वाराणसी (रणभेरी): वाराणसी के विकासखंड काशी विद्यापीठ के ग्राम भिटी में वर्षों से जलभराव और गंदगी की समस्या ग्रामीणों के लिए गंभीर परेशानी का कारण बनी हुई है। गांव की गलियों और मुख्य मार्ग पर जमा गंदा पानी लोगों की दैनिक दिनचर्या को प्रभावित कर रहा है। विद्यालय जाने वाले बच्चों, महिलाओं, बुजुर्गों और राहगीरों को हर दिन जलभराव और कीचड़ के बीच आवागमन करना पड़ता है। मच्छरों के बढ़ते प्रकोप और दुर्गंध के कारण ग्रामीणों में संक्रामक बीमारियों का भी भय बना हुआ है।
ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायत भवन, प्राथमिक विद्यालय एवं शीतला माता मंदिर के समीप स्थित ग्राम समाज (बंजर) भूमि पर हुए कथित अतिक्रमण के कारण गांव का वर्षों पुराना सार्वजनिक रास्ता और प्राकृतिक जल निकास अवरुद्ध हो गया है। उनका कहना है कि इसी वजह से बरसात ही नहीं, सामान्य दिनों में भी पानी की निकासी नहीं हो पाती और पूरे क्षेत्र में जलभराव बना रहता है।

ग्रामीणों के अनुसार शीतला माता मंदिर तक पहुंचना भी कठिन हो गया है। जलभराव और कीचड़ के कारण श्रद्धालुओं को मंदिर जाने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, जिससे धार्मिक गतिविधियां भी प्रभावित हो रही हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि इस समस्या को लेकर कई बार प्रशासन से शिकायत की गई। मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 और जनसुनवाई पोर्टल पर भी शिकायतें दर्ज कराई गईं। शिकायतों के बाद अधिकारियों ने मौके का निरीक्षण और भूमि की पैमाइश भी कराई, लेकिन ग्रामीणों का आरोप है कि आज तक समस्या का समाधान नहीं हो सका।

ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि पूर्व में हुई पैमाइश और वर्तमान पैमाइश में अंतर सामने आया है। उनका कहना है कि पहले संबंधित व्यक्ति की निजी भूमि कम दर्ज थी, जबकि वर्तमान पैमाइश में अधिक भूमि निजी दिखाई जा रही है। इसे लेकर ग्रामीण पूरे मामले की किसी वरिष्ठ अधिकारी से निष्पक्ष जांच कराने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि यदि जांच में किसी अधिकारी, कर्मचारी या अन्य व्यक्ति की भूमिका संदिग्ध पाई जाती है तो उसके विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि कई शिकायतों और निरीक्षणों के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं होने से लोगों में यह धारणा बन रही है कि प्रभावशाली व्यक्ति होने के कारण मामले में कार्रवाई प्रभावित हो रही है। हालांकि, इस संबंध में प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। ग्रामीणों ने प्रशासन से ग्राम समाज की भूमि को अतिक्रमणमुक्त कराकर पुराने सार्वजनिक रास्ते और जल निकासी व्यवस्था को बहाल करने की मांग की है।
