(रणभेरी): उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग द्वारा असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती (विज्ञापन संख्या-51) की पुनर्परीक्षा शनिवार, 18 अप्रैल से सख्त निगरानी में शुरू हो गई है। यह परीक्षा दो दिनों तक आयोजित की जाएगी। प्रदेश के छह प्रमुख शहरों- वाराणसी, प्रयागराज, आगरा, मेरठ, लखनऊ और गोरखपुर में कुल 48 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं, जिनमें से वाराणसी में 8 केंद्र स्थापित किए गए हैं।
आयोग के अध्यक्ष डॉ. प्रशांत कुमार ने परीक्षा को निष्पक्ष और पारदर्शी बनाने के लिए कड़े निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि परीक्षा में नकल या किसी भी प्रकार की गड़बड़ी करने वाले व्यक्तियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी, जिसमें आजीवन कारावास तक का प्रावधान शामिल है।
सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम
सभी परीक्षा केंद्रों को सीसीटीवी कैमरों से लैस किया गया है, जिनकी निगरानी जिला स्तर के कंट्रोल रूम और आयोग के केंद्रीय कमांड सेंटर से की जा रही है। परीक्षार्थियों को केंद्र में प्रवेश से पहले सघन तलाशी से गुजरना होगा। मोबाइल फोन या अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के इस्तेमाल पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है।
परीक्षा केंद्रों के आसपास धारा 144 लागू कर दी गई है। जिलाधिकारी और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को लगातार निरीक्षण के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही पर्याप्त पुलिस बल तैनात कर संदिग्ध गतिविधियों पर कड़ी नजर रखी जा रही है।
हर जिले में नियुक्त किए गए प्रेक्षक
परीक्षा की निगरानी के लिए प्रत्येक जिले में एक-एक प्रेक्षक नियुक्त किया गया है। वाराणसी में विमल कुमार विश्वकर्मा को यह जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसके अलावा गोरखपुर में डॉ. कृष्ण चंद्र वर्मा, प्रयागराज में डॉ. हरेन्द्र कुमार राय, आगरा में कीर्ति गौतम, मेरठ में प्रो. राधाकृष्ण और लखनऊ में योगेन्द्र नाथ सिंह को प्रेक्षक बनाया गया है।
अफवाहों से दूर रहने की अपील
आयोग ने अभ्यर्थियों से समय पर परीक्षा केंद्र पहुंचने और प्रवेश पत्र में दिए गए निर्देशों का पालन करने की अपील की है। साथ ही उन्हें किसी भी तरह की अफवाहों से बचने और केवल आधिकारिक वेबसाइट व सोशल मीडिया हैंडल से ही जानकारी प्राप्त करने को कहा गया है।
एक वर्ष बाद दोबारा परीक्षा
गौरतलब है कि इसी भर्ती के लिए अप्रैल 2025 में आयोजित परीक्षा के बाद बड़े पैमाने पर अनियमितताओं की शिकायतें सामने आई थीं। इसके बाद अभ्यर्थियों ने विरोध प्रदर्शन भी किए। मामले की गंभीरता को देखते हुए सरकार के निर्देश पर एसटीएफ ने जांच की, जिसमें फर्जी प्रश्नपत्र के जरिए ठगी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश हुआ। इस मामले में तीन आरोपियों महबूब अली, बैजनाथ पाल और विनय पाल को गिरफ्तार किया गया था। इन घटनाओं के बाद पारदर्शिता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से आयोग ने पुनर्परीक्षा कराने का निर्णय लिया है।
