(रणभेरी): लखनऊ एयरपोर्ट से सऊदी अरब के जेद्दा जा रही सऊदिया एयरलाइंस की एक अंतरराष्ट्रीय उड़ान को शुक्रवार को तकनीकी कारणों से बीच रास्ते से लौटाकर इमरजेंसी लैंडिंग करानी पड़ी। उड़ान भरने के कुछ समय बाद ही विमान के केबिन प्रेशर सिस्टम में गड़बड़ी सामने आई, जिससे यात्रियों को सांस लेने में परेशानी महसूस होने लगी।
सूत्रों के अनुसार, जब फ्लाइट मुंबई एयरस्पेस के पास पहुंची, उसी दौरान केबिन प्रेशर असंतुलित हो गया। हालात को भांपते हुए पायलट ने पहले मुंबई एयरपोर्ट पर आपात लैंडिंग की अनुमति मांगी, लेकिन वहां से मंजूरी नहीं मिल सकी। इसके बाद पायलट ने लखनऊ एयरपोर्ट से संपर्क किया, जहां से तत्काल इमरजेंसी लैंडिंग की अनुमति दे दी गई।
अनुमति मिलते ही विमान ने वापस लखनऊ का रुख किया और करीब 82 मिनट की उड़ान के बाद सुरक्षित लैंडिंग कर ली। विमान में कुल 275 यात्री, 4 पायलट और 6 केबिन क्रू सदस्य सवार थे। राहत की बात यह रही कि किसी यात्री को विमान से उतारने की जरूरत नहीं पड़ी।
तकनीकी जांच के बाद दोबारा रवाना
जानकारी के मुताबिक, सऊदिया एयरलाइंस की फ्लाइट संख्या SV-891 का निर्धारित प्रस्थान समय दोपहर 12:05 बजे था, हालांकि यह विमान 12:23 बजे उड़ान भर सका। दोपहर करीब 1:45 बजे विमान को वापस लाने का फैसला किया गया। इंजीनियरिंग टीम ने मौके पर तकनीकी खामी को दूर किया, जिसके बाद शाम 4:20 बजे विमान जेद्दा के लिए रवाना हुआ।
क्या होता है केबिन प्रेशर
केबिन प्रेशर विमान के भीतर बनाया जाने वाला नियंत्रित वायु दबाव होता है, जो ऊंचाई पर उड़ान के दौरान यात्रियों को सामान्य सांस लेने में मदद करता है। आमतौर पर 30 से 40 हजार फीट की ऊंचाई पर उड़ान के दौरान केबिन प्रेशर को 6 से 8 हजार फीट की ऊंचाई के बराबर बनाए रखा जाता है। इसमें गड़बड़ी होने पर ऑक्सीजन की कमी महसूस होने लगती है।
पहले भी सामने आ चुकी है सऊदिया एयरलाइंस की तकनीकी चूक
गौरतलब है कि 15 जुलाई 2025 को भी सऊदिया एयरलाइंस के एक विमान में लखनऊ एयरपोर्ट पर लैंडिंग के दौरान तकनीकी खराबी सामने आई थी। उस समय विमान के पहियों के पास से चिंगारी और धुआं निकलने लगा था। फ्लाइट SV-3112 में सवार 242 हज यात्रियों की जान उस वक्त खतरे में पड़ सकती थी, लेकिन पायलट की सतर्कता से बड़ा हादसा टल गया। सूत्रों के मुताबिक, लैंडिंग के दौरान विमान के बाएं पहिये में हाइड्रोलिक लीकेज हो गया था, जिससे अचानक चिंगारी और धुआं उठने लगा। यदि यही खराबी टेकऑफ के समय होती, तो गंभीर दुर्घटना की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता था।
