- –पिछले चार साल में काशी में चार करोड़ लोग आये
- –काशी विश्वनाथ धाम, बाबा कालभैरव, गंगा आरती ने पर्यटकों की संख्या कई गुना बढ़ायी
- –आस्था ने काशी को वैश्विक पर्यटन केन्द्र बनाया लेकिन भीड़ के आगे व्यवस्था हुई बौनी
- –पर्यटकों की भीड़ के आगे सबसे ज्यादा आम नागरिक हैं परेशान-रोजमर्रा की जिंदगी में निकलना भी बन चुका है संघर्ष
राधेश्याम
वाराणसी (रणभेरी)। शिव की नगरी काशी में ये बेलगाम भीड़ है कि मानती ही नहीं। इस शहर में भीड़ का दबाव लगातार बढ़ता ही जा रहा है। खास बात तो यह है कि इस बेलगाम भीड़ को नियंत्रित करना एक दुरुह कार्य हो गया है। अब इस नगरी की भीड़ को संभालना प्रशासन के लिए कठिन कार्य हो गया है। एक आंकड़े के मुताबिक पिछले चार साल में काशी नगरी में चार करोड़ के आसपास पर्यटक एवं तीर्थयात्री आये। इनमें विदेशी पर्यटक भी शामिल हैं। इस आंकड़े को देखा जाया तो हर साल इस नगरी में एक करोड़ लोग पहुंच रहे हैं। पिछले चार दिनों में काशी विश्वनाथ मंदिर में तकरीबन 15 लाख श्रद्धालुओं ने बाबा दरबार में मत्था टेका। आंकड़ों के मुताबिक गत 24 जनवरी को तकरीबन 3.35 लाख, 25 जनवरी को 4.50 लाख जबकि 26 जनवरी गणतंत्र दिवस को 5.50 लाख श्रद्धालुओं ने बाबा दरबार में मत्था टेक कर अपनी हाजिरी लगायी।

यह सिलसिला सिर्फ एक दिन का नहीं है बल्कि रोजाना का है। बनारस में भीड़ बढने के पीछे वजह यह है कि भौतिक जीवन के उलझन को दूर करने वाली काशी का अध्यात्म पर्यटकों को सात समंदर पार से भी यहां पर खींच कर ला रहा है। काशी की फकीरी में परदेशी सैलानियों का मन खूब भा रहा है। इस अल्हड़ काशी में सिर्फ परदेशी सैलानी ही नहीं बल्कि देश भर से न जाने कितने श्रद्धालु काशी में गंगा में डुबकी, गंगा घाट, गंगा आरती , कालभैरव व बाब विश्वनाथ का दर्शन करने की लालसा से यहां तक खींचे चले आ रहे हैं। फकीरी, अध्यात्म और गंगा की आस्था ने काशी को वैश्विक पर्यटन केन्द्र तो बना दिया लेकिन सुविधाएं एवं व्यवस्था भीड़ के आगे एकदम बौनी साबित हो रही है। काशी में गंगा घाट के अलावा विश्वनाथ धाम के अलावा सारनाथ जैसे पर्यटक स्थल लोगों के लिए आकर्षण का केन्द्र तो है ही लेकिन अब तो गंगा तट पर होने वाली सायंकालीन गंगा आरती ने सैलानियों के साथ ही देशभर के लोगों को अपनी ओर आकर्षित किया है। इतना ही नहीं पर्यटकों को बनारस की रहस्यमयी गलियों ने अपनी ओर आकृष्ट किया है। यही नहीं यहां पर स्थापित योग साधना केन्द्र एव अध्यात्म के गूढ़ रहस्यों को भौतिक शैली में उद्घाटित करने वाले अत्याधुनिक शैली ने भी पर्यटकों एवं श्रद्धालुओं को हमेशा आकर्षित किया है। यहीं वजह है कि काशी में दिनोंदिन लोगों की भीड़ बढ़ती जा रही है। काशी एक एसी नगरी है जहां पर एक पर्व के खत्म होते ही दूसरे पर्व को मनाने के लिए तैयारियां शुरू हो जाती है। यहां पर सात दिनों में नौ त्यौहार होते हैं। कहावत है कि यहां पर सात वार और त्यौहार हैं। बनारस में लोग सात दिनों में नौ त्यौहार मनाते हैं। पिछले दिनों नये साल की शुरुआत से बनारस में जो भीड़ बढ़नी शुरू हुई कि आज तक लगातार बनी हुई है। इस दौरान कई त्यौहार भी पड़े। गंगा स्नान को लेकर कई पर्व भी आये।

अब तो काशी के देवालयों में भीड़ कई गुना बढ़ गई है। जब से यहां विश्वनाथ कॉरिडोर बनाया गया तब से श्रद्धालुओं की लगातार भीड़ बढ़ती ही जा रही है। आंकड़ां की मानें तो यहां पर रोजाना लाखों श्रद्धालु दर्शन एवं गंगा स्नान करने आ रहे हैं। इस शहर को रोजाना लाखों पर्यटकों के अलावा स्थानीय लोगों का भी दबाव झेलना पड़ रहा है। यहां पर शनिवार, रविवार, सोमवार, मंगलवार के दिन विश्वनाथ धाम के अलावा काल•ौरव आदि देवालयों में लोगों की भीड़ बढ़ जाती है। पुजारियों की मानें तो जो लोग काशी विश्वनाथ का दर्शन करते हैं वह कालभैरव का दर्शन पूजन जरुर करते हैं। ऐसी मान्यता है कि विश्वनथ मंदिर में दर्शन करने के बाद जो लोग कालभैरव बाबा का दर्शन नहीं करते हैं उसकी पूजा अधूरी मानी जाती है। यही वजह है कि लोग विश्वनाथ मंदिर में बाबा का दर्शन करने के बाद कालभीरव बाबा का दर्शन करने के लिए कालभैरव तरबार अवश्य पहुंचते हैं। आज कालभैरव मंदिर की स्थिति यह है कि रोजाना के अलावा हर रविवार व मंगलवार को श्रद्धालुओं की लाइन मंदिर से लेकर गलियों में कई किमी तक लगी रहती है। कालभैरव जाने वाले मार्ग गोलघर से लेकर कालभैरव चौराहा-विशेश्शवरगंज से भैरोनाथ चौराहा हमेशा लोगों की भीड़ से भरा रहता है। इसके चलते स्थानीय लोगों को आने-जाने में भारी फजीहत का सामना करना पड़ता है। बनारस में भीड़ बढ़ने के पीछे काशी में होने वाली दशाश्वमेधघाट की गंगा आरती है। रोजाना शाम को होने वाली गंगा आरती को देखने के लिए दशाश्वमेधघाट, प्रयागघाट, शीतला घाट, डा. राजेन्द्र प्रसाद घाट पर भारी भीड़ उमड़ती है। भारी भीड़ के चलते गंगा आरती के एक घंटा पूर्व ही दशाश्वमेधघाट जाने वाले मार्ग पर यातायात प्रतिबंधित कर दिया जाता है। इसका खमियाजा स्थानीय नागरिकों व दुकानदारों को भुगतना पड़ता है। रोजाना शाम 5 बजे से लेकर रात्रि 8 बजे तक गंगा आरती देखने के लिए सैलाब उमड़ता है। अब तो दशाश्वमेधघाट के अलावा अस्सी, पंचगंगाघाट, बालाजी घाट व गायघाट व नमोघाट पर गंगा आरती होने लगी है।
