वाराणसी (रणभेरी): धर्म और आस्था की नगरी काशी में बाबा काल भैरव के स्वरूप माने जाने वाले प्रसिद्ध श्री कपाल भैरव, लाट भैरव का पारंपरिक तिलकोत्सव श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया। कज्जाकपुरा स्थित लाट भैरव मंदिर से तिलक की सामग्री के साथ भव्य शोभायात्रा निकाली गई, जो विभिन्न मार्गों से होती हुई विश्वेश्वरगंज मंडी स्थित माता शीतला मंदिर पहुंची। हल्की बारिश के बावजूद श्रद्धालुओं का उत्साह कम नहीं हुआ और पूरे रास्ते बाबा के जयकारे गूंजते रहे।
श्री कपाल भैरव अथवा लाट भैरव प्रबंध समिति की ओर से आयोजित इस धार्मिक आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। शोभायात्रा में पारंपरिक धार्मिक सामग्री के साथ बैंड-बाजा, डमरू दल, धर्म ध्वजा और डीजे आकर्षण का केंद्र रहे। रास्ते भर भक्त भक्ति गीतों पर झूमते नजर आए।
बारिश के बावजूद नहीं थमा श्रद्धालुओं का उत्साह
तिलकोत्सव की तैयारियां शाम से ही लाट भैरव मंदिर परिसर में शुरू हो गई थीं। मंदिर परिसर में विभिन्न थाल और परातों में तिलक के लिए सामग्री सजाई गई। विधि-विधान से पूजा और आरती के बाद श्रद्धालुओं ने इन सामग्रियों को पारंपरिक तरीके से अपने सिर पर रखकर शोभायात्रा में शामिल किया।

बारिश के कारण शोभायात्रा निर्धारित समय से कुछ देर बाद रवाना हुई। हालांकि मौसम श्रद्धालुओं की आस्था के सामने बाधा नहीं बन सका। जैसे ही शोभायात्रा आगे बढ़ी, भक्तों की भीड़ और धार्मिक उत्साह ने वातावरण को भक्तिमय बना दिया।
विधायक नीलकंठ तिवारी ने किया शुभारंभ
शोभायात्रा का शुभारंभ मुख्य अतिथि विधायक डॉ. नीलकंठ तिवारी ने किया। उन्होंने श्री कपाल भैरव अथवा लाट भैरव प्रबंध समिति के अध्यक्ष रोहित जायसवाल के सिर पर पीले अक्षत से सजी परात रखवाकर धार्मिक यात्रा को रवाना किया। गणेश प्रतिमा और तिलक सामग्री के साथ शोभायात्रा आगे बढ़ी।
आयोजन समिति के अध्यक्ष रोहित जायसवाल ने बताया कि तिलकोत्सव काशी की पुरातन धार्मिक परंपराओं से जुड़ा आयोजन है। श्रद्धालुओं ने पूरे उत्साह के साथ इसमें भाग लिया और परंपरागत रूप से तिलक की सामग्री को लेकर शोभायात्रा में हिस्सा लिया।
101 थाल में सजी तिलक की सामग्री
शोभायात्रा में कुल 101 थालों में तिलक की सामग्री सजाई गई थी। इनमें विभिन्न प्रकार के फल, नैवेद्य, वस्त्र एवं आभूषण, फूलों की मालाएं, दही, खोवे से तैयार मछली, कारन, बनारसी पान और ताम्बूल समेत अनेक पारंपरिक सामग्रियां शामिल थीं।
धार्मिक ध्वजों के साथ निकली यात्रा में बैंड-बाजे और डमरू दल ने माहौल को और भक्तिमय बना दिया। डीजे पर बज रहे भक्ति गीतों के बीच युवा और श्रद्धालु उत्साह से झूमते रहे। कई स्थानों पर स्थानीय लोगों ने शोभायात्रा का स्वागत भी किया।
इन इलाकों से होकर गुजरी यात्रा
लाट भैरव मंदिर से शुरू हुई शोभायात्रा जलालीपुरा, तेलियाना, हनुमान फाटक, बलुआबीर, अंबियामंडी, कतुआपुरा और जतनबर होते हुए भैरवनाथ चौराहे पर पहुंची। इसके बाद शोभायात्रा विश्वेश्वरगंज सब्जी मंडी स्थित माता शीतला मंदिर पहुंची।
विश्वेश्वरगंज पहुंचने पर आयोजन से जुड़े पदाधिकारियों और श्रद्धालुओं ने तिलक लेकर पहुंचे भक्तों का स्वागत किया। समिति के उपाध्यक्ष बसंत सिंह राठौर ने तिलकहरुओं का आलिंगन कर उनका अभिनंदन किया।
वैदिक मंत्रोच्चार के बीच चढ़ाया गया तिलक
विश्वेश्वरगंज मंडी स्थित माता शीतला मंदिर परिसर में स्थापित लाट भैरव के रजत मुखौटे पर विधि-विधान से तिलक चढ़ाया गया। मंदिर परिसर में धार्मिक अनुष्ठान के दौरान वैदिक मंत्रोच्चार से वातावरण भक्तिमय हो उठा।
आचार्य रविंद्र त्रिपाठी के आचार्यत्व में आयोजित पूजन के दौरान समिति के अध्यक्ष रोहित जायसवाल ने बाबा लाट भैरव को तिलक अर्पित किया। इसके बाद भैरवाष्टक और भैरव स्तुति का पाठ हुआ। धार्मिक अनुष्ठान संपन्न होने के बाद श्रद्धालुओं ने बाबा के दर्शन किए और सुख-समृद्धि की कामना की।
जयकारों से गूंज उठा विश्वेश्वरगंज
तिलक समारोह के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु माता शीतला मंदिर परिसर में मौजूद रहे। बाबा लाट भैरव के जयकारों से पूरा क्षेत्र गुंजायमान हो उठा। श्रद्धालुओं ने हाथ जोड़कर बाबा के दर्शन किए और धार्मिक आयोजन का हिस्सा बनने को अपने लिए सौभाग्य माना।
काशी की पारंपरिक धार्मिक संस्कृति से जुड़े इस तिलकोत्सव में लोक आस्था, परंपरा और उत्सव का अनूठा संगम देखने को मिला। बारिश के बीच निकली शोभायात्रा ने आयोजन में श्रद्धालुओं के उत्साह को और खास बना दिया।
