अयोध्या में ऐतिहासिक क्षण: श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में ‘श्रीराम यंत्र’ की स्थापना, राष्ट्रपति ने किए दर्शन

अयोध्या में ऐतिहासिक क्षण: श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में ‘श्रीराम यंत्र’ की स्थापना, राष्ट्रपति ने किए दर्शन

(रणभेरी): हिंदू नववर्ष और चैत्र नवरात्रि के शुभ अवसर पर रामनगरी अयोध्या एक बार फिर ऐतिहासिक क्षण की साक्षी बनी। बुधवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने श्रीराम जन्मभूमि मंदिर की दूसरी मंजिल पर वैदिक विधि-विधान के साथ ‘श्रीराम यंत्र’ की स्थापना के कार्यक्रम में सहभागिता की। इस अवसर पर पूरे शहर में उत्साह और आध्यात्मिक उल्लास का वातावरण देखने को मिला।

राष्ट्रपति सुबह लगभग 11 बजे महर्षि वाल्मीकि अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर पहुंचीं, जहां से कड़े सुरक्षा प्रबंधों के बीच वे सड़क मार्ग से मंदिर परिसर पहुंचीं। आद्य शंकराचार्य द्वार से प्रवेश करने के बाद उन्होंने सर्वप्रथम श्रीरामलला के दर्शन किए और आशीर्वाद प्राप्त किया। इस दौरान मंदिर परिसर और पूरे नगर को केसरिया ध्वजों, बैनरों और पुष्प सजावट से सुसज्जित किया गया था।

अयोध्या में ऐतिहासिक क्षण: श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में ‘श्रीराम यंत्र’ की स्थापना, राष्ट्रपति ने किए दर्शन

वैदिक परंपरा के अनुसार स्थापना

मंदिर की दूसरी मंजिल पर स्थापित ‘श्रीराम यंत्र’ को पारंपरिक धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अत्यंत विशेष और ऊर्जावान माना जा रहा है। यह यंत्र वैदिक गणित और प्राचीन ज्यामितीय सिद्धांतों के आधार पर निर्मित बताया गया है। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अनुसार, इसे दो वर्ष पूर्व भव्य शोभायात्रा के माध्यम से अयोध्या लाया गया था।

आध्यात्मिक और धार्मिक महत्व

मान्यता है कि यह यंत्र मंदिर परिसर में सकारात्मक ऊर्जा और आध्यात्मिक वातावरण को और अधिक सशक्त बनाता है। स्थापना समारोह में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तथा राज्यपाल आनंदीबेन पटेल भी उपस्थित रहीं, जिससे कार्यक्रम की गरिमा और बढ़ गई।

सुरक्षा और व्यवस्थाओं के पुख्ता इंतजाम

जिला प्रशासन द्वारा राष्ट्रपति के आगमन को ध्यान में रखते हुए व्यापक सुरक्षा और व्यवस्थाएं की गई थीं। 19 मार्च को आम श्रद्धालुओं के लिए विशेष ‘वीआईपी दर्शन’ व्यवस्था अस्थायी रूप से बंद रखी गई, जबकि सामान्य श्रद्धालुओं की सुविधा का पूरा ध्यान रखा गया। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के अनुसार, हवाई अड्डे से लेकर मंदिर परिसर तक पूरे मार्ग पर सुरक्षा बलों की तैनाती की गई थी।

विद्वानों की उपस्थिति और श्रमिकों का सम्मान

इस विशेष अनुष्ठान को संपन्न कराने के लिए काशी, दक्षिण भारत और अयोध्या से आए 51 वैदिक विद्वानों ने मंत्रोच्चार और विधि-विधान के साथ कार्य संपन्न कराया। इस टीम का नेतृत्व प्रतिष्ठित आचार्य गणेश्वर शास्त्री ने किया।

कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रपति ने मंदिर निर्माण में योगदान देने वाले 400 से अधिक श्रमिकों को भी सम्मानित किया। उन्होंने मंदिर परिसर के बाहरी भाग में स्थित एक अन्य मंदिर पर ध्वजारोहण भी किया। अयोध्या में आयोजित यह आयोजन धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक परंपरा और आधुनिक व्यवस्थाओं का अनूठा संगम बनकर सामने आया, जिसने पूरे देश में विशेष चर्चा का विषय बना दिया।

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