वाराणसी (रणभेरी): जमीन खरीद-बिक्री के नाम पर एक बड़े फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है, जिसमें वाराणसी के एक प्रॉपर्टी कारोबारी को करीब 16.62 करोड़ रुपये की चपत लगा दी गई। आरोप है कि ठगों ने दूसरे की जमीन को अपनी बताकर उसकी रजिस्ट्री करा दी और रकम मिलने के बाद फरार हो गए। यह मामला तब उजागर हुआ जब खरीदार पक्ष जमीन पर कब्जा लेने पहुंचा।
पुलिस ने इस मामले में कार्रवाई करते हुए दो आरोपियों को गोवा से गिरफ्तार कर वाराणसी लाया है। दोनों को अदालत में पेश करने के बाद जेल भेज दिया गया।
जानकारी के अनुसार, दुर्गाकुंड क्षेत्र के रहने वाले प्रॉपर्टी डीलर अनुराग कुशवाहा ने भेलूपुर थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने बताया कि वह अपने सहयोगियों के साथ मिलकर निर्माण और जमीन के कारोबार से जुड़े हैं। इसी दौरान एक व्यक्ति ने उनसे संपर्क कर गोवा में जमीन बेचने का प्रस्ताव दिया।
आरोपियों ने खुद को जमीन का वैध मालिक बताते हुए न केवल जमीन दिखाई, बल्कि उससे जुड़े दस्तावेज भी प्रस्तुत किए। बाद में वाराणसी और गोवा में कई बैठकों के बाद सौदे की प्रक्रिया पूरी की गई और बड़ी रकम का भुगतान कर दिया गया।
हालांकि, जब पीड़ित पक्ष जमीन पर कब्जा लेने पहुंचा तो एक महिला ने उस जमीन पर अपना हक जताया। इसके बाद पूरे मामले की सच्चाई सामने आई कि जमीन किसी और की थी और दस्तावेज फर्जी थे।
पीड़ित का आरोप है कि जब उन्होंने अपनी रकम वापस मांगी, तो आरोपियों ने उन्हें जान से मारने की धमकी भी दी। पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान गोवा के प्रजय प्रसन्ना शिरोडकर और अमित कुमार सिन्हा के रूप में हुई है। जबकि इस मामले में कुछ अन्य लोग अभी फरार हैं, जिनकी तलाश जारी है।
पुलिस का कहना है कि यह एक सुनियोजित गिरोह का काम हो सकता है, जो लोगों को जमीन के नाम पर झांसा देकर ठगी करता है। मामले की जांच जारी है और फरार आरोपियों को जल्द गिरफ्तार करने का प्रयास किया जा रहा है।
