कानपुर में अवैध किडनी ट्रांसप्लांट रैकेट का खुलासा, MBA छात्र ICU में भर्ती

कानपुर में अवैध किडनी ट्रांसप्लांट रैकेट का खुलासा, MBA छात्र ICU में भर्ती

पैसों की तंगी में छात्र ने बेची किडनी, पूरी रकम न मिलने पर खोला राज; 6 गिरफ्तार, 4 डॉक्टर फरार

(रणभेरी): कानपुर में अवैध किडनी ट्रांसप्लांट रैकेट का सनसनीखेज मामला सामने आया है। बिहार के समस्तीपुर निवासी MBA छात्र आयुष कुमार, जो रुपए के लालच और आर्थिक तंगी के कारण अपनी किडनी बेच बैठा, फिलहाल हैलट अस्पताल के ICU में भर्ती है। ऑपरेशन के बाद उसकी हालत पूरी तरह सामान्य नहीं है और डॉक्टरों की निगरानी में उसका इलाज चल रहा है।

पुलिस के अनुसार, आयुष ने 6 लाख रुपए में अपनी किडनी बेचने का सौदा किया था, लेकिन उसे पूरी रकम नहीं मिली। इसके बाद उसने पूरे मामले का खुलासा कर दिया, जिसके बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए 6 लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है, जबकि इस गिरोह से जुड़े 4 डॉक्टर अभी फरार हैं। इनके खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी किया गया है।

कानपुर में अवैध किडनी ट्रांसप्लांट रैकेट का खुलासा, MBA छात्र ICU में भर्ती

मां से सच छिपाने की गुहार

पूछताछ के दौरान आयुष भावुक हो गया और पुलिसकर्मियों से अपनी मां को सच्चाई न बताने की गुहार लगाई। उसने बताया कि वह घर से नौकरी करने की बात कहकर कानपुर आया था। परिजनों को इस घटना की जानकारी नहीं है।

गर्लफ्रेंड से मिलते ही रो पड़ा आयुष

पुलिस ने आयुष की गर्लफ्रेंड को बिहार से बुलवाकर उससे ICU में मुलाकात कराई। प्रेमिका को देखते ही आयुष फूट-फूटकर रो पड़ा और अपनी गलती स्वीकार की। उसने बताया कि फीस के लिए पैसे न जुट पाने के कारण उसने यह कदम उठाया।

गर्लफ्रेंड ने उसे ढांढस बंधाया और नाराजगी भी जताई। उसने बताया कि आयुष की मां बेहद परेशान हैं और लगातार उसके बारे में पूछ रही हैं।

ऐसे फंसा किडनी गैंग के जाल में

पुलिस जांच में सामने आया कि आयुष की मुलाकात पहले एक एजेंट से हुई, जिसने उसे डॉक्टरों के संपर्क में लाया। मेडिकल रिपोर्ट तैयार कराकर उसे कानपुर बुलाया गया, जहां एक निजी अस्पताल में ऑपरेशन किया गया। ऑपरेशन के बाद वादे के अनुसार पूरी रकम नहीं दी गई सिर्फ साढ़े तीन लाख रुपए ही उसके खाते में ट्रांसफर किए गए।

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डॉक्टरों का नेटवर्क और कई शहरों में कनेक्शन

जांच में सामने आया है कि यह रैकेट कानपुर, मेरठ, नोएडा, गाजियाबाद और लखनऊ तक फैला हुआ है। फरार डॉक्टरों में मेरठ के एक अस्पताल संचालक समेत कई नाम शामिल हैं। पुलिस की टीमें अलग-अलग शहरों में दबिश दे रही हैं। प्राथमिक जांच में यह भी पता चला है कि कुछ अस्पताल अवैध ट्रांसप्लांट के लिए ऑपरेशन थिएटर और पोस्ट-ऑपरेटिव सुविधाएं उपलब्ध कराते थे।

100 से ज्यादा अवैध ट्रांसप्लांट की आशंका

पुलिस को शक है कि इस नेटवर्क के जरिए 100 से अधिक अवैध किडनी ट्रांसप्लांट किए जा चुके हैं। अस्पतालों के CCTV और रिकॉर्ड खंगाले जा रहे हैं। कई जगहों पर ऑपरेशन के दौरान कैमरे बंद रखने की भी आशंका जताई गई है।

विदेशी कनेक्शन की भी जांच

मामले में एक विदेशी महिला के ट्रांसप्लांट की भी जांच की जा रही है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि उसे किडनी किसने डोनेट की और वह शहर में कब और कहां रुकी।

आर्थिक तंगी बनी वजह

आयुष ने पुलिस को बताया कि घर की आर्थिक हालत खराब है। जमीन गिरवी होने के कारण उसे लोन नहीं मिला। पढ़ाई जारी रखने के लिए उसने यह खतरनाक फैसला लिया, लेकिन उसे धोखा मिला।

पुलिस की कार्रवाई जारी

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, फरार आरोपियों की तलाश तेज कर दी गई है और जल्द ही और गिरफ्तारियां हो सकती हैं। मामले में शामिल सभी अस्पतालों और व्यक्तियों की गहन जांच की जा रही है।

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