वाराणसी (रणभेरी): लखनऊ में हाल ही में हुए कोचिंग सेंटर अग्निकांड के बाद पूरे प्रदेश में सुरक्षा मानकों को लेकर सख्ती बढ़ा दी गई है। इसी क्रम में वाराणसी जिला प्रशासन और अग्निशमन विभाग पूरी तरह सतर्क हो गए हैं। शहर में संचालित विभिन्न कोचिंग संस्थानों की जांच के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है।
अभियान के दौरान दुर्गाकुंड क्षेत्र में स्थित कुछ प्रमुख कोचिंग सेंटरों पर भी प्रशासन की टीम ने औचक निरीक्षण किया। इनमें कई जगहों पर सुरक्षा मानकों में गंभीर खामियां सामने आने के बाद कार्रवाई की गई। इस कार्रवाई के बाद कोचिंग संचालकों में हड़कंप की स्थिति देखी गई।
शहर में हजारों छात्र, कोचिंग नेटवर्क व्यापक
वाराणसी को पूर्वी उत्तर प्रदेश और आसपास के राज्यों—बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल और मध्य प्रदेश—के छात्रों के लिए एक प्रमुख शैक्षणिक केंद्र माना जाता है। यहां प्रतियोगी परीक्षाओं के साथ-साथ हाईस्कूल और इंटरमीडिएट स्तर की पढ़ाई के लिए भी बड़ी संख्या में कोचिंग संस्थान संचालित होते हैं।
कबीर नगर, अर्दली बाजार, भोजूबीर समेत कई इलाकों में सैकड़ों कोचिंग सेंटर चल रहे हैं, जहां प्रतिदिन हजारों छात्र अध्ययन के लिए पहुंचते हैं।

निरीक्षण में सामने आईं गंभीर खामियां
प्रशासनिक जांच में कई कोचिंग सेंटरों में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर लापरवाही उजागर हुई। कुछ संस्थान दूसरी और तीसरी मंजिल पर संचालित पाए गए, जहां आने-जाने के लिए केवल एक ही संकरा रास्ता मौजूद था। कई स्थानों पर सीढ़ियों के पास एसी की बाहरी यूनिट और बिजली के तारों का जाल पाया गया, जिससे किसी भी आपात स्थिति में बाहर निकलना मुश्किल हो सकता है। फायर सेफ्टी के मानकों की स्थिति भी संतोषजनक नहीं पाई गई।
कुछ जगहों पर अग्निशमन यंत्र तो मौजूद थे, लेकिन उनकी संख्या और स्थिति पर्याप्त नहीं थी। वहीं कई संस्थानों में न तो पर्याप्त वाटर टैंक की व्यवस्था मिली और न ही फायर सेफ्टी सिस्टम पूरी तरह सक्रिय पाया गया।
कोचिंग संचालकों की प्रतिक्रिया
निरीक्षण के दौरान कई कोचिंग संचालकों ने अपनी जिम्मेदारी भवन मालिकों पर डालते हुए कहा कि वे किराए के परिसर में संचालन कर रहे हैं और संरचनात्मक बदलाव करना उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं है। हालांकि प्रशासनिक अधिकारियों ने इस तर्क को पर्याप्त नहीं माना और सुरक्षा मानकों के पालन को अनिवार्य बताया।

अन्य संस्थानों की स्थिति
जांच के दौरान कुछ संस्थानों में मिश्रित स्थिति भी सामने आई। एक स्थान पर पार्किंग क्षेत्र में अनियमित भंडारण और अव्यवस्था देखी गई, जबकि कहीं अग्निशमन उपकरण मौजूद तो थे लेकिन उनकी स्थिति पूरी तरह संतोषजनक नहीं थी। वहीं एक अन्य शैक्षणिक भवन में निकास व्यवस्था अपेक्षाकृत बेहतर पाई गई, लेकिन वहां भवन मानचित्र और स्वीकृति संबंधी दस्तावेजों में अनियमितता सामने आई।

प्रशासन और अग्निशमन विभाग का रुख
मुख्य अग्निशमन अधिकारी ने बताया कि जिले में सभी शैक्षणिक संस्थानों की चरणबद्ध जांच की जा रही है। जिन संस्थानों में नियमों का उल्लंघन पाया जाएगा, उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कई कोचिंग संस्थानों ने अब तक फायर विभाग से अनापत्ति प्रमाणपत्र (NOC) लेने के लिए आवेदन तक नहीं किया है, जो गंभीर लापरवाही है।

नियमों की अनदेखी पर सवाल
नियमों के अनुसार कोचिंग संस्थानों में अग्निशमन सुरक्षा के लिए पर्याप्त जल भंडारण, पंप सिस्टम, प्रत्येक कक्ष में फायर उपकरण और अलग-अलग प्रवेश-निकास द्वार होना अनिवार्य है। इसके साथ ही सीढ़ियों की न्यूनतम चौड़ाई और भवन स्वीकृति भी जरूरी शर्तों में शामिल है।
