वाराणसी (रणभेरी): कमिश्नरेट वाराणसी की साइबर क्राइम थाना पुलिस ने ऑनलाइन बेटिंग और सट्टेबाजी से जुड़े एक संगठित गिरोह का पर्दाफाश करते हुए दो लोगों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपियों के पास से 9 एंड्रॉयड मोबाइल फोन, 12 सिम कार्ड और एक एटीएम कार्ड जब्त किया है। बरामद उपकरणों से ऑनलाइन सट्टेबाजी से जुड़े कई डिजिटल सबूत मिले हैं।
जानकारी के मुताबिक, साइबर अपराधों पर चल रहे विशेष अभियान के तहत 24 जून 2026 को एक संदिग्ध मोबाइल नंबर की जांच की गई थी, जो ‘प्रतिविम्ब पोर्टल’ पर चिन्हित किया गया था। जांच में सामने आया कि एक मामले में इंस्टाग्राम आईडी को हैक कर क्यूआर कोड के जरिए धनराशि ट्रांसफर कराई गई थी।

तकनीकी जांच और इलेक्ट्रॉनिक निगरानी के आधार पर यह स्पष्ट हुआ कि उक्त मोबाइल नंबर का संबंध ऑनलाइन सट्टेबाजी गतिविधियों से जुड़ा हुआ है। इसके बाद साइबर क्राइम टीम ने मिली सूचना के आधार पर दास नगर कॉलोनी, जलगंज स्थित एक किराए के मकान पर छापा मारा, जहां से दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तार किए गए व्यक्तियों की पहचान कानपुर नगर निवासी दीपक सिंह (गोविंद नगर) और नवनीत सिंह (बर्रा क्षेत्र) के रूप में हुई है।
पुलिस द्वारा जब्त मोबाइल फोन और अन्य उपकरणों की जांच में कई महत्वपूर्ण डिजिटल सबूत सामने आए हैं। इनमें विभिन्न बैंक खातों से जुड़े क्यूआर कोड, बेटिंग प्लेटफॉर्म के डैशबोर्ड, यूजर आईडी, भुगतान से संबंधित रिकॉर्ड और प्रचार सामग्री शामिल है।

पूछताछ के दौरान आरोपियों ने स्वीकार किया कि वे अलग-अलग ऑनलाइन बेटिंग वेबसाइटों के लिए यूजर्स को जोड़ने का काम करते थे। इसके लिए उन्हें आईडी और पासवर्ड उपलब्ध कराए जाते थे, जिनके जरिए जमा और निकासी की पूरी प्रक्रिया संचालित होती थी।
जांच में यह भी सामने आया कि इस नेटवर्क में फर्जी सिम कार्ड और दूसरों के नाम पर खोले गए बैंक खातों (म्यूल अकाउंट) का इस्तेमाल किया जाता था ताकि पहचान छिपाई जा सके। आरोपी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म जैसे इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप के माध्यम से आकर्षक ऑफर और डिजिटल पोस्ट भेजकर लोगों को सट्टेबाजी में शामिल होने के लिए प्रेरित करते थे।

इस पूरे मामले में पुलिस ने संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है। साथ ही, गिरोह से जुड़े अन्य सदस्यों प्रवीन उर्फ अक्षय और दिलावर की तलाश भी जारी है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, बरामद इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से मिले डेटा के आधार पर पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच की जा रही है, जिससे इस अवैध ऑनलाइन सट्टेबाजी रैकेट के और भी तार खुलने की संभावना है।
