(रणभेरी): जंतर मंतर पर शनिवार को उस समय माहौल गरम हो गया जब “कॉकरोच जनता पार्टी (CJP)” ने प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक के आरोपों के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। यह धरना करीब पाँच घंटे तक चला, जिसमें बड़ी संख्या में छात्र, युवा और अभिभावक शामिल हुए।
प्रदर्शन के दौरान मुख्य रूप से NEET-UG पेपर लीक और अन्य भर्ती व प्रवेश परीक्षाओं में सामने आए विवादों को लेकर नाराज़गी जताई गई। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि लगातार हो रही गड़बड़ियों ने देशभर के लाखों छात्रों के भविष्य पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके, जो सुबह अमेरिका के बोस्टन से नई दिल्ली पहुंचे, सीधे एयरपोर्ट से जंतर-मंतर धरना स्थल पर पहुंचे। उनके पहुंचते ही प्रदर्शन में मौजूद लोगों में उत्साह देखा गया। सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए पुलिस की तैनाती पहले से ही बढ़ा दी गई थी।

धरने के दौरान अभिजीत दीपके ने केंद्र सरकार और विशेषकर शिक्षा मंत्रालय पर सवाल उठाते हुए कहा कि परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर संकट गहराता जा रहा है। उन्होंने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग दोहराते हुए चेतावनी दी कि यदि आगामी पाँच दिनों में कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती है तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा, और अगले शनिवार को फिर से बड़ा प्रदर्शन किया जाएगा।
इस प्रदर्शन में बड़ी संख्या में छात्र संगठनों से जुड़े युवा भी शामिल हुए। कई अभिभावक अपने बच्चों के साथ पहुंचे और उन्होंने भी परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता की मांग की। कुछ वरिष्ठ नागरिकों ने भी आंदोलन में भाग लेकर छात्रों के समर्थन में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।

इसी बीच, प्रदर्शन स्थल पर उस समय हल्का तनाव पैदा हो गया जब एक व्यक्ति हाथ में स्प्रे लेकर पहुंचा और उसने प्रदर्शनकारियों पर तीखी टिप्पणी करते हुए संगठन को लेकर विवादित बयान दिया। इसके बाद प्रदर्शनकारियों और उस व्यक्ति के बीच कहासुनी और धक्का-मुक्की जैसी स्थिति बन गई। मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने तुरंत हस्तक्षेप करते हुए स्थिति को नियंत्रित किया और संबंधित व्यक्ति को वहां से हटाया। इसके बाद माहौल फिर सामान्य हो गया और प्रदर्शन शांतिपूर्वक जारी रहा।

पूरे कार्यक्रम के दौरान भारी पुलिस बल तैनात रहा, जिससे किसी भी बड़े तनाव को बढ़ने से पहले ही रोक लिया गया। आयोजकों ने प्रदर्शन को शांतिपूर्ण बताते हुए कहा कि उनका उद्देश्य केवल शिक्षा व्यवस्था में सुधार और जवाबदेही तय करना है। धरने के अंत में आयोजकों ने स्पष्ट किया कि यदि उनकी मांगों पर जल्द सुनवाई नहीं हुई, तो आंदोलन को देशव्यापी स्तर पर और तेज किया जाएगा।
