गंगा घाटों पर खतरे की घंटी, 30 ब्लैक स्पॉट पर सख्ती

गंगा घाटों पर खतरे की घंटी, 30 ब्लैक स्पॉट पर सख्ती
  • जनवरी से अप्रैल 2026 तक गंगा में डूबने और हादसों में आठ मौतें, प्रशासन सतर्क
  • बैरिकेडिंग, वॉच टॉवर और बढ़ी निगरानी से हादसे रोकने की तैयारी

वाराणसी (रणभेरी): काशी के गंगा घाटों पर लगातार बढ़ते हादसों ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। श्रद्धालुओं और पर्यटकों की बढ़ती भीड़ के बीच अब लापरवाही और सेल्फी का जुनून लोगों की जान पर भारी पड़ रहा है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए नगर निगम ने गंगा किनारे स्थित 30 घाटों और संवेदनशील स्थानों को ब्लैक स्पॉट घोषित किया है। इन स्थानों पर जल्द बैरिकेडिंग कराई जाएगी और वॉच टॉवर के जरिए लगातार निगरानी रखी जाएगी, ताकि हादसों पर अंकुश लगाया जा सके।

प्रशासनिक रिपोर्ट के अनुसार गंगा घाटों पर पर्यटकों और श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। इसके साथ ही दुर्घटनाओं का आंकड़ा भी बढ़ा है। सबसे अधिक चिंता की बात यह है कि लोग सुरक्षा नियमों को नजरअंदाज कर नाव और क्रूज पर सेल्फी लेने, वीडियो बनाने और जोखिम भरे स्थानों तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं। कई बार यह शौक जानलेवा साबित हो रहा है। जनवरी से अप्रैल 2026 के बीच गंगा में डूबने और अन्य दुर्घटनाओं में आठ लोगों की मौत हो चुकी है।

नगर निगम और जल पुलिस की रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि अधिकतर हादसे उन्हीं स्थानों पर हो रहे हैं जहां लोग गहरे पानी के करीब जाने या नावों के बीच खड़े होकर वीडियो बनाने की कोशिश करते हैं। दिन में जल पुलिस की टीम लोगों को लगातार सतर्क करती है, लेकिन रात में घाटों पर भीड़ बढ़ने के साथ लापरवाही भी बढ़ जाती है। कई लोग बिना लाइफ जैकेट पहने नावों और क्रूज पर सवार हो जाते हैं, जिससे छोटी सी चूक भी बड़े हादसे में बदल जाती है।

हाल ही में मान घाट पर हुई घटना ने प्रशासन को और अधिक सतर्क कर दिया। नोएडा निवासी एक युवक क्रूज पर खड़े होकर मोबाइल से वीडियो और सेल्फी बना रहा था। इसी दौरान वह एक नाव से दूसरी नाव पर जाने की कोशिश करने लगा। दोनों हाथों में मोबाइल होने के कारण संतुलन बिगड़ा और उसका पैर फिसल गया। गंगा में गिरने के बाद वह खुद को संभाल नहीं सका और उसकी मौत हो गई। प्रशासनिक आंकड़ों के अनुसार बीते चार वर्षों में सबसे अधिक हादसे तुलसी घाट और ललिता घाट पर हुए हैं। वर्ष 2023 में 46 हादसे दर्ज किए गए, जबकि वर्ष 2022 और 2024 में 37-37 घटनाएं सामने आईं। वर्ष 2025 में 32 हादसे हुए और 2026 में अब तक दो बड़े हादसे दर्ज किए जा चुके हैं। मार्च 2026 में तुलसी घाट पर गहरे पानी में जाने से गोरखपुर के रहने वाले 18 वर्षीय निखिल और 12 वर्षीय आयुष की भी मौत हो गई थी।

नगर निगम ने अस्सी घाट, नमो घाट, पंचगंगा घाट, हरिश्चंद्र घाट, केदार घाट और शिवाला घाट सहित कई प्रमुख स्थानों को ब्लैक स्पॉट के रूप में चिह्नित किया है। प्रशासन का कहना है कि अस्सी से नमो घाट तक प्रतिदिन एक लाख से अधिक श्रद्धालु और पर्यटक पहुंचते हैं। ऐसे में बैरिकेडिंग, चेतावनी बोर्ड, रात में गश्त और वॉच टॉवर की व्यवस्था से घाटों को पहले से अधिक सुरक्षित बनाने की कोशिश की जा रही है। प्रशासन को उम्मीद है कि इन कदमों से हादसों में कमी आएगी और लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सकेगी।

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