वाराणसी (रणभेरी): वाराणसी रेलवे स्टेशन पर सोमवार रात जीआरपी ने वन्यजीव तस्करी के खिलाफ कार्रवाई करते हुए कुंभ एक्सप्रेस के जनरल कोच से 24 कछुए बरामद किए। इनमें छह बड़े और 18 छोटे कछुए शामिल हैं। कछुओं को चार झोलों और बैग में भरकर ले जाया जा रहा था। मामले में पुलिस ने अमेठी जिले के जगदीशपुर क्षेत्र स्थित गांधीनगर निवासी मोनू कंजड़ को गिरफ्तार किया है। आरोपी के खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत कार्रवाई की गई है।
मुखबिर की सूचना पर संयुक्त टीम ने की कार्रवाई
जीआरपी थाना प्रभारी रजोल नागर के मुताबिक, पुलिस को सूचना मिली थी कि हावड़ा की ओर जा रही कुंभ एक्सप्रेस में कछुओं की तस्करी की जा रही है। इसके बाद जीआरपी, आरपीएफ और सीआईबी की टीम को अलर्ट किया गया। कार्रवाई के दौरान वन विभाग के अधिकारियों को भी शामिल किया गया।
ट्रेन के वाराणसी स्टेशन पहुंचने पर संयुक्त टीम ने आगे की ओर लगे जनरल कोच में तलाशी अभियान चलाया। इस दौरान चार बैग और झोले संदिग्ध हालत में मिले। तलाशी लेने पर उनके अंदर बड़ी संख्या में कछुए भरे हुए पाए गए। इसके बाद पुलिस ने कछुओं को कब्जे में लेकर आसपास मौजूद लोगों से पूछताछ शुरू की।

छह बड़े और 18 छोटे कछुए मिले
जांच के दौरान पुलिस को कुल 24 कछुए मिले। इनमें छह बड़े आकार के, जबकि 18 छोटे कछुए थे। बरामदगी के बाद वन विभाग की टीम को भी मौके पर बुलाया गया। बैगों के पास मिले संदिग्ध युवक से पूछताछ की गई, जिसके बाद उसकी पहचान मोनू कंजड़ के रूप में हुई। पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया।
अमेठी से पश्चिम बंगाल ले जाने की बात आई सामने
पुलिस के अनुसार, शुरुआती पूछताछ में आरोपी ने बताया कि वह कछुओं को अमेठी से लेकर आया था और उन्हें पश्चिम बंगाल पहुंचाने की योजना थी। अधिकारियों को आशंका है कि इस खेप को तस्करी के उद्देश्य से ले जाया जा रहा था। हालांकि, कछुओं की प्रजाति, तस्करी के नेटवर्क और इस धंधे में शामिल अन्य लोगों के संबंध में विस्तृत जांच की जानी बाकी है।

कछुओं की मांग और तस्करी के नेटवर्क की जांच
पुलिस के मुताबिक, कछुओं की तस्करी के पीछे उनके मांस और अन्य अवैध इस्तेमाल से जुड़ी मांग एक संभावित वजह हो सकती है। वन्यजीवों की अवैध खरीद-फरोख्त पर रोक लगाने के लिए मामले की जांच की जा रही है। बरामद कछुओं की प्रजाति और उनकी अनुमानित कीमत के बारे में आधिकारिक पुष्टि होना अभी बाकी है।
जीआरपी ने आरोपी के खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि कछुए कहां से जुटाए गए थे और इन्हें पश्चिम बंगाल में किसे सौंपा जाना था।
