वाराणसी (रणभेरी): वाराणसी के पिंडरा तहसील परिसर में शुक्रवार दोपहर उस समय तनावपूर्ण स्थिति बन गई जब एक अधिवक्ता और आवास विकास परिषद के कंप्यूटर ऑपरेटर के बीच शुरू हुई कहासुनी मारपीट में बदल गई। घटना के बाद बड़ी संख्या में वकीलों ने तहसील परिसर में एकत्र होकर विरोध प्रदर्शन किया, जिससे कुछ समय के लिए अफरातफरी का माहौल बन गया।
जानकारी के अनुसार, काशी द्वार योजना के अंतर्गत तहसील भवन की दूसरी मंजिल पर जमीन रजिस्ट्री से जुड़ा आवास विकास विभाग का कार्यालय संचालित होता है। बताया गया कि अधिवक्ता अनुप कुमार एक किसान से संबंधित रजिस्ट्री फाइल लेकर कार्यालय पहुंचे थे। इसी दौरान फाइल के रख-रखाव को लेकर कंप्यूटर ऑपरेटर युगलकिशोर से उनकी बहस हो गई। आरोप है कि फाइल को अनदेखा किए जाने की बात पर विवाद बढ़ा और स्थिति हाथापाई तक पहुंच गई।
घटना की जानकारी मिलते ही तहसील बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों के नेतृत्व में अधिवक्ताओं की भीड़ एसडीएम कक्ष के बाहर इकट्ठा हो गई और नारेबाजी करते हुए विरोध जताने लगी। हालात बिगड़ते देख आवास विकास विभाग के कर्मचारी कार्यालय छोड़कर एसडीएम कक्ष में चले गए।
सूचना पर पुलिस बल भी मौके पर पहुंचा। एडीसीपी के नेतृत्व में फूलपुर, बड़ागांव और सिंधोरा थानों की पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित किया और व्यवस्था बहाल कराई।
बढ़ते तनाव को देखते हुए एसडीएम पिंडरा ने बार एसोसिएशन के प्रतिनिधिमंडल को वार्ता के लिए बुलाया। दोनों पक्षों की बात सुनने के बाद समझौते का रास्ता निकाला गया, जिसके बाद माहौल शांत हुआ।
प्रशासन की ओर से बताया गया कि काशी द्वार योजना के तहत चल रही जमीन रजिस्ट्री प्रक्रिया को अस्थायी रूप से तीन दिनों के लिए रोक दिया गया है। इस दौरान लेखपालों को संबंधित जमीनों का स्थलीय सत्यापन कर विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं।
साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया कि बैनामा प्रक्रिया पुराने रिकॉर्ड और नक्शों के आधार पर ही की जाएगी। यदि किसी स्थान पर नई चकरोड या परिवर्तन पाया जाता है, तब भी रजिस्ट्री पूर्व दस्तावेजों के अनुसार ही संपन्न होगी। इस दौरान बार एसोसिएशन के कई पदाधिकारी और अधिवक्ता मौके पर मौजूद रहे, जिनमें प्रमुख रूप से प्रीत राज माथुर सहित अन्य सदस्य शामिल थे।
