वाराणसी (रणभेरी): उत्तर प्रदेश के वाराणसी में आयोजित एक प्रेस वार्ता के दौरान कांग्रेस की राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ. रागिनी नायक ने राम मंदिर से जुड़े हालिया विवादों और ट्रस्ट की कार्यप्रणाली को लेकर केंद्र सरकार तथा संबंधित पक्षों पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि करोड़ों श्रद्धालुओं की धार्मिक आस्था सर्वोपरि है और यदि मंदिर के नाम पर प्राप्त दान या चढ़ावे के प्रबंधन में किसी भी स्तर पर अनियमितता हुई है, तो इसकी निष्पक्ष और पारदर्शी जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
प्रेस वार्ता की शुरुआत डॉ. नायक ने भगवान श्रीराम और माता सीता को नमन करते हुए की। उन्होंने रामचरितमानस की चौपाई “सिया राममय सब जग जानी, करहुँ प्रणाम जोरि जुग पानी” का उल्लेख करते हुए कहा कि भगवान राम करोड़ों लोगों की आस्था और विश्वास का प्रतीक हैं। ऐसे में उनके नाम पर किसी भी प्रकार की कथित गड़बड़ी या आर्थिक अनियमितता केवल वित्तीय मामला नहीं, बल्कि देशभर के श्रद्धालुओं की भावनाओं से जुड़ा विषय है।

कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि देश के विभिन्न राज्यों से गरीब, किसान, मजदूर, महिलाएं, बुजुर्ग और युवाओं ने अपनी श्रद्धा के अनुसार राम मंदिर निर्माण के लिए आर्थिक सहयोग किया था। कई लोगों ने अपनी वर्षों की बचत, गहने और मेहनत की कमाई दान में दी। उनका कहना था कि यदि इन निधियों या चढ़ावे के उपयोग को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं, तो सरकार और संबंधित ट्रस्ट की जिम्मेदारी है कि वे सभी तथ्यों को सार्वजनिक करें और लोगों का विश्वास बनाए रखें।
उन्होंने रामचरितमानस की दूसरी चौपाई “परहित सरिस धरम नहिं भाई, पर पीड़ा सम नहिं अधमाई” का हवाला देते हुए कहा कि दूसरों की आस्था और विश्वास को ठेस पहुंचाना सबसे बड़ा अधर्म माना गया है। उनके अनुसार यदि किसी ने धार्मिक भावनाओं का लाभ उठाकर आर्थिक अनियमितता की है, तो वह नैतिक और सामाजिक दृष्टि से गंभीर विषय है।
डॉ. नायक ने आरोप लगाया कि कांग्रेस लगातार विभिन्न मुद्दों पर पारदर्शिता की मांग करती रही है और राम मंदिर से जुड़े कथित वित्तीय मामलों में भी यही मांग दोहरा रही है। उन्होंने कहा कि यदि किसी कर्मचारी, ट्रस्ट के किसी पदाधिकारी या किसी अन्य जिम्मेदार व्यक्ति की भूमिका संदिग्ध पाई जाती है, तो उसे कानून के दायरे में लाया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी व्यक्ति को उसके पद या राजनीतिक प्रभाव के आधार पर जांच से बाहर नहीं रखा जाना चाहिए।

प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी और उससे जुड़े संगठनों ने वर्षों तक भगवान राम के नाम पर राजनीति की है। उनका कहना था कि अब जब मंदिर निर्माण और उससे जुड़े आर्थिक मामलों को लेकर प्रश्न उठ रहे हैं, तब सरकार की जिम्मेदारी बनती है कि वह पूरी पारदर्शिता के साथ जवाब दे और किसी भी तरह के संदेह को समाप्त करे।
कांग्रेस ने प्रेस वार्ता के माध्यम से मांग की कि यदि मंदिर के चढ़ावे, दान राशि या ट्रस्ट की वित्तीय व्यवस्था को लेकर किसी प्रकार की शिकायत सामने आई है, तो उसकी स्वतंत्र एजेंसी से निष्पक्ष जांच कराई जाए। पार्टी का कहना है कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े इस विषय में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना आवश्यक है।
फिलहाल इस मामले में संबंधित पक्षों की ओर से जो भी आधिकारिक प्रतिक्रिया या स्पष्टीकरण सामने आएगा, उसके बाद ही पूरे प्रकरण की स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी। यदि आरोपों की पुष्टि होती है तो जांच एजेंसियां आगे की कार्रवाई करेंगी, जबकि आरोप निराधार पाए जाने पर संबंधित पक्षों का पक्ष भी उतना ही महत्वपूर्ण माना जाएगा।
