(रणभेरी): वित्त वर्ष 2025-26 (असेसमेंट ईयर 2026-27) के लिए आयकर रिटर्न (ITR) दाखिल करने की प्रक्रिया जारी है। समय सीमा के भीतर रिटर्न दाखिल करना जरूरी है, क्योंकि विलंब होने पर आय के अनुसार लेट फीस का भुगतान करना पड़ सकता है। आयकर विभाग ने ई-फाइलिंग पोर्टल को पहले की तुलना में अधिक सरल बनाया है, जिससे अधिकांश करदाता घर बैठे स्वयं अपना ITR भर सकते हैं।
समय पर रिटर्न दाखिल करना क्यों जरूरी
निर्धारित समय सीमा तक ITR दाखिल नहीं करने पर आयकर कानून के तहत विलंब शुल्क लगाया जा सकता है। यदि किसी व्यक्ति की कुल आय ₹5 लाख तक है, तो अधिकतम ₹1,000 तक की लेट फीस लग सकती है। वहीं ₹5 लाख से अधिक आय वाले करदाताओं को ₹5,000 तक का विलंब शुल्क देना पड़ सकता है। इसके अलावा रिफंड मिलने में देरी और अन्य प्रक्रियात्मक दिक्कतें भी सामने आ सकती हैं।
नई टैक्स व्यवस्था अब डिफॉल्ट विकल्प
असेसमेंट ईयर 2026-27 के लिए नई टैक्स व्यवस्था को डिफॉल्ट बनाया गया है। यानी यदि कोई करदाता अलग से पुरानी टैक्स व्यवस्था का विकल्प नहीं चुनता है, तो उसका रिटर्न स्वतः नई व्यवस्था के अनुसार प्रोसेस होगा। इसलिए रिटर्न दाखिल करने से पहले यह तय करना जरूरी है कि कौन-सी टैक्स व्यवस्था आपके लिए अधिक लाभदायक है।
नई टैक्स व्यवस्था में क्या है फायदा
नई टैक्स व्यवस्था के तहत सरकार ने टैक्स राहत का दायरा बढ़ाया है।
₹4 लाख तक की आय पर कोई टैक्स नहीं लगता।
यदि टैक्स योग्य आय ₹12 लाख तक है, तो धारा 87A के तहत ₹60,000 तक का टैक्स रिबेट उपलब्ध है, जिससे प्रभावी रूप से टैक्स शून्य हो सकता है।
वेतनभोगी कर्मचारियों को ₹75,000 का स्टैंडर्ड डिडक्शन भी मिलता है। ऐसे में ₹12.75 लाख तक की वार्षिक सैलरी वाले कई कर्मचारियों की टैक्स योग्य आय घटकर ₹12 लाख रह सकती है, जिससे उन्हें रिबेट का लाभ मिल सकता है।
पुरानी टैक्स व्यवस्था कब हो सकती है बेहतर
पुरानी टैक्स व्यवस्था में ₹2.5 लाख तक की आय कर-मुक्त रहती है। यदि टैक्स योग्य आय ₹5 लाख तक है, तो धारा 87A के तहत ₹12,500 तक की रिबेट मिलती है।
इस व्यवस्था की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें कई प्रकार की टैक्स छूट और कटौतियों का लाभ मिलता है। इनमें प्रमुख रूप से-
- धारा 80C के तहत निवेश पर छूट
- धारा 80D के तहत स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम पर छूट
- HRA सहित अन्य उपलब्ध कर लाभ
यदि किसी करदाता के पास पर्याप्त टैक्स बचत निवेश और कटौतियां हैं, तो पुरानी व्यवस्था उसके लिए अधिक फायदेमंद साबित हो सकती है।
घर बैठे ऐसे भरें ITR
आयकर विभाग की ई-फाइलिंग वेबसाइट पर लॉगिन करें। इसके लिए PAN को यूजर आईडी के रूप में इस्तेमाल करें और अपना पासवर्ड दर्ज करें।
इसके बाद E-File सेक्शन में जाकर Income Tax Returns और फिर File Income Tax Return विकल्प चुनें। असेसमेंट ईयर 2026-27 का चयन करें और ऑनलाइन फाइलिंग मोड अपनाएं।
यदि पहले से कोई अधूरा रिटर्न सेव है तो Resume Filing पर क्लिक करें, अन्यथा Start New Filing का विकल्प चुनें।
सही ITR फॉर्म चुनना जरूरी
यदि आपकी वार्षिक आय ₹50 लाख तक है और आय के स्रोत केवल वेतन, एक मकान तथा बैंक ब्याज हैं, तो सामान्यतः ITR-1 उपयुक्त रहता है।
यदि आपने शेयर बाजार, म्यूचुअल फंड, इंट्राडे ट्रेडिंग, F&O, कमोडिटी ट्रेडिंग या व्यवसाय से आय अर्जित की है, तो संबंधित नियमों के अनुसार ITR-3 जैसे उपयुक्त फॉर्म का चयन करना होगा।
टैक्स व्यवस्था का चयन कैसे करें
रिटर्न भरते समय सिस्टम नई टैक्स व्यवस्था से जुड़े विकल्प दिखाएगा।
- यदि नई व्यवस्था में बने रहना चाहते हैं तो “No” चुनें।
- यदि पुरानी टैक्स व्यवस्था अपनानी है तो “Yes” का चयन करें।
पहले से भरी जानकारी जरूर जांचें
आयकर विभाग की ओर से AIS और Form-16 के आधार पर कई जानकारियां पहले से उपलब्ध रहती हैं। रिटर्न जमा करने से पहले इन सभी विवरणों का सावधानीपूर्वक मिलान करें।
यदि अतिरिक्त टैक्स देय है तो नेट बैंकिंग, UPI या अन्य उपलब्ध माध्यम से भुगतान करें। यदि कोई टैक्स देय नहीं है या रिफंड बनता है, तो रिटर्न का प्रीव्यू देखने के बाद घोषणा (Declaration) स्वीकार कर सबमिट कर दें।
ई-वेरिफिकेशन करना न भूलें
सिर्फ ITR जमा करना पर्याप्त नहीं है। रिटर्न दाखिल करने के बाद निर्धारित अवधि के भीतर उसका सत्यापन करना भी अनिवार्य है। सबसे आसान तरीका आधार OTP या बैंक खाते के माध्यम से ऑनलाइन ई-वेरिफिकेशन करना है। यदि ऑनलाइन सत्यापन संभव नहीं है, तो ITR-V डाउनलोड कर हस्ताक्षर करें और निर्धारित समय सीमा के भीतर स्पीड पोस्ट से CPC, बेंगलुरु भेजें। समय पर सत्यापन नहीं होने पर रिटर्न अधूरा माना जा सकता है।
अलग-अलग आय को सही हेड में दिखाएं
मकान से किराये की आय
किराये से प्राप्त आय को “Income from House Property” के अंतर्गत दिखाना होता है। इस आय पर 30 प्रतिशत की स्टैंडर्ड कटौती का लाभ मिलता है। यदि उसी मकान पर होम लोन है, तो निर्धारित शर्तों के अनुसार ब्याज पर अतिरिक्त कर राहत भी उपलब्ध हो सकती है।
बचत खाते और फिक्स्ड डिपॉजिट से मिलने वाला ब्याज “Income from Other Sources” में दर्ज करना जरूरी है। यह जानकारी AIS में भी दिखाई देती है।
पुरानी टैक्स व्यवस्था में सामान्य करदाताओं को धारा 80TTA के तहत बचत खाते के ब्याज पर ₹10,000 तक की छूट मिल सकती है। वहीं वरिष्ठ नागरिक धारा 80TTB के तहत बचत खाते और FD के ब्याज पर कुल ₹50,000 तक की राहत प्राप्त कर सकते हैं।
शेयर और म्यूचुअल फंड
शेयर या म्यूचुअल फंड की खरीद-बिक्री का पूरा टैक्स कैलकुलेशन स्वतः नहीं होता। निवेशकों को अपने ब्रोकर द्वारा उपलब्ध कराए गए Capital Gains Statement के आधार पर लाभ या हानि का सही विवरण भरना चाहिए। इसके अलावा शेयरों से प्राप्त डिविडेंड को भी “Income from Other Sources” के अंतर्गत दिखाना आवश्यक है।
रिफंड अटकने की प्रमुख वजह
यदि ITR दाखिल करने के बाद भी रिफंड नहीं मिल रहा है, तो सबसे पहले यह सुनिश्चित करें कि आयकर पोर्टल पर आपका बैंक खाता Pre-validated है। साथ ही बैंक खाते में दर्ज नाम, PAN और पोर्टल पर उपलब्ध व्यक्तिगत विवरण पूरी तरह मेल खाने चाहिए। किसी भी प्रकार की असंगति होने पर रिफंड जारी होने के बावजूद भुगतान में देरी हो सकती है।
