निकासी व्यवस्था शामिल हैं।
फायर एनओसी प्राप्त करने की प्रक्रिया
फायर एनओसी के लिए संस्थान संचालकों को भवन का स्वीकृत नक्शा, अग्नि सुरक्षा व्यवस्था का विवरण, विद्युत सुरक्षा प्रमाण पत्र और स्वामित्व अथवा किरायेदारी से जुड़े दस्तावेज प्रस्तुत करने होते हैं। आवेदन प्राप्त होने के बाद अग्निशमन विभाग की टीम स्थल निरीक्षण करती है।

निरीक्षण में सभी मानक पूरे पाए जाने पर निर्धारित समय सीमा के भीतर अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी किया जाता है। अधिकारियों का कहना है कि बिना आवश्यक सुरक्षा प्रमाणपत्रों के किसी भी संस्थान का संचालन छात्रों की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन सकता है।
छात्रों की सुरक्षा पर प्रशासन का फोकस
प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि हालिया घटनाओं से सबक लेते हुए अब सुरक्षा मानकों के अनुपालन को लेकर किसी प्रकार की ढिलाई नहीं बरती जाएगी। शहर में संचालित सभी कोचिंग संस्थानों, छात्रावासों और अन्य भीड़भाड़ वाले व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की चरणबद्ध जांच जारी रहेगी। जिन संस्थानों में कमियां पाई जाएंगी, उनके खिलाफ नियमानुसार सीलिंग, जुर्माना अथवा अन्य कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
