वाराणसी (रणभेरी): जन शिकायतों के समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण निस्तारण को लेकर वाराणसी जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार ने आईजीआरएस पोर्टल पर प्राप्त शिकायतों की समीक्षा के दौरान ऐसे मामलों को गंभीरता से लिया, जिनमें बिना स्थलीय जांच, बिना शिकायतकर्ता से संपर्क और बिना तथ्यों का सत्यापन किए ही शिकायतों का निस्तारण कर दिया गया था। समीक्षा में अनियमितताएं सामने आने के बाद छह अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ विभिन्न प्रकार की विभागीय कार्रवाई शुरू की गई।
जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि शिकायतों के निस्तारण में किसी भी प्रकार की औपचारिकता या लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि प्रत्येक शिकायत का समाधान मौके पर जांच, संबंधित पक्षों से बातचीत और अभिलेखों के परीक्षण के बाद ही किया जाना चाहिए। भविष्य में ऐसी लापरवाही पाए जाने पर और भी कठोर कार्रवाई की जाएगी।
सरकारी भूमि विवाद में गलत रिपोर्ट, लेखपाल निलंबित
समीक्षा के दौरान राजातालाब तहसील क्षेत्र के सेवापुरी निवासी एक व्यक्ति द्वारा सरकारी भूमि पर अवैध कब्जे की शिकायत का मामला सामने आया। जांच में पाया गया कि संबंधित लेखपाल ने गलत भू-अभिलेख का उल्लेख करते हुए रिपोर्ट प्रस्तुत कर दी थी। मामले की पुनः जांच में त्रुटि सामने आने पर संबंधित लेखपाल के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई की संस्तुति की गई। इसके बाद उप जिलाधिकारी राजातालाब ने तत्काल प्रभाव से उसे निलंबित कर दिया और विस्तृत जांच के निर्देश दिए।
निवास प्रमाणपत्र मामले में बिना सत्यापन रिपोर्ट लगाने पर कार्रवाई
चिरईगांव विकासखंड के नवापुर (सथवा) क्षेत्र से जुड़े एक मामले में शिकायतकर्ता ने अपने परिवार के निवास प्रमाणपत्र गलत तरीके से निरस्त किए जाने की शिकायत दर्ज कराई थी। समीक्षा में सामने आया कि संबंधित लेखपाल ने आवश्यक अभिलेखों का परीक्षण किए बिना ही अपनी रिपोर्ट लगा दी थी। इस लापरवाही को गंभीर मानते हुए उसके विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई की संस्तुति की गई।
ग्राम पंचायत अधिकारी का वेतन रोका गया
हरहुआ क्षेत्र में ग्राम सभा से जुड़ी एक शिकायत में यह पाया गया कि संबंधित ग्राम पंचायत अधिकारी ने न तो मौके का निरीक्षण किया और न ही शिकायतकर्ता से संपर्क किया, फिर भी शिकायत का निस्तारण कर दिया। इस मामले में जिला पंचायत राज अधिकारी ने संबंधित कर्मचारी को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए जुलाई माह का वेतन रोकने के निर्देश दिए।
सीवर लाइन संबंधी शिकायतों में भी लापरवाही उजागर
फुलवरिया और सदर क्षेत्र में नई सीवर लाइन बिछाने की मांग से संबंधित दो शिकायतों की समीक्षा में भी अनियमितता सामने आई। संबंधित अधिकारियों ने शिकायतकर्ताओं से संपर्क किए बिना ही यह रिपोर्ट भेज दी कि विस्तृत परियोजना शासन को भेजी जा चुकी है और स्वीकृति मिलने के बाद कार्य कराया जाएगा। जांच में प्रक्रिया का पालन न करने की पुष्टि होने पर संबंधित अवर अभियंता को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया।
स्वास्थ्य केंद्र की शिकायत पर भी प्रशासन सख्त
सारनाथ स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से जुड़ी शिकायत में आरोप लगाया गया था कि कुछ चिकित्सकों और सुरक्षा गार्ड द्वारा मरीजों से धन की मांग की गई तथा उपचार में लापरवाही बरती गई। मामले की समीक्षा के बाद जिलाधिकारी ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी को निर्देश दिया कि सुरक्षा गार्ड को तत्काल निलंबित किया जाए तथा संबंधित चिकित्सकों से स्पष्टीकरण प्राप्त कर आवश्यक कार्रवाई की जाए।
बस यात्री की शिकायत बंद करने पर मांगा जवाब
एक अन्य प्रकरण में निजी बस में टिकट बुक होने के बावजूद यात्री को सीट उपलब्ध न कराए जाने की शिकायत बिना उचित जांच के बंद कर दी गई थी। जिलाधिकारी ने इसे गंभीर लापरवाही मानते हुए उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम के सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक से स्पष्टीकरण तलब किया है।
डीएम की स्पष्ट चेतावनी
जिलाधिकारी ने सभी विभागों के अधिकारियों को निर्देश दिया कि आईजीआरएस पोर्टल पर आने वाली प्रत्येक शिकायत का निस्तारण पूरी पारदर्शिता और जिम्मेदारी के साथ किया जाए। उन्होंने कहा कि केवल कागजी कार्रवाई पूरी करने के उद्देश्य से रिपोर्ट लगाना स्वीकार्य नहीं होगा। यदि भविष्य में किसी भी स्तर पर फर्जी या अधूरी रिपोर्ट प्रस्तुत करने की शिकायत मिली तो संबंधित अधिकारी या कर्मचारी के विरुद्ध कड़ी विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
