वाराणसी में संकट मोचन संगीत समारोह में दिखेगी सांस्कृतिक समरसता की अनोखी मिसाल

वाराणसी में संकट मोचन संगीत समारोह में दिखेगी सांस्कृतिक समरसता की अनोखी मिसाल

वाराणसी (रणभेरी) : वाराणसी के प्रसिद्ध संकट मोचन मंदिर में इस वर्ष आयोजित होने जा रहे संगीत समारोह में सांप्रदायिक सौहार्द की खास झलक देखने को मिलेगी। मंदिर के महंत प्रो. विश्वंभर नाथ मिश्रा ने बताया कि पहली बार 14 मुस्लिम कलाकार भी भगवान हनुमान के दरबार में अपनी प्रस्तुतियां देंगे। उन्होंने स्पष्ट कहा कि यहां कलाकारों की पहचान उनकी कला से होती है, न कि उनके धर्म या जाति से। यह मंच सभी के लिए खुला है।

इस बार आयोजन में 11 पद्म पुरस्कार से सम्मानित कलाकार भी भाग लेंगे, जिनमें कई पहली बार इस मंच पर प्रस्तुति देंगे। महंत ने अपील करते हुए कहा कि समाज में कम से कम एक ऐसा स्थान अवश्य होना चाहिए जहां हर विचार और हर धर्म के लोगों का स्वागत हो।

रामायण सम्मेलन से होगी शुरुआत

हनुमान जयंती के अवसर पर 2 से 5 अप्रैल तक भव्य रामायण सम्मेलन आयोजित किया जाएगा। इसमें देशभर से रामायण मंडलियां और विद्वान वक्ता शामिल होंगे। 2 अप्रैल की सुबह विशेष पूजन, आरती और झांकी निकाली जाएगी, जबकि दिन में रामायण पाठ और शाम से भजन-कीर्तन का सिलसिला पूरी रात चलेगा।

वाराणसी में संकट मोचन संगीत समारोह में दिखेगी सांस्कृतिक समरसता की अनोखी मिसाल

संगीत और साधना का संगम

संगीत समारोह में देश के नामचीन कलाकार अपनी प्रस्तुतियां देंगे। लोकगायिका मालिनी अवस्थी, भजन गायक अनूप जलोटा, बांसुरी वादक रोनू मजूमदार सहित कई बड़े नाम शामिल हैं। खास आकर्षण रहेगा शिवमणि के ड्रम और यू. राजेश के मेंडोलिन की जुगलबंदी।

100 साल पुरानी परंपरा

इस आयोजन की शुरुआत वर्ष 1923 में महंत अमरनाथ मिश्र ने की थी। समय के साथ यह एक छोटे स्थानीय कार्यक्रम से विकसित होकर राष्ट्रीय स्तर के प्रतिष्ठित संगीत समारोह में बदल गया है। पहले यह आयोजन एक-दो दिनों तक सीमित था, लेकिन अब यह सात दिनों तक चलता है।

मंच का बदलता स्वरूप

शुरुआत में कार्यक्रम मंदिर के मुख्य द्वार पर होता था, बाद में इसे विस्तारित कर बड़े मंच पर आयोजित किया जाने लगा। पहले इसमें केवल स्थानीय कलाकार भाग लेते थे, लेकिन अब देशभर के प्रसिद्ध कलाकार इसमें शामिल होते हैं। हर रात बड़ी संख्या में श्रोता पूरी रात संगीत का आनंद लेते हैं।

सात दिनों तक चलेगा कार्यक्रम

यह समारोह प्रतिदिन शाम 7:30 बजे शुरू होकर सुबह तक चलता है। सातों दिनों में शास्त्रीय संगीत, नृत्य और वादन की विविध प्रस्तुतियां होंगी, जिनमें कथक, ओडिसी, सरोद, सितार, बांसुरी और गायन शामिल हैं। इस आयोजन ने समय के साथ न केवल संगीत प्रेमियों के बीच अपनी खास पहचान बनाई है, बल्कि यह भारत की सांस्कृतिक एकता और गंगा-जमुनी तहजीब का प्रतीक भी बन चुका है।

नीचे पोस्टर में देखें कब किस कलाकार की होगी प्रस्तुति

वाराणसी में संकट मोचन संगीत समारोह में दिखेगी सांस्कृतिक समरसता की अनोखी मिसाल
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