अघोषित बिजली कटौती सबित हो रही कोढ़ का खाज, जनजीवन बेहाल
लू का रेड अलर्ट, पारा 47 डिग्री की ओर, शहर तपिश की चपेट में
वाराणसी (रणभेरी): काशी इस समय भीषण गर्मी और प्रचंड लू की चपेट में है। मौसम विभाग ने इस वर्ष पहली बार लगातार दो दिनों के लिए शहर में लू का रेड अलर्ट जारी किया है। 22 और 23 मई को गर्म हवाओं और तीखी धूप के कारण लोगों को अत्यधिक सतर्क रहने की सख्त सलाह दी गई है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि आने वाले दिनों में अधिकतम तापमान 47 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है, जिससे हालात और गंभीर हो सकते हैं। रात के समय भी गर्मी से राहत मिलने की संभावना बेहद कम है, जिससे आम जनजीवन प्रभावित हो रहा है।
आज शहर का अधिकतम तापमान 43.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से लगभग 2.8 डिग्री अधिक है। न्यूनतम तापमान भी सामान्य से ऊपर बना हुआ है, जिससे दिन और रात दोनों समय गर्मी का असर लगातार महसूस किया जा रहा है। वातावरण में नमी और गर्म हवाओं के मेल से लू का प्रभाव और तेज हो गया है।
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार 10 से 15 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चल रही गर्म हवाएं हीट इंडेक्स को और बढ़ा रही हैं, जिससे शरीर पर गर्मी का दबाव अधिक महसूस हो रहा है। भीषण धूप के कारण दोपहर के समय सड़कों पर सन्नाटा पसर गया है। लोग अत्यंत आवश्यक कार्य होने पर ही घरों से बाहर निकल रहे हैं। बाजारों में भी चहल-पहल कम हो गई है और यातायात पर भी असर देखा जा रहा है। लोग धूप से बचने के लिए गमछा, टोपी और छाते का सहारा ले रहे हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि इस दौरान पर्याप्त मात्रा में पानी पीया जाए, हल्के और सूती कपड़े पहने जाएं तथा सीधे धूप के संपर्क से बचा जाए।
लू के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए प्रशासन और मौसम विभाग दोनों ने लोगों से विशेष सावधानी बरतने की अपील की है, ताकि गर्मी से होने वाले स्वास्थ्य जोखिमों को कम किया जा सके।
दोपहर में सड़कों पर पसरा सन्नाटा
भीषण गर्मी का असर शहर के जनजीवन पर साफ दिखाई दे रहा है। दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे के बीच प्रमुख मार्गों पर सन्नाटा पसरा रहता है और सामान्य दिनों की तुलना में सड़कें लगभग खाली नजर आती हैं। जरूरी काम न होने पर लोग घरों में ही रहने को मजबूर हैं, जिससे बाहरी गतिविधियां काफी हद तक सीमित हो गई हैं। बाजारों में भी चहल-पहल में स्पष्ट गिरावट देखी जा रही है और दुकानों पर ग्राहकों की संख्या कम हो गई है। वहीं, सड़क पर वाहनों की आवाजाही भी सामान्य दिनों की तुलना में घट गई है। तेज धूप और लू से बचने के लिए लोग गमछा, टोपी और छाते का सहारा ले रहे हैं। कई लोग चेहरे और शरीर को ढककर ही बाहर निकल रहे हैं। गर्म हवाओं के कारण दोपहर का समय सबसे अधिक कठिन साबित हो रहा है, जिससे दैनिक जीवन प्रभावित हो रहा है।
घाटों पर असर, पर्यटन और रोजगार पर मार
गर्मी का असर गंगा घाटों पर भी स्पष्ट रूप से देखने को मिल रहा है। तेज धूप और प्रचंड लू के कारण पर्यटकों की संख्या में भारी गिरावट दर्ज की गई है, जिससे घाट किनारे दुकान लगाने वाले छोटे व्यापारियों की आय पर सीधा असर पड़ा है। सामान्य दिनों में जहां घाटों पर रौनक बनी रहती थी, वहीं अब दोपहर के समय सन्नाटा पसरा नजर आता है। गंगा आरती के समय को छोड़कर दिनभर पर्यटकों की आवाजाही बेहद कम हो गई है। नाव संचालन भी दिन के समय लगभग ठप पड़ा है, क्योंकि तीखी धूप और गर्म हवाओं के बीच पर्यटक गंगा में नाव से घूमने से बच रहे हैं। इससे नाविकों और पर्यटन से जुड़े लोगों की आजीविका प्रभावित हो रही है। कई नाविकों का कहना है कि दिनभर इंतजार के बावजूद सवारी नहीं मिल रही है। गर्मी का यह असर न केवल पर्यटन पर, बल्कि घाटों से जुड़े छोटे व्यवसायों की रोजी-रोटी पर भी गहरा संकट खड़ा कर रहा है।

गर्मी के बीच तैराकी सीखने की बढ़ती रुचि
भीषण गर्मी के बीच एक सकारात्मक तस्वीर भी सामने आ रही है। गर्मी की छुट्टियों के दौरान बच्चों में तैराकी सीखने का उत्साह तेजी से बढ़ा है। अभिभावक अपने बच्चों को जल सुरक्षा के महत्व को समझते हुए तैराकी प्रशिक्षण दिलाने के लिए आगे आ रहे हैं। गायघाट पर प्रतिदिन आयोजित हो रही तैराकी कक्षाओं में बच्चे उत्साहपूर्वक भाग ले रहे हैं और पानी में संतुलन व सुरक्षा के गुर सीख रहे हैं। प्रशिक्षकों के अनुसार, इस मौसम में बच्चों की भागीदारी पहले की तुलना में अधिक बढ़ी है, जो एक सकारात्मक संकेत है। वहीं, मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में स्थिति और गंभीर होने की संभावना जताई है। लगातार बढ़ती गर्मी और लू को देखते हुए प्रशासन और जनता दोनों के लिए सतर्कता बेहद जरूरी हो गई है। विशेषज्ञों ने सावधानी बरतने और स्वास्थ्य सुरक्षा उपाय अपनाने की अपील की है।
मई माह में जून जितनी बिजली की हो रही खपत
इधर प्रचंड गर्मी के चलते बिजली खपत ने भी नया रिकॉर्ड बना दिया है। इस वर्ष 19 मई को ही बिजली की मांग 900 मेगावाट तक पहुंच गई, जबकि पिछले वर्ष 14 जून को 896 मेगावाट की खपत दर्ज हुई थी। बढ़ती मांग के कारण शहर और ग्रामीण क्षेत्रों के अधिकांश बिजली उपकेंद्र ओवरलोडिंग की चपेट में आ गए हैं। प्रतिदिन 4 से 5 ट्रांसफॉर्मर फुंकने की घटनाएं सामने आ रही हैं। विभागीय अभियंताओं का अनुमान है कि जून और जुलाई में बिजली की मांग बढ़कर 1200 मेगावाट तक पहुंच सकती है।
