गंगोत्री से गंगासागर तक योग का संदेश लेकर निकली यात्रा का वाराणसी में भव्य स्वागत

गंगोत्री से गंगासागर तक योग का संदेश लेकर निकली यात्रा का वाराणसी में भव्य स्वागत

वाराणसी (रणभेरी): अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 2026 के अवसर पर देशभर में योग के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से आयुष मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा संचालित “गंगोत्री से गंगासागर योग यात्रा” सोमवार को वाराणसी पहुंची। इस अवसर पर रविदास घाट पर एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें सैकड़ों की संख्या में योग साधकों, विद्यार्थियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं तथा आम नागरिकों ने सहभागिता करते हुए सामूहिक योगाभ्यास किया।

गंगा के किनारे आयोजित इस विशेष कार्यक्रम में योग, स्वास्थ्य, पर्यावरण संरक्षण तथा भारतीय संस्कृति के मूल्यों को जन-जन तक पहुंचाने का संदेश दिया गया। योग यात्रा के वाराणसी पड़ाव पर लोगों में विशेष उत्साह देखने को मिला। प्रतिभागियों ने योगाभ्यास के साथ-साथ स्वस्थ जीवनशैली अपनाने का संकल्प भी लिया।

उल्लेखनीय है कि यह विशेष योग यात्रा 13 जून को उत्तराखंड स्थित गंगोत्री धाम से प्रारंभ हुई थी और 20 जून को पश्चिम बंगाल के गंगासागर में इसका समापन होगा। यात्रा का उद्देश्य गंगा तट पर बसे प्रमुख शहरों और समुदायों को जोड़ते हुए योग के प्रति जन-जागरूकता फैलाना है। अपने निर्धारित मार्ग में यह यात्रा ऋषिकेश, हरिद्वार, प्रयागराज, वाराणसी, पटना और हुगली सहित कई महत्वपूर्ण स्थलों से होकर गुजर रही है।

कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश सरकार के आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. दयाशंकर मिश्र ‘दयालु’ मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। वहीं आयुष मंत्रालय की महानिदेशक डॉ. चित्रा बी. जी. ने विशिष्ट अतिथि के रूप में सहभागिता की। दोनों अतिथियों ने अपने संबोधन में योग को स्वस्थ एवं संतुलित जीवन का आधार बताते हुए नागरिकों से नियमित योग करने का आह्वान किया।

वक्ताओं ने कहा कि वर्तमान समय में योग केवल शारीरिक व्यायाम तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मानसिक स्वास्थ्य, भावनात्मक संतुलन और समग्र कल्याण का प्रभावी माध्यम बन चुका है। उन्होंने लोगों को योग को दैनिक दिनचर्या में शामिल करने की सलाह देते हुए इसके दीर्घकालिक लाभों पर प्रकाश डाला।

गंगोत्री से गंगासागर तक योग का संदेश लेकर निकली यात्रा का वाराणसी में भव्य स्वागत

इस वर्ष अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस की घोषित थीम “योग फॉर हेल्दी एजिंग” को ध्यान में रखते हुए कार्यक्रम में स्वस्थ वृद्धावस्था, तनावमुक्त जीवन, मानसिक सुदृढ़ता तथा रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में योग की भूमिका पर विशेष चर्चा की गई। विशेषज्ञों ने कहा कि नियमित योगाभ्यास बढ़ती उम्र में भी शरीर को सक्रिय और मन को सकारात्मक बनाए रखने में सहायक सिद्ध होता है।

अपने संबोधन में अतिथियों ने यह भी कहा कि योग भारत की प्राचीन सांस्कृतिक धरोहर है, जिसे आज विश्वभर में सम्मान और स्वीकार्यता प्राप्त हो रही है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रयासों से योग वैश्विक स्तर पर एक जन-आंदोलन का स्वरूप ग्रहण कर चुका है और अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के माध्यम से करोड़ों लोग इसके लाभों से जुड़ रहे हैं।

गंगोत्री से गंगासागर तक योग का संदेश लेकर निकली यात्रा का वाराणसी में भव्य स्वागत

कार्यक्रम के दौरान काशी हिंदू विश्वविद्यालय के संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय के संकाय प्रमुख प्रो. राजाराम शुक्ल ने अतिथियों का स्वागत किया। आयोजन समिति की ओर से प्रो. शशिकांत द्विवेदी ने सभी प्रतिभागियों, अतिथियों तथा सहयोगी संस्थाओं के प्रति आभार व्यक्त किया।

इस अवसर पर भारतीय कुश्ती संघ के अध्यक्ष संजय सिंह बबलू ने विभिन्न योग प्रशिक्षकों को सम्मानित कर उनके योगदान की सराहना की। सम्मान समारोह के दौरान योग शिक्षकों द्वारा समाज में स्वास्थ्य जागरूकता फैलाने के प्रयासों को विशेष रूप से रेखांकित किया गया।

गंगोत्री से गंगासागर तक योग का संदेश लेकर निकली यात्रा का वाराणसी में भव्य स्वागत

कार्यक्रम में सामूहिक योगाभ्यास, जन-जागरूकता अभियान, संवाद सत्र तथा स्वास्थ्य विषयक चर्चाओं का आयोजन भी किया गया। उपस्थित नागरिकों ने आगामी 21 जून को आयोजित होने वाले अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस कार्यक्रमों में अधिक से अधिक संख्या में भाग लेने और योग को जन-आंदोलन बनाने का संकल्प लिया।

पूरे आयोजन का संचालन आचार्य वागीश ओझा ने किया। कार्यक्रम के सफल आयोजन में विभिन्न सामाजिक संगठनों, शिक्षण संस्थानों तथा स्वयंसेवकों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। रविदास घाट पर आयोजित यह कार्यक्रम योग, स्वास्थ्य और भारतीय संस्कृति के प्रति लोगों की बढ़ती जागरूकता का प्रतीक बनकर सामने आया।

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