काशी से शिक्षा क्षेत्र को बड़ी सौगात: शिक्षकों के लिए कैशलेस इलाज योजना शुरू, विद्यार्थियों को डीबीटी से मिली सहायता

काशी से शिक्षा क्षेत्र को बड़ी सौगात: शिक्षकों के लिए कैशलेस इलाज योजना शुरू, विद्यार्थियों को डीबीटी से मिली सहायता

वाराणसी (रणभेरी): उत्तर प्रदेश सरकार ने शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए बुधवार को वाराणसी में कई नई पहलों की शुरुआत की। पंडित दीनदयाल हस्तकला संकुल, बड़ा लालपुर में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शिक्षकों की स्वास्थ्य सुरक्षा, विद्यार्थियों के कल्याण तथा शिक्षा कर्मियों की सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी विभिन्न योजनाओं का शुभारंभ किया।

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने मुख्यमंत्री शिक्षक कैशलेस चिकित्सा योजना का औपचारिक शुभारंभ किया। इसके साथ ही प्रदेश के करीब 1.10 करोड़ विद्यार्थियों के अभिभावकों के बैंक खातों में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) के माध्यम से निर्धारित सहायता राशि भेजी गई। इस अवसर पर शिक्षा विभाग के लगभग 10 लाख शिक्षकों एवं संविदा कर्मियों के लिए सामाजिक सुरक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के साथ समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर भी किए गए। समारोह में राष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले स्वच्छ एवं हरित विद्यालयों के 12 प्रधानाचार्यों को सम्मानित किया गया।

काशी से शिक्षा क्षेत्र को बड़ी सौगात: शिक्षकों के लिए कैशलेस इलाज योजना शुरू, विद्यार्थियों को डीबीटी से मिली सहायता

इस कार्यक्रम में बेसिक शिक्षा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संदीप सिंह तथा माध्यमिक शिक्षा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) गुलाब देवी सहित शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी और बड़ी संख्या में शिक्षक उपस्थित रहे।

शिक्षकों और परिवारों को मिलेगा स्वास्थ्य सुरक्षा कवच

मुख्यमंत्री ने कहा कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए शिक्षकों का स्वस्थ रहना अत्यंत आवश्यक है। इसी उद्देश्य से शुरू की गई मुख्यमंत्री शिक्षक कैशलेस चिकित्सा योजना के तहत प्रदेश के लगभग 12 लाख शिक्षकों एवं उनके आश्रित परिवारों को प्रतिवर्ष पांच लाख रुपये तक की कैशलेस उपचार सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।

उन्होंने बताया कि योजना का लाभ केवल नियमित शिक्षकों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि शिक्षामित्रों, अनुदेशकों, रसोइयों तथा कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में कार्यरत कर्मचारियों को भी इसमें शामिल किया गया है। सरकार का उद्देश्य शिक्षा से जुड़े प्रत्येक पात्र कर्मचारी को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना है।

विद्यार्थियों के खातों में डीबीटी से पहुंची सहायता

समारोह में मुख्यमंत्री ने बटन दबाकर प्रदेश के लगभग 1.10 करोड़ विद्यार्थियों के अभिभावकों के बैंक खातों में डीबीटी के माध्यम से सहायता राशि हस्तांतरित की। उन्होंने कहा कि सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि विद्यार्थियों को आवश्यक शैक्षिक सामग्री, यूनिफॉर्म, जूते, मोजे, स्वेटर तथा अन्य सुविधाओं के लिए मिलने वाली आर्थिक सहायता सीधे लाभार्थियों तक पहुंचे, जिससे पारदर्शिता बनी रहे और किसी प्रकार की अनियमितता की संभावना समाप्त हो।

एसबीआई के साथ सामाजिक सुरक्षा समझौता

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार शिक्षकों और शिक्षा विभाग के कर्मचारियों की सामाजिक सुरक्षा को भी समान महत्व दे रही है। इसी क्रम में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के साथ हुए एमओयू के माध्यम से लगभग 10 लाख पात्र शिक्षकों एवं कर्मचारियों को विभिन्न सुरक्षा लाभ उपलब्ध कराए जाएंगे।

इस व्यवस्था के अंतर्गत ग्रुप टर्म इंश्योरेंस, व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा, स्थायी दिव्यांगता की स्थिति में आर्थिक सहायता तथा आकस्मिक परिस्थितियों में परिवार को वित्तीय सहयोग जैसी सुविधाएं प्रदान की जाएंगी। इसके अतिरिक्त बच्चों की शिक्षा और पुत्रियों के विवाह के लिए भी वित्तीय सुरक्षा का प्रावधान किया गया है।

विद्यालयों को स्वच्छ और संस्कारवान बनाने पर जोर

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि विद्यालय केवल शिक्षा देने का स्थान नहीं, बल्कि अनुशासन, स्वच्छता और संस्कार विकसित करने का भी केंद्र होना चाहिए। उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर चयनित स्वच्छ एवं हरित विद्यालयों के 12 प्रधानाचार्यों को सम्मानित करते हुए उनके प्रयासों की सराहना की।

उन्होंने शिक्षकों से अपील की कि वे अभिभावकों के साथ नियमित संवाद बनाए रखें ताकि सभी विद्यार्थी निर्धारित यूनिफॉर्म में विद्यालय आएं और उन्हें समय पर आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध हो सकें।

निपुण भारत अभियान को बताया राष्ट्र निर्माण की आधारशिला

मुख्यमंत्री ने कहा कि निपुण भारत अभियान के माध्यम से प्रारंभिक कक्षाओं के विद्यार्थियों में भाषा और गणित की मजबूत नींव तैयार की जा रही है। उनके अनुसार यह अभियान केवल एक सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि भविष्य के विकसित भारत के निर्माण का महत्वपूर्ण आधार है। उन्होंने कहा कि प्राथमिक स्तर पर गुणवत्तापूर्ण शिक्षा ही आगे की सफलता का मार्ग प्रशस्त करती है और इसमें शिक्षकों की भूमिका सबसे अहम है।

शिक्षा व्यवस्था में आए बदलावों का किया उल्लेख

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश में पिछले कुछ वर्षों के दौरान शिक्षा व्यवस्था में व्यापक परिवर्तन देखने को मिला है। उन्होंने बताया कि पहले बोर्ड परीक्षाओं के आयोजन और परिणाम घोषित होने में लंबा समय लगता था, जिससे विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित होती थी। अब परीक्षा प्रक्रिया समयबद्ध ढंग से पूरी की जा रही है और परिणाम भी निर्धारित अवधि में जारी किए जा रहे हैं।

काशी से शिक्षा क्षेत्र को बड़ी सौगात: शिक्षकों के लिए कैशलेस इलाज योजना शुरू, विद्यार्थियों को डीबीटी से मिली सहायता

उन्होंने परीक्षा प्रणाली को नकलमुक्त बनाने में शिक्षकों, प्रशासनिक अधिकारियों तथा शिक्षा विभाग के कर्मचारियों की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश की परीक्षा व्यवस्था आज देश के सामने एक सकारात्मक उदाहरण बन रही है।

नई शिक्षा नीति पर भी रखे विचार

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में लागू राष्ट्रीय शिक्षा नीति भारतीय संस्कृति, परंपरा और आधुनिक आवश्यकताओं के समन्वय पर आधारित है। उन्होंने कहा कि शिक्षा पर किया गया निवेश भविष्य की सबसे बड़ी पूंजी है और यही विकसित भारत की मजबूत नींव तैयार करेगा।

उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि पिछले नौ वर्षों में प्रदेश में शिक्षा, सुशासन और रोजगार के क्षेत्र में हुए सुधारों का लाभ युवाओं को मिल रहा है। सरकार का लक्ष्य पारदर्शी, गुणवत्तापूर्ण और परिणाम आधारित शिक्षा व्यवस्था स्थापित करना है, जिससे उत्तर प्रदेश के विद्यार्थी राष्ट्रीय एवं वैश्विक स्तर पर अपनी अलग पहचान बना सकें।

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