- आंधी में ढहा दशक पुराना ढांचा, दीपावली और डाला छठ से पहले मरम्मत की मांग तेज
- प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की गुहार, घाटों पर मिट्टी और गाद का अंबार
- श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा पर उठे सवाल
- बिजली-पानी के साथ सफाई और मरम्मत भी बने प्राथमिकता
वाराणसी (रणभेरी): धर्मनगरी काशी में त्योहारों की तैयारियों को लेकर प्रशासनिक दावों के बीच घाटों और आसपास की व्यवस्थाओं की बदहाली पर सवाल उठने लगे हैं। हालिया आंधी-तूफान ने करीब एक दशक पुराने स्थानीय ढांचे को धराशायी कर दिया, लेकिन अब तक उसकी मरम्मत को लेकर स्थानीय नागरिकों में असंतोष है। दीपावली और डाला छठ जैसे बड़े पर्व सिर पर हैं, ऐसे में क्षतिग्रस्त ढांचे की मरम्मत के साथ घाटों की सफाई को लेकर भी लोगों की चिंता बढ़ गई है।
नागरिकों का कहना है कि जब त्योहारों पर घाटों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़नी है तो बुनियादी व्यवस्थाओं की अनदेखी क्यों की जा रही है ? स्थानीय निवासी शिव कुमार के मुताबिक, कुछ दिन पहले चक्रवाती मौसम के प्रभाव के दौरान रात में आई तेज आंधी ने पुराने ढांचे को संभलने का मौका नहीं दिया। तेज हवाओं के दबाव से ढांचा क्षतिग्रस्त होकर गिर पड़ा। करीब दस वर्ष पुराने इस ढांचे की स्थिति पहले से ही जर्जर थी और लंबे समय से इसकी मरम्मत की जरूरत महसूस की जा रही थी। आंधी ने इसकी कमजोर हालत उजागर कर दी। अब स्थानीय लोगों को आशंका है कि समय रहते मरम्मत नहीं हुई तो त्योहारों के दौरान लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

त्योहारों से पहले व्यवस्था दुरुस्त करने की मांग
दीपावली और डाला छठ के दौरान गंगा घाटों पर श्रद्धालुओं की आवाजाही कई गुना बढ़ जाती है। छठ व्रती महिलाओं और उनके परिजनों की बड़ी संख्या घाटों पर पहुंचती है। ऐसे में क्षतिग्रस्त ढांचे को यूं ही छोड़ना व्यवस्था पर सवाल खड़ा कर रहा है। स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि मरम्मत कार्य को तत्काल प्राथमिकता दी जाए। केवल निरीक्षण और आश्वासन से काम नहीं चलेगा, बल्कि मौके पर काम शुरू कराकर समय से पूरा कराया जाए।

घाटों पर मिट्टी-गाद, सफाई के दावों की परीक्षा
घाटों की बदहाली भी स्थानीय लोगों के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। कई घाटों पर मिट्टी और गाद जमा होने से सफाई की जरूरत है। त्योहारों के दौरान इन्हीं घाटों पर हजारों श्रद्धालुओं का जमावड़ा होगा। ऐसे में गाद और मिट्टी की अनदेखी श्रद्धालुओं की सुविधा के साथ सुरक्षा के लिहाज से भी गंभीर सवाल खड़े करती है। नागरिकों का कहना है कि घाटों की सफाई केवल त्योहारों के दिन दिखावे तक सीमित न रहे, बल्कि पहले से व्यापक अभियान चलाया जाए।
सिर्फ बिजली-पानी नहीं, घाटों की बदहाली भी दूर हो
स्थानीय लोगों ने कहा कि त्योहारों पर बिजली और पानी की व्यवस्था जरूरी है, लेकिन इसके साथ सफाई, क्षतिग्रस्त ढांचों की मरम्मत और घाटों को सुरक्षित बनाने पर भी बराबर ध्यान देना होगा। काशी की पहचान उसके घाटों से है। ऐसे में पर्वों से पहले इनकी बदहाली दूर करना प्रशासन की प्राथमिकता होनी चाहिए। नागरिकों ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि त्योहार बीतने के बाद कार्रवाई करने का कोई औचित्य नहीं होगा। प्रशासन अभी जागे और समय रहते व्यवस्थाएं दुरुस्त कराए, ताकि श्रद्धालुओं को अव्यवस्थाओं के बीच पर्व मनाने को मजबूर न होना पड़े।
