94 वर्षों से चली आ रही परम्परा का भव्य निर्वहन, हजारों श्रद्धालुओं के साथ निकली ऐतिहासिक जलाभिषेक शोभायात्रा

94 वर्षों से चली आ रही परम्परा का भव्य निर्वहन, हजारों श्रद्धालुओं के साथ निकली ऐतिहासिक जलाभिषेक शोभायात्रा

वाराणसी (रणभेरी): श्रावण मास के पहले सोमवार पर चंद्रवंशी गोप सेवा समिति के तत्वावधान में 94 वर्षों से निरंतर चली आ रही ऐतिहासिक एवं पारंपरिक जलाभिषेक शोभायात्रा इस वर्ष भी पूरे धार्मिक उत्साह, अनुशासन और भक्ति भाव के साथ संपन्न हुई। समिति के अध्यक्ष एवं व्यवस्थापक श्री लालजी चंद्रवंशी (यादव) के नेतृत्व में निकली इस शोभायात्रा में हजारों यादव समाज के श्रद्धालुओं ने भाग लेकर भगवान शिव के प्रति अपनी अटूट आस्था प्रकट की।

प्रातःकाल निर्धारित समय पर शोभायात्रा का शुभारंभ श्री गौरी-केदारेश्वर महादेव मंदिर में विधि-विधान से जलाभिषेक एवं पूजन-अर्चन के साथ हुआ। इसके बाद श्रद्धालुओं का विशाल समूह पारंपरिक मार्ग से आगे बढ़ते हुए क्रमशः श्री तिलभाण्डेश्वर महादेव, माता शीतला मंदिर, श्री अहिल्येश्वर महादेव, श्री आनन्देश्वर महादेव, श्री ढुण्डीराज गणेश, श्री काशी विश्वनाथ धाम, महामृत्युंजय महादेव, त्रिलोचन महादेव, ओंकारेश्वर महादेव तथा अंत में लाट भैरव मंदिर पहुंचा, जहां अंतिम जलाभिषेक एवं पूजन के साथ शोभायात्रा का समापन हुआ।

94 वर्षों से चली आ रही परम्परा का भव्य निर्वहन, हजारों श्रद्धालुओं के साथ निकली ऐतिहासिक जलाभिषेक शोभायात्रा

पूरे मार्ग में “हर-हर महादेव” और “बम-बम भोले” के जयघोष से वातावरण शिवमय बना रहा। श्रद्धालुओं के हाथों में पारंपरिक कजरौटे, नक्काशीदार गगरियां और जलपात्र श्रद्धा के साथ-साथ संस्कृति की जीवंत पहचान बनकर आकर्षण का केंद्र रहे। डमरू और नगाड़ों की गूंज से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा तथा रास्ते भर श्रद्धालु शिवभक्ति में लीन दिखाई दिए।

शोभायात्रा में बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी आयु वर्ग के लोगों की उल्लेखनीय भागीदारी रही। कई छोटे बच्चे भगवान श्रीकृष्ण की वेशभूषा में आकर्षण का केंद्र बने, जबकि वरिष्ठ श्रद्धालुओं की उपस्थिति ने दशकों पुरानी इस परंपरा की निरंतरता को सशक्त रूप से प्रदर्शित किया। पारंपरिक साफा, धोती, कुर्ता एवं यादव समाज की सांस्कृतिक पहचान से जुड़े परिधान शोभायात्रा की गरिमा को और अधिक बढ़ा रहे थे। कुछ श्रद्धालु भगवान भोलेनाथ का स्वरूप धारण कर श्रद्धालुओं में भक्ति और उत्साह का संचार करते नजर आए।

वाराणसी के प्रसिद्ध श्रावणी मेलों में शामिल इस ऐतिहासिक जलाभिषेक यात्रा के दौरान अनुशासन विशेष रूप से देखने को मिला। समिति के अध्यक्ष श्री लालजी चंद्रवंशी ने संपूर्ण यात्रा का सफल संचालन किया, जबकि दुर्गा सरदार ने पारंपरिक ध्वज के साथ श्रद्धालुओं के समूह का नेतृत्व कर यात्रा को व्यवस्थित रूप से आगे बढ़ाया।

विश्व शांति, समाज की सुख-समृद्धि और लोककल्याण की भावना को समर्पित इस धार्मिक आयोजन के दौरान मार्ग में अनेक स्थानों पर समाजसेवियों एवं श्रद्धालुओं द्वारा फलाहार और जलपान की व्यवस्था की गई। जगह-जगह शोभायात्रा का पुष्पवर्षा कर स्वागत किया गया तथा पारंपरिक ध्वज की पूजा एवं आरती उतारकर श्रद्धालुओं ने अपनी धार्मिक आस्था व्यक्त की।

94 वर्षों से चली आ रही परम्परा का भव्य निर्वहन, हजारों श्रद्धालुओं के साथ निकली ऐतिहासिक जलाभिषेक शोभायात्रा

लाट भैरव मंदिर परिसर में समिति के सदस्य विनोद पहलवान (गोदौलिया) द्वारा श्रद्धालुओं के लिए विशेष फलाहार की व्यवस्था की गई। मैदागिन क्षेत्र में स्वर्गीय गोपाल दास बाबा की स्मृति में ध्वज पूजन के साथ श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद एवं फलाहार वितरित किया गया। वहीं महामृत्युंजय महादेव स्थित हीरा बाबा मंदिर परिसर में हेमंत यादव, रवि यादव एवं उनके सहयोगियों ने भक्तों के लिए जलपान एवं फलाहार की व्यवस्था संभाली।

दूध कटरा क्षेत्र में पहलवान भैयाल यादव एवं उनकी टीम ने श्रद्धालुओं का पारंपरिक साफा बांधकर स्वागत किया तथा सभी को लस्सी का वितरण किया। इसी प्रकार त्रिलोचन महादेव मंदिर परिसर में अनिल सरदार, गोलू सरदार, महेश यादव तथा उनके सहयोगियों ने श्रद्धालुओं के बीच फलाहार वितरित कर सेवा कार्य में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

94 वर्षों से चली आ रही परम्परा का भव्य निर्वहन, हजारों श्रद्धालुओं के साथ निकली ऐतिहासिक जलाभिषेक शोभायात्रा

यात्रा के अंतिम पड़ाव लाट भैरव मंदिर पहुंचने पर समिति के अध्यक्ष श्री लालजी चंद्रवंशी ने आयोजन को सफल बनाने में सहयोग देने वाले सभी पदाधिकारियों, यादव समाज के श्रद्धालुओं, प्रशासनिक अधिकारियों, पुलिस बल तथा पूरे आयोजन की कवरेज करने वाले पत्रकारों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि समाज की यह ऐतिहासिक परंपरा आने वाली पीढ़ियों तक इसी श्रद्धा और भव्यता के साथ निरंतर चलती रहे, यही समिति का संकल्प है।

इस अवसर पर विष्णु यादव, मनोज यादव, आयुष्मान चंद्रवंशी, प्रभाकर यादव, विनोद पहलवान सहित समिति के अनेक पदाधिकारी एवं हजारों की संख्या में यादव समाज के लोग उपस्थित रहे। पूरे आयोजन में धार्मिक आस्था, सामाजिक एकता और सांस्कृतिक विरासत का अद्भुत संगम देखने को मिला, जिसने एक बार फिर वाराणसी की प्राचीन धार्मिक परंपराओं को जीवंत कर दिया।

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