कहीं सिंहासन, कमल पुष्प तो कहीं वाणी वादन करती दिखेंगी वाग्देवी
प्रतिमाओं पर शिल्पकारों ने किया अभिनव प्रयोग, पूजा पंडालों में दिखेगी अलौकिक छठां
राधेश्याम कमल
वाराणसी (रणभेरी सं.)। वाग्देवी की प्रतिमाओं पर इस साल भी शिल्पकारों ने अभिनव प्रयोग किये है। शिल्पकारों ने वाग्देवी की प्रतिमाओं को एक नया लुक दिया है। हर साल की तरह इस साल भी पूजा पंडालों में लोगों के बीच वाग्देवी की प्रतिमाएं हर किसी को अपनी ओर आकृष्ट करेगी। इस बार वाग्देवी कहीं पर सिंहासन तो कहीं पर कमल पुष्प, कही बत्तख तो कहीं पर रथ पर विराजमान होकर वीणा वादन करती नजर आयेंगी।
शिल्पकारों की मानें तो इस साल उन लोगों ने वाग्देवी की प्रतिमाओं पर हर तरह से विविध प्रयोग किये है ताकि हर कोई वाग्देवी की ओर खींचता चला आये। शिल्पकारों के यहां सरस्वती की प्रतिमाएं बन कर तैयार है। प्रतिमाओं पर रंग रोगन कर दिया गया है। इसके साथ ही परिधान भी धारण कराये जा चुके हैं। वाग्देवी की इन प्रतिमाओं को देख कर हर कोई मां के समक्ष एक बार जरुर नतमस्तक हो जायेगा। खास यह कि इस बार एआई की मां सरस्वती की प्रतिमा पंडाल में दिखेगी। इसके अलावा 30 व 32 फुट की भी सबसे उंची वाग्देवी की प्रतिमा दिखेगी।
देवनाथपुरा स्थित विश्वनाथ मूर्ति कला केन्द्र में इस बार मां सरस्वती 40 प्रतिमाएं बन कर तैयार हैं। प्रतिमाओं पर रंग रोगन किया जा चुका है। साथ ही नये परिधान भी धारण कराये जा चुके हैं। कुछ प्रतिमाओं की आंखों को खींचने का कार्य चल रहा है। कारखाना के शिल्पकार सुनील पाल हैं। उनके पुत्र शिल्पकार सोमू पाल बताते हैं कि उनके यहां इस बार कुल 40 प्रतिमाएं बनी है। जो तकरीबन पूरी हो चुकी हैं। उनके यहां 8, 9,10,11 फुट की सरस्वती की प्रतिमा बनायी गई है।

इनमें प्रमुख रूप से बत्तख पर बैठ कर वीणा बजाती हुई, कमल पुष्प पर सितार के साथ विराजमान, रथ पर विराजमान 10 फुट की मां सरस्वती आदि कई प्रतिमाएं प्रमुख रूप से तैयार की गई है। वे बताते है कि 23 जनवरी को वसंत पंचमी मनायी जायेगी। इसके एक दिन पूर्व ही प्रतिमाओं का पंडालों में जाना शुरू हो जायेगा। प्रतिमाओं का निर्माण कार्य अक्टूबर के अंतिम सप्ताह में शुरू किया गया था। इसके निर्माण में शिल्पकार सुनील पाल, बापी, गोपाल आदि लगे रहे।
देवनाथपुरा के ही देवी मूर्ति भवन में इस बार 40 प्रतिमाएं तैयार की गई है। इसके संचालक निर्मल दादा हैं। उनके संचालन में यहां शिल्पकार बाबू,उत्तम दादा, शुभो, मंगल, सुरोजित, शंकर आदि तीन माह तक लग कर प्रतिमाओं का निर्माण किया है। उनके यहां सबसे बड़ी प्रतिमा सोनिया की 12 फुट की है। इसके अलावा आठ भूजी सिंहासन पर वीणा बजाती हुई 10 फुट की प्रतिमा है। इनके अलावा 8,9,10,10,12 फुट की प्रतिमाएं तैयार की गई है।
खोजवां के शिल्पकार अभिजीत विश्वास के कारखाने में इस बार 120 वाग्देवी की प्रतिमाएं तैयार की गई है। इस बार उन्होंने वाग्देवी की प्रतिमा पर एआई तकनीक का अभिनव प्रयोग किया है। एआई तकनीक से वाग्देवी की फोटो बना कर फिर ढांचे पर रेखाचित्र तैयार किया गया है। यह प्रतिमा रेशम कटरा के पूजा पंडाल में स्थापित की जायेगी। इसी तरह चेतगंज के दलहट्टा में सबसे बड़ी मां सरस्वती की प्रतिमा भारत की रानी के रूप में सिंहासन पर विराजमान होंगी।
