वाराणसी (रणभेरी): भारतीय अंडर-18 हॉकी टीम ने एशिया कप 2025 में शानदार प्रदर्शन करते हुए तीसरी बार खिताब अपने नाम कर लिया। फाइनल मुकाबले में भारत ने मेजबान और गत विजेता जापान को 4-1 से पराजित कर एशियाई हॉकी में अपनी बादशाहत साबित की। इस ऐतिहासिक जीत का हिस्सा रहे वाराणसी के युवा खिलाड़ी राहुल यादव जब अपने गृह जनपद पहुंचे तो उनका गर्मजोशी के साथ स्वागत किया गया। शहरवासियों, खेल प्रेमियों और हॉकी से जुड़े लोगों ने उन्हें फूल-मालाओं से सम्मानित किया तथा उनकी उपलब्धि पर गर्व व्यक्त किया।
भारत ने इससे पहले वर्ष 2001 और 2016 में अंडर-18 एशिया कप का खिताब जीता था। अब तीसरी बार ट्रॉफी जीतकर टीम ने नया इतिहास रच दिया है। वाराणसी के सीरगोवर्धनपुर निवासी राहुल यादव इस विजेता टीम के सदस्य रहे और उन्होंने देश का नाम रोशन किया।
जीत को बाबा विश्वनाथ और परिवार को किया समर्पित
स्वदेश लौटने के बाद राहुल यादव ने अपनी सफलता का श्रेय बाबा विश्वनाथ की कृपा, माता-पिता के आशीर्वाद और अपने प्रशिक्षकों के मार्गदर्शन को दिया। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश के लिए खेलना उनके लिए गर्व की बात है। यह स्वर्ण पदक केवल उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि उनके परिवार, कोच और उन सभी लोगों की मेहनत का परिणाम है जिन्होंने कठिन समय में उनका साथ दिया।
राहुल ने कहा कि काशी की धरती पर लौटकर उन्हें जो सम्मान मिला है, वह उनके लिए किसी पुरस्कार से कम नहीं है। उन्होंने अपनी उपलब्धि को भगवान बाबा विश्वनाथ के चरणों में समर्पित करते हुए कहा कि भविष्य में भी वह देश के लिए बेहतर प्रदर्शन करने का प्रयास करेंगे।
जापान की धरती पर जापान को हराना यादगार
राहुल यादव ने बताया कि इस बार पूरे टूर्नामेंट का आयोजन जापान में हुआ था और जापानी टीम खिताब की प्रबल दावेदार मानी जा रही थी। ऐसे में मेजबान टीम को उसके घरेलू मैदान पर हराना भारतीय खिलाड़ियों के लिए बड़ी उपलब्धि है।
उन्होंने कहा कि सेमीफाइनल में पाकिस्तान के खिलाफ मिली जीत ने टीम का आत्मविश्वास काफी बढ़ा दिया था। भारतीय खिलाड़ियों ने पूरे टूर्नामेंट में एकजुट होकर प्रदर्शन किया और फाइनल में भी उसी आत्मविश्वास के साथ मैदान में उतरे। राहुल के अनुसार यह जीत उनके खेल जीवन की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धियों में से एक है।
युवा खिलाड़ियों को दिया मेहनत का संदेश
राहुल यादव ने युवाओं को प्रेरित करते हुए कहा कि खेलों में सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता। निरंतर अभ्यास, अनुशासन और समर्पण ही खिलाड़ी को ऊंचाइयों तक पहुंचाते हैं। उन्होंने कहा कि उनके कोच हमेशा सिखाते रहे हैं कि मेहनत से कभी पीछे नहीं हटना चाहिए और यही सीख उन्हें इस मुकाम तक लेकर आई है।

उन्होंने कहा कि अगर खिलाड़ी पूरी निष्ठा और ईमानदारी के साथ मेहनत करें तो सफलता अवश्य मिलती है। आज के युवा खिलाड़ियों को चुनौतियों से घबराने के बजाय अपने लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।
संघर्ष से सफलता तक का सफर
राहुल यादव का जीवन संघर्ष और मेहनत की मिसाल है। उनके पिता सुभाष यादव वाराणसी में एक साड़ी निर्माण इकाई में दैनिक मजदूर के रूप में कार्य करते हैं। सीमित संसाधनों के बावजूद परिवार ने राहुल के खेल करियर को आगे बढ़ाने में कोई कसर नहीं छोड़ी।
राहुल ने हॉकी की शुरुआती शिक्षा काशी हिंदू विश्वविद्यालय के एस्ट्रोटर्फ मैदान पर प्राप्त की। वहां उन्होंने प्रशिक्षकों अखिल मल्होत्रा और डॉ. प्रदीप के मार्गदर्शन में अपने खेल को निखारा। उनकी प्रतिभा और मेहनत के बल पर लगभग पांच वर्ष पूर्व उनका चयन लखनऊ हॉकी छात्रावास के लिए हुआ, जहां उन्हें बेहतर प्रशिक्षण और प्रतियोगी माहौल मिला।
हॉकी वाराणसी के पदाधिकारियों का कहना है कि राहुल ने अपने प्रदर्शन से यह साबित कर दिया है कि कठिन परिस्थितियां भी प्रतिभा और मेहनत के आगे बाधा नहीं बन सकतीं। उनकी उपलब्धि से वाराणसी के युवा खिलाड़ियों में नया उत्साह पैदा हुआ है।
फाइनल मुकाबले में भारत का दबदबा
खिताबी मुकाबले की शुरुआत से ही भारतीय टीम आक्रामक नजर आई। मैच के शुरुआती दो मिनट के भीतर भारत को पेनल्टी कॉर्नर मिला, जिसे आशीष तानी पुर्ती ने गोल में बदलकर टीम को शुरुआती बढ़त दिलाई।
पहले गोल के बाद भारतीय खिलाड़ियों का आत्मविश्वास और बढ़ गया। दूसरे क्वार्टर में जापान ने बराबरी की कोशिश की, लेकिन भारतीय रक्षापंक्ति ने उसे सफल नहीं होने दिया। इसी दौरान भारत को एक और पेनल्टी कॉर्नर मिला और आशीष ने शानदार गोल दागकर बढ़त को दोगुना कर दिया।

हाफ टाइम से ठीक पहले भारतीय कप्तान केतन कुशवाहा ने गोल करते हुए स्कोर 3-0 कर दिया। तीसरे क्वार्टर में भी भारत का दबदबा कायम रहा। आशीष ने एक और गोल कर अपनी हैट्रिक पूरी की और टीम को 4-0 की मजबूत स्थिति में पहुंचा दिया।
अंतिम क्वार्टर में जापान ने संघर्ष करते हुए पेनल्टी स्ट्रोक पर एक गोल जरूर किया, लेकिन भारतीय टीम ने बाकी समय विपक्षी टीम को कोई और मौका नहीं दिया। मजबूत रक्षा और अनुशासित खेल की बदौलत भारत ने 4-1 से मुकाबला जीतकर एशिया कप की ट्रॉफी अपने नाम कर ली।
वाराणसी में जश्न का माहौल
राहुल यादव की उपलब्धि से उनके गांव, परिवार और पूरे वाराणसी में खुशी की लहर है। स्थानीय खेल संगठनों और हॉकी प्रेमियों ने उनके सम्मान में विशेष कार्यक्रम आयोजित किए। लोगों का मानना है कि राहुल की सफलता आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी।
भारत की इस ऐतिहासिक जीत ने न केवल देश को गौरवान्वित किया है, बल्कि यह भी दिखाया है कि छोटे शहरों और साधारण परिवारों से निकलने वाले खिलाड़ी भी अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश का झंडा बुलंद कर सकते हैं।
